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Home > देश > अटारी-वाघा बॉर्डर बंद, फिर भी शादी करने पाकिस्तान से भारत आईं 150 दुल्हनें, जानिए कैसे

अटारी-वाघा बॉर्डर बंद, फिर भी शादी करने पाकिस्तान से भारत आईं 150 दुल्हनें, जानिए कैसे

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान बॉर्डर बंद होने से ये उम्मीद लगाई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच होने वाली अब शादियों में कमी आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बता दें कि 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ़्लाइट लेकर भारत आईं.

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Last Updated: August 23, 2026 16:24:00 IST

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अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से जुड़ने वाले बॉर्डर बंद कर दिया था. दोनों देशों को जोड़ने वाला वाघा अटारी बॉर्डर भी बंद कर दिया गया था. तनाव के माहौल में एक-दूसरे देश में शादी की उम्मीदें कम हो गई थीं. 

लेकिन करीब डेढ़ साल बाद फिर से उम्मीदें जगी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे भारतीय शहरों में पहुंचीं और शादी की रस्में निभाईं.

यात्रा में मिली छूट 

गृह मंत्रालय ने सिंध के एक सम्मानित धार्मिक स्थल के साथ मिलकर इन यात्राओं के लिए विशेष छूट दी. पाकिस्तानी रिश्तेदारों को दुल्हन के साथ आने की इजाजत तो थी, लेकिन उन्हें तय समय के अंदर वापस लौटना था, इसलिए शादियां सादगी से हुईं. TOI को पाकिस्तानी दुल्हनों के वीजा परमिट और दस्तावेज भी मिले हैं.

सामान्य समय में, भारत का वीजा रखने वाले पाकिस्तानी वाघा बॉर्डर से आसानी से आ-जा सकते थे, लेकिन अब ज़मीनी बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें हवाई रास्ते से घूमकर आना पड़ा. इस साल अप्रैल से जून के बीच, दुल्हनें लगभग 450 रिश्तेदारों के साथ भारत आईं.

ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हो गई थी सगाई

इन शादीशुदा जोड़ों में कई लोगों की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हो गई थी. लेकिन आतंकी हमले के बाद जब बॉर्डर बंद हुआ तो शादी के लिए इन जोड़ों को इंतज़ार करना पड़ा और भारत आने के लिए दूसरा रास्ता इख्तियार करना पड़ा.

श्राइन ने उठाया पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों का मुद्दा

श्राइन (दरबार) की ओर से TOI के साथ शेयर किए गए एक नोट में बताया गया है कि सिंध के घोटकी शहर में स्थित मशहूर शदानी दरबार ने पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों का मुद्दा उठाने में अहम भूमिका निभाई. दरबार के पीठाधीश, संत युधिष्ठिरलाल शदानी (जो उत्तराधिकारियों की कतार में नौवें स्थान पर हैं), अब रायपुर में रहते हैं. 18वीं सदी के संत; संत शदाराम साहिब के सम्मान में बनाए गए शदानी दरबार का बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले समुदाय के लिए बहुत महत्व है. समुदाय के नेता राजेश झांबिया का कहना है कि यह सिंध से आया पहला जत्था है और भारत सरकार को इंतज़ार कर रही दूसरी दुल्हनों के लिए भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए. भारत में शादी करने के लिए अभी भी 300 लड़कियां इंतजार कर रही हैं.

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अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से जुड़ने वाले बॉर्डर बंद कर दिया था. दोनों देशों को जोड़ने वाला वाघा अटारी बॉर्डर भी बंद कर दिया गया था. तनाव के माहौल में एक-दूसरे देश में शादी की उम्मीदें कम हो गई थीं. 

लेकिन करीब डेढ़ साल बाद फिर से उम्मीदें जगी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे भारतीय शहरों में पहुंचीं और शादी की रस्में निभाईं.

यात्रा में मिली छूट 

गृह मंत्रालय ने सिंध के एक सम्मानित धार्मिक स्थल के साथ मिलकर इन यात्राओं के लिए विशेष छूट दी. पाकिस्तानी रिश्तेदारों को दुल्हन के साथ आने की इजाजत तो थी, लेकिन उन्हें तय समय के अंदर वापस लौटना था, इसलिए शादियां सादगी से हुईं. TOI को पाकिस्तानी दुल्हनों के वीजा परमिट और दस्तावेज भी मिले हैं.

सामान्य समय में, भारत का वीजा रखने वाले पाकिस्तानी वाघा बॉर्डर से आसानी से आ-जा सकते थे, लेकिन अब ज़मीनी बॉर्डर बंद होने के कारण उन्हें हवाई रास्ते से घूमकर आना पड़ा. इस साल अप्रैल से जून के बीच, दुल्हनें लगभग 450 रिश्तेदारों के साथ भारत आईं.

ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हो गई थी सगाई

इन शादीशुदा जोड़ों में कई लोगों की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हो गई थी. लेकिन आतंकी हमले के बाद जब बॉर्डर बंद हुआ तो शादी के लिए इन जोड़ों को इंतज़ार करना पड़ा और भारत आने के लिए दूसरा रास्ता इख्तियार करना पड़ा.

श्राइन ने उठाया पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों का मुद्दा

श्राइन (दरबार) की ओर से TOI के साथ शेयर किए गए एक नोट में बताया गया है कि सिंध के घोटकी शहर में स्थित मशहूर शदानी दरबार ने पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों का मुद्दा उठाने में अहम भूमिका निभाई. दरबार के पीठाधीश, संत युधिष्ठिरलाल शदानी (जो उत्तराधिकारियों की कतार में नौवें स्थान पर हैं), अब रायपुर में रहते हैं. 18वीं सदी के संत; संत शदाराम साहिब के सम्मान में बनाए गए शदानी दरबार का बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले समुदाय के लिए बहुत महत्व है. समुदाय के नेता राजेश झांबिया का कहना है कि यह सिंध से आया पहला जत्था है और भारत सरकार को इंतज़ार कर रही दूसरी दुल्हनों के लिए भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए. भारत में शादी करने के लिए अभी भी 300 लड़कियां इंतजार कर रही हैं.

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