कैबिनेट ने 24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं, PMGSY-3 को 2028 तक बढ़ाने और 12,980 करोड़ के भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल को मंजूरी दी, जिससे कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के रेल ढांचे को मजबूत करने के लिए दो बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. इनमें उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से जुड़े रेल कॉरिडोर शामिल हैं, जिनका उद्देश्य यातायात क्षमता बढ़ाना और रेल संचालन को ज्यादा सुगम बनाना है.
पहली परियोजना उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने से संबंधित है. इस 403 किलोमीटर लंबे मार्ग पर लगभग 14,926 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि इस परियोजना को चार सालों के भीतर पूरा किया जाए. इसके पूरा होने पर इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही और ज्यादा तेज और निर्बाध हो सकेगी.
दूसरी परियोजना आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम से राजमुंदरी तक तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण की है. दोनों परियोजनाओं को मिलाकर कुल 24,815 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इससे देश के रेलवे नेटवर्क में लगभग 601 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी.
कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों के सड़क विकास से जुड़ी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-3) को भी आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. अब ये योजना मार्च 2028 तक जारी रहेगी. इसके लिए सरकार ने संशोधित बजट के रूप में 83,977 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
इस बजट में केंद्र सरकार का योगदान 54,848 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 29,129 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है. फंडिंग पैटर्न में भी क्षेत्रीय आधार पर अंतर रखा गया है- गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए 60:40 और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात तय किया गया है. इस विस्तार का उद्देश्य ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण कार्य को पूरा करना है, ताकि दूरदराज के इलाकों में भी बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके.
ग्लोबल लेवल पर विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके कारण व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहे असर को देखते हुए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. कैबिनेट ने 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी के साथ ‘भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल’ स्थापित करने को मंजूरी दी है.
इस व्यवस्था के तहत भारतीय जहाजों के साथ-साथ उन सभी विदेशी जहाजों को भी बीमा सुविधा मिलेगी जो भारत के बंदरगाहों के लिए माल ढुलाई का कार्य करते हैं. इसका मेन उद्देश्य समुद्री परिवहन को सस्ता, सुरक्षित और अधिक स्थिर बनाना है. इस फैसले से आयात-निर्यात से जुड़े कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है और वैश्विक संकट के बीच भारतीय व्यापार को अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्राप्त होगा.
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