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क्या पति पर बलात्कार का आरोप लगाया जा सकता है? SC ने शुरु की ‘यौन दासता’ मामले की सुनवाई, जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक बलात्कार अपवाद को लेकर व्यापक संवैधानिक चुनौती की जांच करने से पहले कर्नाटक में वैवाहिक बलात्कार के एक मामले की सुनवाई करेगा, जिसमें एक पति पर अपनी पत्नी को "यौन दास" के रूप में मानने का आरोप है.

बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने वैवाहिक बलात्कार पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार किया: क्या वैवाहिक बलात्कार अपवाद के बावजूद पति पर बलात्कार का मुकदमा चलाया जा सकता है? भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना भी शामिल थे, ने कहा कि वह पहले कर्नाटक के एक मामले की सुनवाई करेगी जिसमें एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी को “यौन दास” के रूप में रखने का आरोप है.

अदालत इस बात की जांच करेगी कि क्या मौजूदा बलात्कार कानून की व्याख्या इस तरह की जा सकती है जिससे ऐसे मामलों में अभियोजन की अनुमति मिल सके. वैवाहिक बलात्कार अपवाद को लेकर व्यापक संवैधानिक चुनौती पर सुनवाई से पहले इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की अंतिम सुनवाई तीन सप्ताह बाद बुधवार और गुरुवार को होगी.

कर्नाटक मामले ने खड़ा किया गंभीर सवाल

पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बलात्कार कानून के तहत अभियोजन की अनुमति देकर सही किया है. जयसिंह ने कहा कि मामले के तथ्य गंभीर हैं, जिसमें महिला के साथ कथित तौर पर एक तरह से “यौन दासी” जैसा व्यवहार किया गया था.

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि वह उच्च न्यायालय के फैसले का बचाव करना चाहती हैं. हालांकि, उनका तर्क यह नहीं था कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद को तुरंत रद्द कर दिया जाए. इसके बजाय, उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा कानून की व्याख्या इस तरह से की जा सकती है जिससे ऐसे आचरण के लिए मुकदमा चलाया जा सके. इससे न्यायाधीश के समक्ष एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठा कि क्या स्पष्ट अपवाद वाले प्रावधान की व्याख्या अभी भी संकीर्ण रूप से की जा सकती है ताकि अत्यधिक यौन हिंसा से जुड़े मामलों में अभियोजन की अनुमति दी जा सके.

न्यायालय के समक्ष दो प्रमुख प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट अब दो संबंधित मुद्दों पर विचार कर रहा है. पहला, क्या वैवाहिक बलात्कार अपवाद की व्याख्या इतनी संकीर्ण रूप से की जा सकती है कि पति द्वारा किए गए कुछ कृत्यों पर अभी भी आपराधिक मुकदमा चलाया जा सके?

दूसरा, क्या वैवाहिक बलात्कार अपवाद स्वयं संविधान का उल्लंघन करता है और इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए? पीठ ने कहा कि दोनों सवालों पर विचार किया जाएगा. हालांकि, वह पहले कर्नाटक की अपील और मौजूदा कानून की व्याख्या पर ध्यान केंद्रित करेगी.

‘विवाह से व्यक्तिगत स्वायत्तता समाप्त नहीं होती’

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने विवाहित महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा को लेकर चिंताओं को स्वीकार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि “विवाह से किसी व्यक्ति की स्वायत्तता समाप्त होने का कोई सवाल ही नहीं उठता.” साथ ही, न्यायाधीश ने कहा कि अदालत आपराधिक कानून से संबंधित मामले पर विचार कर रही है. इसलिए, उसे पहले यह निर्धारित करना होगा कि अपवाद अनुचित है या स्पष्ट रूप से मनमाना है. न्यायमूर्ति बागची ने यह भी कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद जरूरी नहीं कि पति को यौन हिंसा के हर आपराधिक परिणाम से बचाए.

उदाहरण के लिए, जहां यौन हिंसा के परिणामस्वरूप गंभीर चोट या मृत्यु होती है, वहां अन्य आपराधिक प्रावधान लागू हो सकते हैं. पीठ ने ऐतिहासिक फूलमोनी मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें एक युवती गंभीर यौन उत्पीड़न का शिकार हुई और चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई.

निर्भया कांड के बाद आया बदलाव

वकीलों ने निर्भया कांड के बाद भारत के यौन अपराध कानूनों में किए गए बदलावों पर भी प्रकाश डाला. बलात्कार की कानूनी परिभाषा को लिंग प्रवेश से आगे बढ़ाकर व्यापक बनाया गया. साथ ही, वैवाहिक अपवाद के शब्दों को “यौन संबंध” से बदलकर “यौन संबंध या यौन क्रियाएं” कर दिया गया. नंदी ने तर्क दिया कि यह अपवाद विवाह के भीतर यौन हिंसा के अन्य रूपों से जुड़े मामलों में कानूनी उपायों को प्रभावित कर सकता है. उन्होंने भारतीय न्याय संहिता का भी हवाला दिया, जिसने आईपीसी की जगह ली और धारा 377 को हटा दिया.

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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