American Bomb: बहरागोड़ा की सुवर्णरेखा नदी में मिला द्वितीय विश्व युद्ध का 500-lb जिंदा बम! 80 साल बाद भी सक्रिय इस अमेरिकी महाविनाशक ने मचाई सनसनी, क्या टल गया बड़ा खतरा?
World War 2 Bomb Found: पूर्वी सिंहभूम ज़िले के बहरागोड़ा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी में मिली लोहे की वस्तु की पहचान अब हो गई है. रांची से आई एक बम निरोधक दस्ते ने शुरुआती जांच के बाद पुष्टि की है कि यह वस्तु वास्तव में एक शक्तिशाली और सक्रिय बम है. गौरतलब है कि यह बम मंगलवार को पानीपाड़ा गांव के पास मिला था, और स्थानीय लोगों का अनुमान था कि यह दूसरे विश्व युद्ध के समय का हो सकता है. जांच कर रहे दस्ते के प्रभारी अधिकारी नंदकिशोर सिंह ने बताया कि यह बम आकार में बहुत बड़ा और अत्यंत घातक है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे सामान्य तरीकों से निष्क्रिय नहीं किया जा सकता. इसे निष्क्रिय करने के लिए उच्च स्तर की तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है एक ऐसी क्षमता जो विशेष रूप से भारतीय सेना के पास ही उपलब्ध है.
खबरों के मुताबिक यह AN-M64 500-lb बम हो सकता है जो अमेरिका में बना एक युद्धक सामग्री है इसका वजन लगभग 227 किलोग्राम है और यह इस समय बेहद खतरनाक स्थिति में है. बम निरोधक दस्ते के प्रभारी अधिकारी नंदकिशोर सिंह ने बताया कि यह बम आकार में बहुत बड़ा और अत्यंत खतरनाक है. इसे सामान्य तरीकों से नष्ट नहीं किया जा सकता; इसे निष्क्रिय करने के लिए उच्च-स्तरीय तकनीक की आवश्यकता होती है, जो केवल सेना के पास उपलब्ध है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उस पूरे इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है जहाँ यह बम मिला था.
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया. रांची से बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, लेकिन उन्होंने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए आर्मी की मदद लेने की बात कही. ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि बम काफी शक्तिशाली और जिंदा हालत में है, इसलिए इसे डिफ्यूज करने के लिए सेना की टीम बुलाई गई है. जल्द ही आर्मी मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करेगी.
स्थानीय प्रशासन ने आस-पास के ग्रामीणों को सख्त निर्देश जारी किए हैं, उन्हें चेतावनी दी है कि वे नदी के किनारे उस खास जगह के करीब न जाएं और न ही उस वस्तु के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करें. इन चेतावनियों के बावजूद, बम मिलने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और दूर से ही बम की एक झलक पाने की कोशिश करने लगे. नदी के किनारे रेत और मिट्टी के नीचे दबे इस बम के मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. शुरुआत में इसे लोहे की कोई साधारण वस्तु समझ लिया गया था. विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस तरह का कोई विस्फोटक उपकरण गिराया जाता है लेकिन वह फटता नहीं है तो वह वर्षों तक सक्रिय रह सकता है और किसी भी क्षण फट सकता है.
स्थानीय बुजुर्गों से मिली जानकारी के आधार पर ऐसा माना जा रहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस इलाके में हवाई गतिविधियां होती थीं. ऐसी आशंका है कि उस समय, किसी विमान ने अपना वजन कम करने के लिए अपना पेलोड गिरा दिया होगा. हालांकि इनमें से कुछ युद्धक सामग्री को बाद में हटा दिया गया था लेकिन यह खास बम जमीन के नीचे ही दबा रह गया.
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