Kerosene Rule Relaxation: हर जिले में ज्यादा से ज्यादा दो पेट्रोल पंप तय किए जाएंगे जहां केरोसिन बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. नोटिफ़िकेशन में यह भी कहा गया है कि केरोसिन के स्टोरेज ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन में शामिल डीलरों और गाड़ियों को पेट्रोलियम रूल्स 2002 के कुछ लाइसेंसिंग नियमों से छूट दी गई है ताकि सप्लाई चेन में तेज़ी लाई जा सके और लास्ट-माइल डिस्ट्रीब्यूशन पक्का किया जा सके.
LPG संकट के बीच भारत में केरोसिन की हुई वापसी
kerosene Oil: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की एनर्जी सप्लाई को झटका दिया है, और इसका असर अब भारत तक साफ दिखाई देने लगा है. तेल और गैस की सप्लाई में आई रुकावट के चलते जहां LPG की उपलब्धता प्रभावित हुई है, वहीं आम लोगों की रसोई पर भी इसका असर पड़ने लगा है. इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने घरों तक केरोसिन की सप्लाई को आसान बनाने के लिए पेट्रोलियम सेफ्टी और लाइसेंसिंग नियमों में कुछ समय के लिए ढील दी है.
केंद्र सरकार द्वारा 29 मार्च को जारी एक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS/सरकारी राशन की दुकानों) के जरिए 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) की एड-हॉक सप्लाई की इजाजत दी है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि लोगों को फ्यूल की कमी का सामना न करना पड़े.
सरकार ने साफ किया है कि केरोसिन का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए सिर्फ घरेलू इस्तेमाल, जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए ही सप्लाई किया जाएगा. इन बदलावों के तहत पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे कुछ चुने हुए पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर करने और बांटने की इजाजत दी गई है. चुने हुए पेट्रोल पंप 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर कर सकेंगे.
हर जिले में ज्यादा से ज्यादा दो पेट्रोल पंप तय किए जाएंगे जहां केरोसिन बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. नोटिफ़िकेशन में यह भी कहा गया है कि केरोसिन के स्टोरेज ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन में शामिल डीलरों और गाड़ियों को पेट्रोलियम रूल्स 2002 के कुछ लाइसेंसिंग नियमों से छूट दी गई है ताकि सप्लाई चेन में तेज़ी लाई जा सके और लास्ट-माइल डिस्ट्रीब्यूशन पक्का किया जा सके.
इस फैसले से उन इलाकों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के जरिए केरोसिन की सप्लाई भी कुछ समय के लिए फिर से शुरू हो गई है जहां इसे पहले बंद कर दिया गया था ताकि मौजूदा फ़्यूल रिटेल नेटवर्क के जरिए तेजी से डिस्ट्रीब्यूशन पक्का किया जा सके. इस दौरान, पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ़्टी ऑर्गनाइज़ेशन (PESO) की तरफ़ से जारी सेफ़्टी गाइडलाइन और ऑपरेशनल प्रोटोकॉल लागू रहेंगे.
भारत में केरोसिन की बिक्री पूरे देश में पूरी तरह से बैन नहीं की गई थी बल्कि धीरे-धीरे कम की गई थी. 2015 से केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के जरिए एलपीजी और बिजली कनेक्शन को बढ़ावा देना शुरू किया. पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS/राशन की दुकानों) के जरिए सब्सिडी वाले केरोसिन की बिक्री भी धीरे-धीरे बंद कर दी गई. दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ ने 2018-2020 के बीच पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत केरोसिन की बिक्री बंद कर दी और खुद को केरोसिन-फ्री घोषित कर दिया.
पीडीएस के ज़रिए सब्सिडी वाले केरोसिन की बिक्री रोकने के पीछे मुख्य मकसद प्रदूषण कम करना, पेट्रोल/डीज़ल में मिलावट रोकना और सब्सिडी का बोझ कम करना था. 2020 तक, ज़्यादातर इलाकों में इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क लगभग खत्म हो गया था. जिन राज्यों में एलपीजी और बिजली की पहुंच अभी भी सीमित थी, वहां केरोसिन की सीमित सप्लाई जारी रही. सब्सिडी खत्म होने से, खुले बाज़ार में इसकी कीमत बढ़ गई, और एलपीजी कनेक्शन और गैस सिलेंडर आसानी से मिलने से केरोसिन की खपत में कमी आई. धीरे-धीरे केरोसिन बाज़ार से गायब हो गया और सरकार को इसे पूरी तरह से बैन करने की जरूरत नहीं पड़ी.
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