Bombay High Courts Verdict: मानहानि केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक 90 वर्षीय महिला को सुनवाई के लिए वर्ष 2046 की तारीख दी है.
Bombay High Court Verdict: 90 वर्षीय महिला की याचिका पर 2046 में होगी सुनवाई
Bombay High Courts Verdict: ‘तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख मिलती रही है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला माई लॉर्ड, मिली है तो सिर्फ ये तारीख’ ये डायलॉग फिल्म ‘दामिनी’ का है, जिसमें एक्टर सनी देओल ने यह डायलॉग बोला था. यह सिर्फ डायलॉग नहीं बल्कि हकीकत है. हालांकि ताजा मामला मुंबई (महाराष्ट्र) से जुड़ा है और दूसरी तरह का है. यहां पर 90 वर्षीय महिला का मानहानि केस बॉम्बे हाई कोर्ट ने 20 साल के लिए टाल दिया. अब अगली सुनवाई वर्ष 2046 में होगी. वर्ष 2017 में यह मुकदमा दायर करते हुए तारिणीबेन ने ध्वनि देसाई के खिलाफ 20 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग के साथ दायर किया है.
उधर, इस मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे अहंकार की लड़ाई करार दिया. कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों की लड़ाई ने न्याय प्रक्रिया को बाधित किया है. बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जितेंद्र एस. जैन की एकल पीठ ने मंगलवार (28 अप्रैल, 2026) को आदेश दिया कि इस मामले को अगले 20 सालों तक सुनवाई के लिए नहीं लिया जाए. इसके साथ ही 2046 के बाद सुनाई के लिए इस केस को सूचीबद्ध कर दिया. उधर, कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ सुपर सीनियर सिटीजन का तर्क देते हुए इस मामले को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए.
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानहानि का यह केस 90 वर्षीय तारिणीबेन और 57 वर्षीय ध्वनि देसाई ने साल 2017 में किल्किलराज भंसाली और अन्य के खिलाफ दायर किया था. इसे समझने के लिए दो साल पहले यानी वर्ष 2015 में जाना होगा, जब ‘श्याम को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी’ की वार्षिक आम बैठक AGM हुई थी. इस दौरान हुई कथित घटनाओं के चलते मुकदमेबाजी की नौबत आ गई. याचिकाकर्ता का कहना है कि AGM में उनका मानसिक उत्पीड़न और कष्ट हुआ. ऐसे में उन्हें ब्याज सहित 20 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है.
बताया जा रहा है कि कोर्ट पहले भी बिना शर्त माफी के साथ केस को रफा-दफा करने का सुझाव दिया, लेकिन 90 वर्षीय वादी अभी भी मानहानि के मुकदमे को आगे बढ़ाने पर अड़ी हुई हैं. ऐसे में कोर्ट ने यह सख्त फैसला लिया है. यह भी जानकारी सामने आई है कि 27 मार्च, 2025 को एक अन्य पीठ ने चेतावनी दी थी कि अगर याचिकाकर्ता के वकील अगली तारीख पर पेश नहीं हुए तो मामले को खारिज कर दिया जाएगा. इस चेतावनी पर भी कोई गौर नहीं किया गया.
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