Piles Symptoms And Prevention: बवासीर (Piles) ऐसी ही बीमारियों में से एक है. इस बीमारी को आयुर्वेद में इसे 'अर्श रोग' के नाम से जानते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, यह गुदा या मलाशय की नसों में सूजन से होती है. ज्यादातर लोग शर्म के कारण इसे छुपाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है. आइए जानते हैं कि, आखिर पाइल्स क्यों होती है? किन लोगों में बावासीर का खतरा अधिक?
जानिए, पाइल्स की बीमारी क्यों हो जाती है? (Canva)
Piles Symptoms And Prevention: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल कई बीमारियों को जन्म दे रही है. कई बीमारियां तो ऐसी हैं, जिन्हें लोग बताने में भी शर्माते हैं. बवासीर (Piles) ऐसी ही बीमारियों में से एक है. जी हां, इस बीमारी को आयुर्वेद में इसे ‘अर्श रोग’ के नाम से जानते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, यह गुदा या मलाशय की नसों में सूजन से होती है. ज्यादातर लोग शर्म के कारण इसे छुपाते हैं, जिससे समस्या बढ़ जाती है. यही नहीं, कभी-कभी सर्जरी तक की नौबत आ जाती है. कुल मिलाकर पाइल्स के मरीजों को बेहद दर्द और कष्ट से गुजरना पड़ता है. हालांकि, शुरुआती लक्षणों को पहचानकर और सावधानी बरती जाए तो इससे आसानी से बचा जा सकता है. अब सवाल है कि आखिर पाइल्स क्यों होती है? किन लोगों में बावासीर का खतरा अधिक? बवासीर के लक्षण के क्या हैं? पाइल्स से बचाव कैसे करें? आइए जानते हैं इस बारे में-
बता दें कि, बवासीर या पाइल्स (piles) एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज के एनस के अंदर और बाहरी हिस्से में सूजन आ जाती है. इसके अलावा इसमें से कई बार खून निकलने के साथ ही दर्द भी होता है. बवासीर के साथ होने वाला दर्द, रक्तस्राव और तेज खुजली बेहद परेशान करती है. बवासीर की परेशानी की वजह से स्टूल पास करने के बाद भी पेट साफ नहीं रहता.
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, बवासीर (Piles) मुख्य रूप से गुदा और मलाशय की नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण होता है. यह दबाव पुरानी कब्ज, दस्त, लंबे समय तक बैठक कर काम करना, शौचालय में लंबे समय तक बैठने, गर्भावस्था, भारी वजन उठाने या कम फाइबर वाले भोजन के कारण आता है. इस दबाव से गुदा की नसें सूज जाती हैं और फूल जाती हैं. वहीं, आयुर्वेद के अनुसार, यह दोषों के असंतुलन, मंदाग्नि और वायु के विकार की वजह से होता है.
बवासीर से बचाव बेहद जरूरी है. ऐसे में पाइल्स के शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें, जैसे शौच में हल्की जलन, खून की बूंदें, गुदा क्षेत्र में भारीपन, खुजली या असहजता. इन संकेतों पर समय रहते ध्यान दें तो समस्या आसानी से नियंत्रित हो सकती है. देरी से दर्द, खून, और जटिलताएं बढ़ती हैं.
आयुर्वेदाचार्य जितेंद्र शर्मा का कहना है कि बवासीर कोई शर्म की बीमारी नहीं है, बल्कि जीवनशैली से जुड़ी समस्या है. ऐसे में जागरूकता इसका पहला इलाज है. पाइल्स के लिए सावधानी बरतकर सही और संतुलित आहार अपनाकर इसे रोका जा सकता है.
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