Heatwave Impact Schools: देश में गर्मी ने अपनी सीमा पार कर दी है. ऐसे में स्कूलों ने अपना समय बदल दिया है. आइए जानते हैं कि क्या स्कून की नई टाइमिंग-
School Timming Changed 2026 : देश के कई हिस्सों में हो रही भीषण गर्मी ने लोगों के जनजीवन के साथ-साथ शिक्षा को भी प्रभावित किया है. कई राज्यों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के वजह से स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है. प्रशासन ने छात्रों को तेज धूप और गर्मी से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं, ताकि स्कूल के दौरान उनका स्वास्थ्य सेफ रह सके.
गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अधिकतर राज्यों में स्कूलों को सुबह की शिफ्ट में चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य ये है कि पढ़ाई से जुड़ी सभी गतिविधियां दिन के सबसे गर्म समय से पहले ही पूरी कर ली जाएं. उदाहरण के तौर पर, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 8 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक का समय निर्धारित किया है, जो 27 अप्रैल से लागू हो चुका है.
कई राज्यों ने गर्मी की छुट्टियों को पहले शुरू करने या स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है. छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियां 20 अप्रैल से 15 जून तक घोषित कर दी गई हैं, जो नार्मल से लगभग दो सप्ताह पहले हैं. वहीं, ओडिशा में 27 अप्रैल से सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टियां शुरू हो रही हैं। पश्चिम बंगाल में भी 22 अप्रैल से गर्मी की छुट्टियां घोषित की गई हैं, हालांकि दार्जिलिंग जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में ये लागू नहीं है.

जहां स्कूल पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं, वहां छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं. दिल्ली और उत्तराखंड के कई स्कूलों में ‘वॉटर बेल’ प्रणाली शुरू की गई है, जिसके तहत छात्रों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाता है.
इसके अलावा, दिल्ली और तेलंगाना जैसे राज्यों में सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच आउटडोर गतिविधियों, असेंबली और बाहरी कक्षाओं पर रोक लगा दी गई है, ताकि छात्रों को लू और अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके.
हालांकि छात्रों के लिए स्कूल का समय सीमित कर दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में शिक्षकों को दोपहर 1:30 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं.
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है. ऐसे में ये संभव है कि राज्यों द्वारा उठाए गए ये कदम आगे भी जारी रहें या इनमें और बदलाव किए जाएं. फिलहाल, प्राथमिकता छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को दी जा रही है, ताकि वे सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
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