Delhi Dehradun Expressway delay: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन तो हो गया है लेकिन अभी भी लोगों को इससे परेशानी हो सकती है क्योंकि हाइवे पर बना हुआ एक 2 मंजिला घर रुकावट बन रहा है. इस घर की वजह से काफी दिकक्त हो रही है और सड़क पर जाम लग रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर वो घर किसका है और क्यों वो घर अब तक नहीं हटाया गया?
Delhi Dehradun Expressway delay: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया और लोग इससे काफी खुश थे कि अब सफर कम समय में पूरा हो जाएगा, लेकिन इसके पूरी तरह से चालू होने में एक छोटा-सा दो मंजिला घर अब भी बड़ी रुकावट बना हुआ है. जी हां आपने सही सुना एक घर की वजह से अभी काम पूरा नहीं हुआ है. गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के मण्डोला गांव में स्थित घर ‘स्वाभिमान’ नाम से जाना जाता है और ये ठीक उस जगह बना है जहां से एक्सप्रेसवे का एग्जिट रैंप निकलना था. इस वजह से गाड़ियां सेफ तरीके से बाहर नहीं निकल पा रही हैं और काफी दिक्कत भी हुई है.
ये घर करीब 1,600 वर्गमीटर जमीन पर बना है और ये पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ा चैलेंज बन गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने फिलहाल इस घर के चारों ओर क्रैश बैरियर लगा दिए हैं और एक पतली सी सर्विस रोड बनाकर काम चलाया जा रहा है. लेकिन इससे ट्रैफिक जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लगभग 213 किलोमीटर लंबा है और इसे 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत में बनाया गया है. इससे दिल्ली से देहरादून का सफर, जो पहले 6 घंटे से ज्यादा लेता था, अब करीब 2.5 घंटे में पूरा हो सकेगा.
ये दो मंजिला मकान सरोहा परिवार का है. साल 1998 में जब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने मण्डोला विहार योजना के लिए जमीन अधिग्रहित की थी. तब ज्यादातर किसानों ने लगभग 1,100 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मुआवजा स्वीकार कर लिया था, लेकिन वीरेसन सरोहा ने इसे मानने से इनकार कर दिया था. उन्होंने वो मुआजा नहीं लिया था.
उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस फैसले को रखा और अपने 1,600 वर्गमीटर प्लॉट पर जीत यानी रोक हासिल की. बाद में जब ये जमीन एक्सप्रेसवे के लिए NHAI को ट्रांसफर की गई, तब भी ये स्टे बरकरार रहा. आज वीरेसन सरोहा जीवित नहीं हैं, लेकिन उनका पोता लक्ष्यवीर सरोहा और भतीजी पूजा नेहरा इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं.
सरोहा परिवार एक्सप्रेसवे के खिलाफ नहीं है. उनकी मांग है कि उन्हें 1998 के पुराने रेट के बजाय 2026 के वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाए. पूजा नेहरा का कहना है कि- हम चाहते हैं कि हमारी जमीन की कीमत आज के हिसाब से तय हो, न कि 20 साल पुराने रेट पर.
2024 में लक्ष्यवीर सरोहा ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कहा कि आवास विकास परिषद को ये जमीन ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को फिर से इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच को भेज दिया. इस केस की आखिरी सुनवाई 26 मार्च को हुई थी, लेकिन उसके बाद बेंच भंग हो गई और अब नई सुनवाई का इंतजार है.
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने साफ किया है कि मेन एक्सप्रेसवे पर कोई रुकावट नहीं है. समस्या सिर्फ 90 मीटर के एक छोटे हिस्से तक सीमित है, जो रैंप-5 के पास सर्विस रोड पर है. चार में से तीन रैंप (रैंप-2, 3 और 4) पहले ही पूरे हो चुके हैं. ट्रैफिक को बनाए रखने के लिए मण्डोला विहार योजना की अंदरूनी सड़क से एक अस्थायी रास्ता बनाया गया है.
साथ ही उस घर का क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा. उस घर पर एक बोर्ड भी लगा है जिसपर लिखा है कि ये मामला हाई कोर्ट तक गया है और उस घर में कुछ दिन पहले तक एक चौकीदार दिन रात बैठता था.
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