कोसंबा (गुजरात) [भारत], 29 जुलाई: दत्ताश्रय आश्रम में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य रूप से मनाया गया। प्रातःकाल से…
कोसंबा (गुजरात) [भारत], 29 जुलाई: दत्ताश्रय आश्रम में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य रूप से मनाया गया। प्रातःकाल से ही आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना और भजन-कीर्तन से संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा। गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सम्मिलित होकर गुरुचरणों में नमन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।
दत्ताश्रय आश्रम के संस्थापक आचार्य श्री भाविनभाई पंड्या एवं आचार्य श्री मननभाई पंड्या ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में कहा कि गुरु ही जीवन को सही दिशा, संस्कार और आत्मिक उन्नति प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सनातन धर्म की रक्षा और उसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
आचार्यश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि वेद हमारे सनातन धर्म की आत्मा हैं। प्रत्येक परिवार और विशेष रूप से युवाओं को वेदों का अध्ययन, भारतीय संस्कृति का पालन तथा आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाना चाहिए। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और धर्म के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
उन्होंने उपस्थित भक्तों से आग्रह किया कि जीवन के अमूल्य समय का सदुपयोग करें। समय को व्यर्थ कार्यों, नकारात्मक विचारों और निरर्थक गतिविधियों में न गंवाएँ, बल्कि सेवा, साधना, स्वाध्याय, सत्संग और समाजहित के कार्यों में लगाएँ। सकारात्मक सोच, अनुशासित जीवन और गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन सफल बन सकता है।
पर्यावरण संरक्षण को भी आध्यात्मिक दायित्व बताते हुए दोनों आचार्यश्री ने प्रत्येक श्रद्धालु से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की सेवा भी ईश्वर सेवा का ही स्वरूप है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित एवं स्वच्छ वातावरण छोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर भव्य गुरु पूजन, पादुका पूजन, विशेष मंत्र दीक्षा, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन, महाआरती तथा महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ इन सभी धार्मिक आयोजनों में भाग लेकर गुरु कृपा का लाभ प्राप्त किया।
सम्पूर्ण आयोजन दिव्य, अनुशासित एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में प्रणाम कर अपने जीवन में धर्म, सेवा, संस्कार, सदाचार और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
जय जय दत्ताश्रय!
जय गुरुदेव दत्त!
नर्मदे हर!
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