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पश्चिम बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की AJUP को चुनाव आयोग की मंजूरी, क्या है नई पार्टी बनाने की प्रक्रिया?

Humayun Kabir: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंड MLA हुमायूं कबीर की नई पार्टी को मंजूरी मिल गई. क्या आपको पता है नई पार्टी कैसे बनाई जाती है? चलिए इस खबर में आपको पूरी प्रक्रिया बताते हैं.

Humayun Kabir: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सस्पेंड MLA हुमायूं कबीर को अच्छी खबर मिली है. बुधवार शाम को बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र के MLA हुमायूं कबीर ने बताया कि उन्हें चुनाव आयोग (EC) से एक नोटिफिकेशन मिला है. इसमें कहा गया है कि उनकी नई पॉलिटिकल पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए शुरुआती मंज़ूरी मिल गई है. उन्होंने बताया कि नई पॉलिटिकल पार्टी का नाम आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) रखा गया है. 

हुमायूं कबीर ने बताया कि पार्टी इस साल होने वाले अहम विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है. कबीर ने शुरू में चुनाव आयोग को ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) नाम का सुझाव दिया था. पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के ऑफिस ने भी प्रस्तावित नाम की मंज़ूरी के लिए आयोग के हेडक्वार्टर को एक सिफारिश भेजी थी. हालांकि, बाद में आयोग ने कबीर को पार्टी का नाम बदलने की सलाह दी क्योंकि इसी नाम से एक पॉलिटिकल पार्टी पहले से ही रजिस्टर्ड थी.

जनता उन्नयन पार्टी के लिए शुरुआती मंजूरी

इसके बाद कबीर ने अपनी पार्टी का नाम बदलकर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) कर दिया. शुरुआती मंज़ूरी के बावजूद पार्टी को अपना फ़ाइनल और ऑफ़िशियल रजिस्ट्रेशन मिलने में कुछ समय लगेगा. इस प्रोसेस के लिए अब अखबारों में पब्लिक नोटिस पब्लिश करने होंगे, जिसमें जनता को नई पॉलिटिकल पार्टी के प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया जाएगा. अगर तय समय में कोई ऑब्ज़ेक्शन नहीं मिलता है, तो फ़ाइनल रजिस्ट्रेशन दे दिया जाएगा. कमीशन के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि अगर कोई दिक्कत नहीं आती है, तो AJUP का फ़ाइनल रजिस्ट्रेशन दो हफ़्ते के अंदर दिया जा सकता है.

बाबरी मस्जिद से चर्चा में आए थे

हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से सस्पेंड कर दिया गया था. जब उन्होंने मुर्शिदाबाद ज़िले के बेलडांगा में एक प्रस्तावित मस्जिद के शिलान्यास समारोह की घोषणा की थी. कबीर ने कहा था कि मस्जिद अयोध्या में असली बाबरी मस्जिद के आर्किटेक्चरल स्टाइल में बनाई जाएगी, जिसे 6 दिसंबर, 1992 को गिरा दिया गया था.

चुनाव आयोग की परमिशन है जरूरी

भारत जैसे डेमोक्रेटिक देश में कोई भी नागरिक या ग्रुप अपने पॉलिटिकल विचारों और आइडियोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए नई पॉलिटिकल पार्टी बना सकता है. लेकिन, इसके लिए एक लीगल प्रोसेस और इलेक्शन कमीशन की अनुमति जरूरी होती है. इलेक्शन कमीशन के नियमों के मुताबिक, नई पार्टी बनाना आसान है: सबसे पहले पार्टी बनने की तारीख से 30 दिनों के अंदर कमीशन में एक फॉर्मल एप्लीकेशन देनी होती है.

चुनाव आयोग को जानकारी देनी होती है

एप्लीकेशन के साथ 10,000 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट देना होता है, जिसे रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर माना जाता है. यह रकम 2014 से पहले 5,000 रुपए थी लेकिन तब से इसे बढ़ा दिया गया है. रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ़ पैसे जमा करना काफ़ी नहीं होता है. आवेदन में पार्टी का कॉन्स्टिट्यूशन, हेडक्वार्टर का पता, प्रेसिडेंट और जनरल सेक्रेटरी समेत ऑफिस बेयरर्स की लिस्ट, स्टैटिस्टिक्स और मेंबरशिप डिटेल्स भी शामिल होना चाहिए. नियमों के मुताबिक, एक नई पार्टी को कम से कम 100 प्राइमरी मेंबर्स की लिस्ट इलेक्शन कमीशन को देनी पड़ती है. इन मेंबर्स के नाम, पते और एफिडेविट भी अटैच करने होते हैं.

अखबारों में जानकारी

इसके अलावा, पार्टी रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान सर्विस बनाए रखने के लिए इलेक्शन कमीशन सेक्रेटेरिएट चाहता है कि पार्टी अपनी एप्लीकेशन कम से कम दो नेशनल और दो लोकल अखबारों में पब्लिश करे. यह पब्लिकेशन जनता या दूसरी पॉलिटिकल पार्टियों को ऑब्जेक्शन उठाने का मौका देता है. अगर कोई ऑब्जेक्शन फाइल नहीं किया जाता है या कमीशन उन्हें बेबुनियाद मानता है, तो नई पार्टी को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है.

कितने वोटों की जरूरत?

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि रजिस्ट्रेशन और मान्यता दो अलग-अलग चीजें हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद, एक पार्टी को चुनाव लड़ने का अधिकार मिलता है. नेशनल या स्टेट पार्टी का स्टेटस पाने के लिए उसे कुछ एक्स्ट्रा क्राइटेरिया पूरे करने होते हैं. जैसे कि किसी स्टेट के असेंबली इलेक्शन में कुल वोटों का कम से कम 6 फीसदी हासिल करना या एक तय संख्या में सीटें जीतना एक मान्यता प्राप्त पार्टी बनने के लिए जरूरी है.

खर्च कितना आता है?

खर्च की बात करें तो 10,000 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा, पार्टी बनाने में डॉक्यूमेंट्स को नोटरी करवाना, एफिडेविट तैयार करना, अखबारों में नोटिस पब्लिश करना और कानूनी सलाह का खर्च भी शामिल होता है. यह खर्च पार्टी की तैयारी और स्केल के आधार पर कुछ हजार से लेकर कई लाख रुपये तक हो सकता है.

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