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Delimitation Bill 2026: केंद्र सरकार ने पेश किए महिला आरक्षण समेत 3 अहम बिल

Delimitation Bill 2026:  सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में तीन अहम बिल पेश किए. इनमें महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन विधेयक 2026, दूसरा परिसीमन विधेयक 2026 और तीसरा केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक, 2026 शामिल है.

Written By: JP YADAV
Last Updated: April 16, 2026 11:45:07 IST

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Delimitation Bill 2026:  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को लोकसभा में केंद्र शासित राज्यों की सीट बढ़ाने संबंधित विधेयक पेश किया. इसके अलावा, महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन आयोग विधेयक  केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने पेश किए. परिसीमन 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा. इसमें सभी राज्यों में सीटें 50 प्रतिशत बढ़ेंगी.  इस पर चर्चा शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर दोपहर 3 बजे अपना पक्ष रखेंगे.  

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह भी साफ़ किया जाएगा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे का आधार सिर्फ़ 2011 की जनगणना नहीं होगी. सूत्रों ने बताया कि परिसीमन एक ऐसे फ़ॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा, जिसमें राज्यों की सीटों में आनुपातिक रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है.  कहा जा रहा है कि इससे सभी राज्यों को फ़ायदा होगा, क्योंकि उन्हें 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद मिलने वाली सीटों से भी ज़्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा.

सभी राज्यों में सीटें 50% बढ़ेंगी

मसलन तमिलनाडु की सीटें मौजूदा 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी, जबकि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होता तो यह संख्या 49 होती. लोकसभा में सभी राज्यों की सीटों में आनुपातिक रूप से 50% की बढ़ोतरी के प्रस्ताव वाले फ़ॉर्मूले के तहत केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी. यह संख्या पिछली “पूरी हो चुकी” जनगणना के आधार पर मिलने वाली सीटों से सात ज़्यादा है. 

इसी तरह कर्नाटक में लोकसभा सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी, जो कि अनुमानित संख्या से एक ज़्यादा है. आंध्र प्रदेश, जहां अभी 25 सीटें हैं, वहां 37 सीटें हो जाएंगी. यह भी उसकी अनुमानित संख्या से चार ज़्यादा है. पड़ोसी राज्य ओडिशा का प्रतिनिधित्व 21 से बढ़कर 31 हो जाएगा, जबकि जनगणना पर आधारित प्रक्रिया के तहत यह 28 तक ही सीमित रहता. 

तेलंगाना की सीटें 17 से बढ़कर 25 हो जाएंगी, जबकि अनुमान 24 का था. विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे पर अपना विरोध तेज़ करने के बाद अब यह देखना बाकी है कि क्या यह बयान—जो इन लाभों का विस्तार से ज़िक्र करता है और इस तर्क को खारिज करता है कि इन बिलों से दक्षिण के राज्यों का हिस्सा कम हो जाएगा.

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Delimitation Bill 2026:  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को लोकसभा में केंद्र शासित राज्यों की सीट बढ़ाने संबंधित विधेयक पेश किया. इसके अलावा, महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन आयोग विधेयक  केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने पेश किए. परिसीमन 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा. इसमें सभी राज्यों में सीटें 50 प्रतिशत बढ़ेंगी.  इस पर चर्चा शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर दोपहर 3 बजे अपना पक्ष रखेंगे.  

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह भी साफ़ किया जाएगा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे का आधार सिर्फ़ 2011 की जनगणना नहीं होगी. सूत्रों ने बताया कि परिसीमन एक ऐसे फ़ॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा, जिसमें राज्यों की सीटों में आनुपातिक रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है.  कहा जा रहा है कि इससे सभी राज्यों को फ़ायदा होगा, क्योंकि उन्हें 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद मिलने वाली सीटों से भी ज़्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा.

सभी राज्यों में सीटें 50% बढ़ेंगी

मसलन तमिलनाडु की सीटें मौजूदा 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी, जबकि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होता तो यह संख्या 49 होती. लोकसभा में सभी राज्यों की सीटों में आनुपातिक रूप से 50% की बढ़ोतरी के प्रस्ताव वाले फ़ॉर्मूले के तहत केरल की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी. यह संख्या पिछली “पूरी हो चुकी” जनगणना के आधार पर मिलने वाली सीटों से सात ज़्यादा है. 

इसी तरह कर्नाटक में लोकसभा सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी, जो कि अनुमानित संख्या से एक ज़्यादा है. आंध्र प्रदेश, जहां अभी 25 सीटें हैं, वहां 37 सीटें हो जाएंगी. यह भी उसकी अनुमानित संख्या से चार ज़्यादा है. पड़ोसी राज्य ओडिशा का प्रतिनिधित्व 21 से बढ़कर 31 हो जाएगा, जबकि जनगणना पर आधारित प्रक्रिया के तहत यह 28 तक ही सीमित रहता. 

तेलंगाना की सीटें 17 से बढ़कर 25 हो जाएंगी, जबकि अनुमान 24 का था. विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे पर अपना विरोध तेज़ करने के बाद अब यह देखना बाकी है कि क्या यह बयान—जो इन लाभों का विस्तार से ज़िक्र करता है और इस तर्क को खारिज करता है कि इन बिलों से दक्षिण के राज्यों का हिस्सा कम हो जाएगा.

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