Dalai Lama Grammy Award: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने 90 वर्ष की उम्र में 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में अपना पहला ग्रैमी जीतकर विश्व स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं. यह सम्मान उन्होंने अपने एल्बम के लिए बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग के लिए यह अवॉर्ड जीता है. जानिए आखिर, ग्रैमी अवॉर्ड क्या है? जो दलाई लामा ने जीता है.
दलाई लामा ने 90 वर्ष की उम्र में जीता अपना पहला ग्रैमी.
Dalai Lama Grammy Award: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने 90 वर्ष की उम्र में 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में अपना पहला ग्रैमी जीतकर विश्व स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं. यह सम्मान उन्हें रविवार, 1 फरवरी 2026 को लॉस एंजिल्स में आयोजित समारोह के दौरान मिला. दलाई लामा ने अपने एल्बम के लिए बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग के लिए यह अवॉर्ड जीता है. उनके इस एल्बम का नाम ‘मेडिटेशन: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ है. यह अवॉर्ड ग्रैमी के प्री-सेरेमनी (प्री-टेलीकास्ट) में घोषित हुआ, जिसे यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीम किया गया. Rufus Wainwright ने उनकी ओर से यह अवॉर्ड स्वीकार किया. अब सवाल है कि आखिर, दलाई लामा कौन हैं? ग्रैमी अवॉर्ड क्या है? कैसी है दलाई लामा की लाइफस्टाइल? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के बारे में-
बता दें कि, ग्रैमी संगीत की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जो ‘रिकॉर्डिंग अकैडमी’ की ओर से हर साल कलाकारों और तकनीकी पेशेवरों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है. यह पहली बार है जब किसी विश्व-विख्यात आध्यात्मिक गुरु को ग्रैमी की इस श्रेणी में सम्मानित किया गया है, जो ध्यान, करुणा और आंतरिक शांति के उनके संदेशों को एक नई वैश्विक पहचान देता है. अब वह के-पॉप और स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ पहली बार अवॉर्ड जीतने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए.
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं. उनका जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के एक छोटे से गांव में हुआ था. महज दो साल की उम्र में उन्हें दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में पहचाना गया. तभी से उनका जीवन आध्यात्मिक साधना, करुणा और मानवता के संदेश को समर्पित हो गया.
बता दें कि, तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा सिर्फ एक धार्मिक गुरु ही नहीं हैं, बल्कि शांति, अहिंसा, करुणा और आपसी सद्भाव के वैश्विक प्रतीक भी हैं. उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें प्रेम, करुणा, धैर्य और नैतिक अनुशासन का प्रतीक बता चुके हैं. बता दें कि, दलाई लामा ने पूरी दुनिया में घूमकर मानव मूल्यों, मानसिक शांति, करुणा और आपसी समझ पर व्याख्यान दिए हैं. बता दें कि, साल 1989 में दलाई लामा को तिब्बत के मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
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