पश्चिम बंगाल चुनाव को जीतने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रही हैं. बीजेपी ने जीतने के लिए साइलेंट रणनीति बनाई है. वे ममता बनर्जी का नाम लिए बिना उनके कामों की आलोचना कर रहे हैं. साथ ही हर बूथ पर बढ़िया मैनेजमेंट किया है.
गृहमंत्री अमित शाह और ममता बनर्जी
West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में चुनावी बयार तेज हो गई है. हर पार्टी अपनी जीत पक्की करने के लिए हर तरह के पैंतरे अपना रही है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में जीत की हर मुमकिन कोशिश कर रही है. भारतीय जनता पार्टी ने पिछले चुनावों से सबक लेकर इस बार पूरी रणनीति ही बदल दी है. इस बार पूरा चुनाव भाजपा ने जमीनी रणनीति बदल कर बूथ प्रबंधन को मजबूत बनाकर सोशल इंजीनियरिंग की बिसात पूरे बंगाल में बिछा कर जबरदस्त सटीक चुनावी प्रबंधन का काम किया है. रणनीति के केंद्र में आज भी ममता बनर्जी ही है, लेकिन ममता बनर्जी का नाम भाजपा पूरे चुनाव में नहीं ले रही है. भाजपा ममता बनर्जी के कुशासन को उजागर करने का काम कर रही है.
भाजपा के एक वरिष्ठ रणनीतिकार नेता ने बताया कि इस बार एक-एक बूथ मजबूत बनाने पर पूरा ध्यान दिया गया है. हर बूथ पर कार्यकर्ताओं की टीम गठित की गई है. पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति कर हर गली के 100 घरों का जिम्मा दिया गया है. भाजपा ने अपने 5 बड़े संगठन मंत्रियों को बंगाल के चुनावी मैदान में एक साल पहले ही उतार दिया था. वहीं भाजपा ने दूसरी बड़ी रणनीतिक बिसात भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग की बिछाई है.
बंगाल में राजवंशी समुदाय की बड़ी संख्या है. राजवंशी समुदाय को 8वीं अनुसूची में शामिल कर राजवंशी भाषा को राजकीय मान्यता प्रदान की है. इसके साथ ही बंगाल के कुरवाई समाज को भी 8वीं अनुसूची में शामिल करने की कोशिश की गई है. झारखंड से लगे हुए इलाकों में महतो समुदाय को साधा गया है, तो संथाल समुदाय में पैठ बनाकर नेतृत्व दिया गया है. दलित वोटों के लिए जगन्नाथ ठाकुर और आदिवासी वोटों के लिए पूर्व विधायक निकी हेंब्रम जैसे नेताओं को आगे किया गया है.
भाजपा ने पश्चिम बंगाल चुनाव में पूरा चुनाव भाजपा नेताओं के चेहरे पर लड़ने की रणनीति बनाई है. एक भी चुनावी मंच पर दिल्ली के केंद्रीय नेताओं को नहीं बैठाया जा रहा है. यहां तक कि भाजपा के संकल्प पत्र जारी करने के मंच पर भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ समिक भट्टाचार्य, शुभेंदु अधिकारी, शांतनु ठाकुर और सुकांतो मजूमदार को मंच पर बैठाया गया था. हर चुनावी पोस्टर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नितिन नवीन के साथ बंगाल भाजपा नेताओं की ही तस्वीरें नजर आती है.
भाजपा ने इस चुनाव में भी हिंदुत्व कार्ड भी खेला है, तो ममता के कुशासन को निशाना बनाकर ममता की सबसे बड़ी ताकत बंगाल के हर गांव मोहल्ले के क्लब में भी सेंध लगा दी है. तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की असली ताकत बंगाल के क्लब हैं, जो पहले कभी सीपीएम की ताकत हुआ करते थे. देश भर के 100 से ज्यादा भाजपा के सांसद और वरिष्ठ नेता बंगाल में अलग-अलग सीटों का जिम्मा सम्हाले हुए है. हालांकि भाजपा इस बार कोई शोर-शराबा नहीं कर रही है. चुनावी मैनेजमेंट सारा काम साइलेंट तरीके से संभाल रही है.
ममता बनर्जी कभी मछली और अंडे का मुद्दा उठाती हैं, तो कभी दिल्ली के जमींदारों का बाहरी नेताओं का लेकिन इस बार ममता बनर्जी के तीर निशाने पर नहीं लग पा रहे हैं. इसके विपरीत भाजपा ने महिलाओं और युवाओं को 3 हजार रुपए महीने देने का एलान कर दिया है. साथ ही हर वर्ग के लिए बड़ी घोषणाएं कर चुनाव प्रचार में बढ़त बना ली है.
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