India Heatwave Humidity Risk: जैसे ही 2026 में भारत में गर्मी का मौसम आता है, IMD पूरी तरह से एक्टिव हो जाते है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों. दरअसल, IMD ने अप्रैल से जून के बीच पूर्वी, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से ज़्यादा लू वाले दिनों की चेतावनी जारी कर दी है. लोग एक ऐसी गर्मी का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं
heatwave in india
India Heatwave Humidity Risk: जैसे ही 2026 में भारत में गर्मी का मौसम आता है, IMD पूरी तरह से एक्टिव हो जाते है. क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों. दरअसल, IMD ने अप्रैल से जून के बीच पूर्वी, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से ज़्यादा लू वाले दिनों की चेतावनी जारी कर दी है. लोग एक ऐसी गर्मी का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं जो गर्मी के नए रिकॉर्ड बना सकती है. बता दें कि मध्य भारत में तापमान 42-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच रहा है, जो पहले से ही सुर्खियों में है, लेकिन कुछ ऐसे कम-ज्ञात कारक भी हैं जो यह तय करते हैं कि लाखों लोग गर्मी को अलग-अलग तरीकों से कैसे महसूस करते हैं. विशेष रूप से, नमी (humidity) एक ऐसा कारक है जिस पर वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें वास्तव में ध्यान देने की ज़रूरत है.
गर्मी से लड़ने के लिए इंसान के शरीर के पास एक मुख्य हथियार है और वो है पसीना. जब पसीना त्वचा से भाप बनकर उड़ता है, तो वो अपने साथ गर्मी भी ले जाता है, जिससे इंसान का शरीर ठंडा हो जाता है. सूखी गर्मी में, जैसा कि दिल्ली और राजस्थान में महसूस किया जा रहा है, यह सिस्टम ठीक से काम करता है, जिससे लाखों लोगों को बढ़ते तापमान में भी जीवित रहने में मदद मिलती है.
लेकिन स्थिति तब और भी जटिल हो जाती है जब मौसम में नमी बढ़ जाती है. ऐसी स्थितियों में, हवा में पहले से ही इतनी ज़्यादा नमी होती है कि पसीना भाप बनकर उड़ ही नहीं पाता. पसीना न उड़ने का मतलब है शरीर का ठंडा न होना, और शरीर का ठंडा न होने का मतलब है कि लोगों की दिल की धड़कनें अक्सर तेज़ हो जाती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, और कुछ बेहद गंभीर मामलों में तो शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं और मौत भी हो सकती है.
वैज्ञानिक इस मिले-जुले खतरे को ‘वेट-बल्ब तापमान’ (WBT) का इस्तेमाल करके मापते हैं. यह एक ऐसी रीडिंग है जो गर्मी और नमी, दोनों को एक साथ ध्यान में रखती है; जबकि सामान्य थर्मामीटर की रीडिंग सिर्फ़ हवा के तापमान को ही बताती है. दशकों तक, यह आम तौर पर माना जाता था कि इंसान का शरीर 35 डिग्री सेल्सियस तक के WBT को झेल सकता है. यह वो सीमा है जहाँ पहुँचने पर पसीना आना पूरी तरह से बेअसर हो जाता है. हालाँकि, यह धारणा सिर्फ़ सिद्धांत पर आधारित थी, न कि असल इंसानी शरीरों से मिले वास्तविक डेटा पर.
यह स्थिति ‘पेन स्टेट ह्यूमन एनवायरनमेंटल एज थ्रेशोल्ड्स’ (HEAT) प्रोजेक्ट के साथ बदल गई. यह एक ऐतिहासिक अध्ययन था जिसमें कुछ इंसानी स्वयंसेवकों को ‘एनवायरनमेंटल चैंबर्स’ (तापमान-नियंत्रित कमरों) में रखा गया. उन्हें तापमान पर नज़र रखने वाले छोटे-छोटे सेंसर निगलने के लिए दिए गए, और फिर धीरे-धीरे गर्मी और नमी का स्तर बढ़ाया गया. इस दौरान वे टहलने या साइकिल चलाने जैसी हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियाँ कर रहे थे.
Who Is Kaziah Liz Mejo: केरल की 19 साल काजिया लिज मेजो ने 52 प्रतिभागियों…
MP Gold Price Today: 916 हॉलमार्क वाले सोने का रेट देखने से पहले यह समझना…
Himachal Gold Price Today: रिपोर्ट्स के मुताबिक COMEX गोल्ड फ्यूचर्स 0.47 प्रतिशत बढ़कर $4,702.70 प्रति…
Delhi Gold Price Today: शादी का सीजन शुरू होने वाला है साथ ही दिल्ली को…
Devdutt Padikkal:देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में भारत की पारी को लीड किया, उन्होंने 193…
Silver Price Today: आज MCX पर भी चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. कल…