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Home > क्राइम > नवजात मासूमों का करते थे सौदा, 8,000 में खरीदकर 8 लाख में बेच देते थे, अंतर्राज्यीय गिरोह का हुआ पर्दाफाश

नवजात मासूमों का करते थे सौदा, 8,000 में खरीदकर 8 लाख में बेच देते थे, अंतर्राज्यीय गिरोह का हुआ पर्दाफाश

Interstate Child Trafficking: हाल ही में एक ऐसा गिरोह सामने आया है, जो नवजात शिशुओं का सौदा करता है. एक अंडरकवर ऑपरेशन में इस अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दा फाश हुआ है.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 15, 2026 16:05:15 IST

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Interstate Child Trafficking: हाल ही में एक ऐसा गिरोह सामने आया है, जो नवजात शिशुओं का सौदा करता है. एक अंडरकवर ऑपरेशन में इस अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दा फाश हुआ है. बता दें कि दैनिक भास्कर द्वारा यह ऑपरेशन चलाया गया था.

इन मासूमों को 20,000 रु. में खरीदा गया और 8 लाख रुपये की ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा था. इस अमानवीय खेल में दलालों से लेकर अस्पतालों तक की मिलीभगत सामने आई है.

क्या है पूरा मामला 

इस अंडरकवर ऑपरेशन में पता चला कि इन मासूम बच्चों की पैदा होते ही बोली लग जाती है. इन नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त में एक पूरा नेटवर्क शामिल है, जिसमें कई हॉस्पिटल, डॉक्टर और कई व्यक्ति शामिल हैं. इन बच्चों को लगभग 20,000 रु. में खरीदा जाता था और लाखों की ऊंची कीमतों पर बेचा जाता था. रिपोर्टर, विजय पाल डूडी ने खुद ‘नकली खरीदार’ बनकर इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया. व्हाट्सएप पर बच्चों की नुमाइश से लेकर लाइव डीलिंग तक, हर सच कैमरे में कैद हुआ. मामले के खुलासे के बाद गिरोह में हड़कंप मच गया, विधानसभा तक मामला पहुंचा और जांच शुरू हुई.

भारत में चाइल्ड ट्रैफिकिंग 

हक, सेंटर फॉर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के अनुसार भारत दक्षिण एशिया में चाइल्ड ट्रैफिकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बाल तस्करी के मामले में भारत पारगमन और गंतव्य दोनों की भूमिका बनाता है. ह्यूमन राइट्स फर्स्ट के अनुसार, “भारत में COVID-19 महामारी के बाद से बच्चों की तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. अकेले नई दिल्ली में ही वैश्विक लॉकडाउन के बाद से तस्करी के मामलों में 68% की वृद्धि देखी गई है. इनमें से कई मामले सिर्फ़ अपहरण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों का इस्तेमाल मज़दूरी के लिए भी किया जाता है.”

UNICEF के अनुसार, “बाल मज़दूरी से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, बच्चों के लिए शोषण वाला माहौल बनता है, बच्चों को सही शिक्षा मिलने में रुकावट आती है, और यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली गरीबी के दुष्चक्र को और बढ़ावा देता है.”

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Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 15, 2026 16:05:15 IST

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Interstate Child Trafficking: हाल ही में एक ऐसा गिरोह सामने आया है, जो नवजात शिशुओं का सौदा करता है. एक अंडरकवर ऑपरेशन में इस अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दा फाश हुआ है. बता दें कि दैनिक भास्कर द्वारा यह ऑपरेशन चलाया गया था.

इन मासूमों को 20,000 रु. में खरीदा गया और 8 लाख रुपये की ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा था. इस अमानवीय खेल में दलालों से लेकर अस्पतालों तक की मिलीभगत सामने आई है.

क्या है पूरा मामला 

इस अंडरकवर ऑपरेशन में पता चला कि इन मासूम बच्चों की पैदा होते ही बोली लग जाती है. इन नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त में एक पूरा नेटवर्क शामिल है, जिसमें कई हॉस्पिटल, डॉक्टर और कई व्यक्ति शामिल हैं. इन बच्चों को लगभग 20,000 रु. में खरीदा जाता था और लाखों की ऊंची कीमतों पर बेचा जाता था. रिपोर्टर, विजय पाल डूडी ने खुद ‘नकली खरीदार’ बनकर इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया. व्हाट्सएप पर बच्चों की नुमाइश से लेकर लाइव डीलिंग तक, हर सच कैमरे में कैद हुआ. मामले के खुलासे के बाद गिरोह में हड़कंप मच गया, विधानसभा तक मामला पहुंचा और जांच शुरू हुई.

भारत में चाइल्ड ट्रैफिकिंग 

हक, सेंटर फॉर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के अनुसार भारत दक्षिण एशिया में चाइल्ड ट्रैफिकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बाल तस्करी के मामले में भारत पारगमन और गंतव्य दोनों की भूमिका बनाता है. ह्यूमन राइट्स फर्स्ट के अनुसार, “भारत में COVID-19 महामारी के बाद से बच्चों की तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. अकेले नई दिल्ली में ही वैश्विक लॉकडाउन के बाद से तस्करी के मामलों में 68% की वृद्धि देखी गई है. इनमें से कई मामले सिर्फ़ अपहरण तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों का इस्तेमाल मज़दूरी के लिए भी किया जाता है.”

UNICEF के अनुसार, “बाल मज़दूरी से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, बच्चों के लिए शोषण वाला माहौल बनता है, बच्चों को सही शिक्षा मिलने में रुकावट आती है, और यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली गरीबी के दुष्चक्र को और बढ़ावा देता है.”

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