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47 मिलियन एकड़ जमीन पर असर पड़ेगा, बर्बाद हो जाएगी 90% खेती; जानें क्या है सिंधु जल समझौता जिसके लिए UNSC में गिड़गिड़ाने लगा पाकिस्तान

Sindhu Jal Samjhauta Kya Hai: भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की बातचीत के बाद सितंबर 1960 में IWT पर साइन किए थे जिसमें वर्ल्ड बैंक ने मीडिएटर का काम किया था. इस ट्रीटी में यह तय किया गया था कि इंडस रिवर सिस्टम की छह नदियों का पानी भारत और पाकिस्तान के बीच कैसे शेयर किया जाएगा.

Sindhu Jal Samjhauta: भारत के सिंधु जल संधि को रद्द करने के फैसले ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है. इस्लामाबाद ने अब इस मुद्दे पर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में अपील की है. पाकिस्तान ने UNSC से भारत के साथ सिंधु जल संधि को पूरी तरह लागू करने की मांग करने को कहा है. भारत ने पिछले अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को सस्पेंड कर दिया था. यूनाइटेड नेशंस में पाकिस्तान के परमानेंट मिशन के एम्बेसडर असीम इफ्तिखार अहमद ने गुरुवार को UNSC के प्रेसिडेंट जमाल फारेस अलरोवाई से मुलाकात की. मीटिंग के दौरान अहमद ने सिंधु जल संधि के बारे में पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और फॉरेन मिनिस्टर इशाक डार का एक लेटर पेश किया. तो चलिए जानते हैं कि क्या है सिंधु जल समझौता और पाकिस्तान के लिए ये इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

ट्रीटी को लागू करने की मांग

यूनाइटेड नेशंस में पाकिस्तान के परमानेंट मिशन ने एक बयान में कहा, “सिक्योरिटी काउंसिल से अपील है कि वह इस चिंताजनक स्थिति पर ध्यान दे और भारत से सिंधु जल ट्रीटी को पूरी तरह से लागू करने, ट्रीटी के तहत ज़रूरी सभी सहयोग और डेटा शेयरिंग को बिना देर किए फिर से शुरू करने पानी के मामले में किसी भी तरह के दबाव या ज़बरदस्ती से बचने और अपनी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों को ईमानदारी से पूरा करने के लिए कहे.”

सिंधु जल समझौता कब साइन हुआ था?

भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की बातचीत के बाद सितंबर 1960 में IWT पर साइन किए थे जिसमें वर्ल्ड बैंक ने मीडिएटर का काम किया था. इस ट्रीटी में यह तय किया गया था कि इंडस रिवर सिस्टम की छह नदियों का पानी भारत और पाकिस्तान के बीच कैसे शेयर किया जाएगा.

सिंधु जल समझौतामें कौन सी नदियां शामिल हैं?

सिंधु जल समझौताके तहत भारत-पाकिस्तान ट्रीटी इंडस नदी और उसकी पांच सहायक नदियों सतलुज, ब्यास, रावी, झेलम और चिनाब के पानी के इस्तेमाल पर दोनों पक्षों के बीच सहयोग और जानकारी के लेन-देन के लिए एक सिस्टम बनाती है.

सिंधु जल समझौता के तहत भारत और पाकिस्तान को कितना पानी मिलता है?

सिंधु जल समझौताने तीन पश्चिमी नदियों इंडस, चिनाब और झेलम को बिना रोक-टोक के पानी के इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को दिया था. बाकी तीन पूर्वी नदियां रावी, ब्यास और सतलुज भारत को बिना रोक-टोक के पानी के इस्तेमाल के लिए दी गईं, सिवाय कुछ गैर-खपत वाले खेती और घरेलू इस्तेमाल के लिए. इसका मतलब है कि सिंधु जल समझौताका 80% पानी पाकिस्तान को गया जबकि बाकी 20% भारत के इस्तेमाल के लिए छोड़ दिया गया.

भारत-पाकिस्तान इंडस वॉटर कमीशन

सिंधु जल समझौताने भारत और पाकिस्तान के परमानेंट कमिश्नरों के साथ एक परमानेंट इंडस कमीशन भी बनाया. सिंधु जल समझौतामें कमीशन की तरफ से भारत और पाकिस्तान के बीच साल में कम से कम एक बार रेगुलर मीटिंग का भी नियम है.

सिंधु पानी को रोकने और स्टोर करने पर रोक

झेलम, चिनाब और इंडस के पानी पर पाकिस्तान का अधिकार है. सिंधु जल समझौता(IWT) का एनेक्स C भारत को खेती के कुछ इस्तेमाल की इजाज़त देता है, जबकि एनेक्स D उसे ऐसे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बनाने की इजाज़त देता है जो “रन-ऑफ-द-रिवर” कैटेगरी में आते हैं, जिसका मतलब है कि ट्रीटी के तहत पानी को रोकने या स्टोर करने की इजाज़त नहीं है.

सिंधु जल समझौताकी खास बातें

  • सिंधु जल समझौता19 सितंबर 1960 को साइन की गई थी.
  • इस ट्रीटी में छह नदियाँ शामिल हैं: तीन पूर्वी नदियां (ब्यास, रावी और सतलुज) और तीन पश्चिमी नदियाँ (इंडस, झेलम और चिनाब).
  • IWT ट्रीटी के तहत 80 परसेंट पानी पाकिस्तान को और 20 परसेंट पानी भारत को दिया जाता है.
  • अगर सिंधु जल समझौताटूट जाती है तो पाकिस्तान को क्या नुकसान होगा?
  • सिंधु जल समझौताके टूटने से, जिसे आतंकवाद के खिलाफ ठोस और पक्के एक्शन लिए जाने तक रोक दिया गया है, पाकिस्तान को काफी नुकसान हो सकता है.
  • सिंधु जल समझौता के सस्पेंशन से पाकिस्तान की 90% खेती की जमीन या 47 मिलियन एकड़ ज़मीन पर असर पड़ेगा जहां सिंचाई का पानी इंडस रिवर सिस्टम से मिलता है.
  • खेती, जो पाकिस्तान की नेशनल इनकम में 23% हिस्सा देती है, उस पर भी असर पड़ सकता है; पाकिस्तान की 68% ग्रामीण आबादी खेती पर निर्भर है.
  • भारत द्वारा इंडस वॉटर सप्लाई में कोई भी कमी पाकिस्तान के तरबेला और मंगल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर असर डालेगी.
  • इससे बिजली बनाने पर 30 से 50% तक असर पड़ेगा, जिससे इंडस्ट्री और रोज़गार पर असर पड़ेगा.
Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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