अजित पवार के निधन के तुरंत बाद सुनेत्रा पवार का बड़ा कदम! बिना बताए बारामती से मुंबई रवानगी और शरद पवार की नाराजगी; क्या फिर टूटेगा पवार परिवार? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी.
अजित पवार के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद सुनेत्रा पवार के विधायक दल का नेता बनने और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की खबरों ने पवार परिवार में भारी नाराजगी पैदा कर दी है. सूत्रों के अनुसार, परिवार का मानना है कि इस कदम के लिए कुछ दिन इंतजार करना चाहिए था. विशेष रूप से नाराजगी इस बात पर है कि सुनेत्रा पवार और उनके बेटे दोपहर अस्थि विसर्जन तक परिवार के साथ थे, लेकिन शुक्रवार रात वे शरद पवार को बिना बताए ही बारामती से मुंबई के लिए निकल गए.
सुनेत्रा पवार का महाराष्ट्र के डिप्टी CM के तौर पर आज शनिवार शाम को मुंबई में शपथ लेने की चर्चा तेज है और अजित पवार के चाचा शरद पवार का कहना है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है. शरद पवार ने कहा सुनेत्रा पवार के आज महाराष्ट्र के डिप्टी CM के तौर पर शपथ लेने के बारे में कोई जानकारी नहीं, उनकी पार्टी ने ही यह तय किया होगा.
महाराष्ट्र NCP प्रमुख सुनील तटकरे ने आज दोपहर 2 बजे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात के बाद पत्रकारों को बताया कि नए नेता को चुनने के लिए शनिवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है. सुनेत्रा पवार के नई ज़िम्मेदारी स्वीकार करने पर सहमति जताने के बाद, NCP ने 31 जनवरी को विधानसभा की बैठक बुलाने का फैसला किया है. वह अभी राज्यसभा सदस्य हैं.
जुलाई 2023 में, अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के खिलाफ बगावत कर दी. इसके बाद वह महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए. उस समय, अजित पवार ने दावा किया था कि NCP के ज़्यादातर विधायक उनके साथ हैं.
अजित पवार के इस कदम से शरद पवार को बड़ा झटका लगा. शरद पवार ने खुले तौर पर कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अजित उनके साथ ऐसा करेंगे. उन्होंने कहा कि अजित ने उन्हें धोखा दिया है.
उस समय, NCP के पास 53 विधायक थे. बगावत के बाद, अजित पवार गुट के पास आखिरकार 40-41 विधायक रह गए. शरद पवार गुट के पास 10-12 विधायक बचे. 2 जुलाई 2023 को, अजित पवार ने एकनाथ शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ आठ अन्य विधायकों को भी मंत्री बनाया गया.
अब, अजित के जाने के बाद, उनके विधायकों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. उनके बिना, पार्टी में कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है. सुनेत्रा पवार (उनकी पत्नी), प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे नेता हैं, लेकिन उनके बीच अंदरूनी कलह है और मज़बूत एकता की कमी है.
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