Smartphone Addiction: मोबाइल की लत का ही असर है कि, आज देशभर से बच्चों के आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. हाल ही में ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद से सामने आया है. जहां मोबाइल पर गेम खेलने की लत से तीन बहनों ने आत्मघाती कदम उठा लिया. ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चों के पालन-पोषण पर अधिक ध्यान दें, लेकिन मोबाइल से दूरी रखें. अब सवाल है कि आखिर मोबाइल की लत बच्चों को कैसे प्रभावित करती है? इस बारे में बता रहे हैं मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
जानिए, मानसिक सेहत पर कैसे वार कर रही है मोबाइल की लत. (Canva)
Smartphone Addiction: ये सच है कि, आजकल लोगों में मोबाइल की लत बढ़ती जा रही है. इसका असर लोगों की मानसिक सेहत पर पड़ रहा है. इसका सबसे ज्यादा गलत असर कम उम्र के बच्चों पर देखने को मिल रहा है. क्योंकि, अधिकतर बच्चे स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का खूब इस्तेमाल करते हैं. यही वजह है बच्चों की मानसिक सेहत पर इसका प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है. मोबाइल की लत का ही असर है कि, आज देशभर से बच्चों के आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. हाल ही में ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद से सामने आया है. जहां मोबाइल पर गेम खेलने की लत से तीन बहनों ने आत्मघाती कदम उठा लिया. ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स बच्चों के पालन-पोषण पर अधिक ध्यान दें, लेकिन मोबाइल से दूरी रखें. अब सवाल है कि आखिर मोबाइल की लत बच्चों को कैसे प्रभावित करती है? पैरेंट्स कैसे लाएं बच्चों में सुधार? आइए जानते हैं इन सवालों के बारे में India News को बता रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
एक्सपर्ट के मुताबिक, एंजाइटी एक परेशान करने वाली भावना है, जिसमें लोगों को हर वक्त लगता है कि कुछ ठीक नहीं है, भले ही सब कुछ ठीक हो. एंजाइटी से पीड़ित होने पर लगता है कि जैसे अचानक कुछ खतरनाक होने वाला है. ऐसी कंडीशन में लोगों के दिल की धड़कन तेज हो जाती है, हथेलियों पर पसीना आ जाता है, शरीर कांपने लगता है और मांसपेशियों में तनाव जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं. अगर वक्त रहते एंजाइटी को कंट्रोल न किया जाए, तो यह डिप्रेशन का रूप ले सकता है. यही वजह है कि आज बच्चों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ रहा है.
लिमिट का ध्यान रखें: सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के डिजिटल कंटेंट की लिमिट तय करें, जो चीजें बच्चों की सेहत पर असर डालती हैं, उन्हें बच्चों को न देखने दें. यह पेरेंट्स की जिम्मेदारी है. बच्चों के डिजिटल एक्सपोज़र का टाइम कम कर दें. यह अनुशासन आपके बच्चे में फोन की लत को छुड़ाने में मददगार हो सकता है.
हेल्दी डाइट: बच्चों की ओवरऑल हेल्थ सुधारने के लिए उनकी सही डाइट प्लान करें. साथ ही मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए बच्चों को बाहर खेलने के लिए ले जाएं. बाहर ले जाकर बच्चों को महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें, जिससे उनकी क्रिएटिविटी बढ़ सके.
भरपूर नींद लें: ज्यादातर बच्चों में देखने में आता है कि वह सोने से पहले देर फोन चलाते हैं. ऐसा करना सेहत के लिए घातक हो सकता है. इससे उनकी नींद प्रभावित हो सकती है. यदि आप इस लत से बच्चे को बचाना चाहते हैं तो रात में सोने से कम से कम 2 घंटे पहले फोन को अलग रख देना चाहिए.
बच्चों से फ्रेंडली व्योहार: बच्चों को प्यार और दुलार से भी मोबाइल की लत छुड़ा सकते हैं. इसके लिए आप बच्चों के मन में झांकने की कोशिश करें और उनसे खुलकर बात करें. ऐसा करने से बच्चे आपसे अपनी परेशानी शेयर कर पाएंगे और आपको पेरेंटिंग में काफी मदद मिल सकेगा. इससे उनकी मेंटल हेल्थ बेहतर होगी.
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