Delhi Air Pollution: कोर्ट ने खासतौर पर दिल्ली नगर निगम (MCD) और पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों से कहा कि वे तुरंत बताएं कि इन उपायों को बिना देरी लागू क्यों नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने साफ कहा कि उसे आपत्तियां नहीं, बल्कि तुरंत अमल चाहिए.
Delhi Air Pollution
Delhi Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने आज वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा सुझाए गए सभी संबंधित हितधारकों को निर्देश दिया कि वे वायु प्रदूषण से जुड़े दीर्घकालिक उपायों को लागू करने के लिए अपना एक्शन प्लान दाखिल करें. कोर्ट के 6 जनवरी 2026 के आदेश के अनुसार, CAQM ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में लंबे समय तक लागू किए जाने वाले उपाय बताए गए हैं.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि CAQM ने एक व्यापक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें दीर्घकालिक उपायों की सूची दी गई है. आयोग ने यह भी बताया है कि इन उपायों को लागू करने की जिम्मेदारी किन एजेंसियों की है. कोर्ट ने कहा कि संभव है भविष्य में कुछ और उपाय भी अपनाने पड़ें, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुझाए गए दीर्घकालिक उपायों को लागू करना जरूरी है. इसलिए सभी संबंधित एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर अपना एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
CAQM की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अदालत के मित्र (एमिकस क्यूरी) के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह पेश हुईं.कोर्ट ने आगे कहा कि CAQM ने लगातार खराब बनी वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में प्रवेश को कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं. इस पर कोर्ट ने खासतौर पर दिल्ली नगर निगम (MCD) और पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों से कहा कि वे तुरंत बताएं कि इन उपायों को बिना देरी लागू क्यों नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने साफ कहा कि उसे आपत्तियां नहीं, बल्कि तुरंत अमल चाहिए.
ASG ऐश्वर्या भाटी ने विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किया गया पूरा रोडमैप कोर्ट के सामने रखा. सुनवाई के दौरान ध्यान अब GRAP के तहत लगने वाली अस्थायी और मौसमी पाबंदियों से हटकर दिल्ली-NCR के ढांचे में स्थायी सुधार पर केंद्रित हो गया.ASG भाटी ने बताया कि सरकार ने जरूरी एजेंसियों की पहचान कर ली है और इन बदलावों के लिए फंड की व्यवस्था भी की जाएगी.
उन्होंने कहा कि पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को तेजी से हटाया जाएगा.PUC सिस्टम को मजबूत किया जाएगा ताकि वह सिर्फ औपचारिकता न रह जाए.इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति में बदलाव कर ज्यादा आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा.पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को स्क्रैप कर जीरो-एमिशन वाहनों को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा.अब इस मामले की अगली सुनवाई होगी.
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने CAQM को निर्देश दिया था कि वह अस्थायी उपायों से आगे बढ़े और दिल्ली-NCR में खराब होती हवा को लेकर विशेषज्ञों की राय पर आधारित ठोस समझ विकसित करे. कोर्ट ने यह भी कहा था कि CAQM लंबी तारीखें न ले और AQI के बिगड़ने के कारणों की पहचान करे.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बंद करने के आदेश में दखल देने से इनकार किया था. 12 अगस्त 2025 के अपने आदेश में बदलाव करते हुए BS-IV और उससे ऊपर के वाहनों के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था. 3 दिसंबर 2025 को दिल्ली-NCR की खराब हवा पर एक याचिका सुनने पर सहमति जताई थी और कहा था कि इस मुद्दे पर नियमित निगरानी जरूरी है.
19 नवंबर को CAQM से कहा था कि जहरीली हवा के कारण नवंबर-दिसंबर में होने वाले खुले मैदान के स्कूल खेल आयोजनों को सुरक्षित महीनों में कराने पर विचार किया जाए.कोर्ट ने GRAP को पूरे साल लागू करने से इनकार करते हुए कहा था कि दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधान ही जरूरी हैं.इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण पर दायर एक नई जनहित याचिका (PIL) सुनने से इनकार किया था, लेकिन याचिकाकर्ता को पहले से लंबित मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी.
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