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वो अक्सर अपनी आवाज नहीं उठातीं, खामोशी सब कुछ बयां करती है, महिला दिवस पर विराट कोहली ने किसे बताया गुनहगार?

International Women’s Day: इंटरनेशनल विमेंस डे हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है. इंडिया के फैशन ब्रांड्स में से एक Wrogn, क्रिकेटिंग आइकॉन और ब्रांड एंबेसडर विराट कोहली के साथ मिलकर ऐसा ही एक सवाल पूछ रहा है.

International Women’s Day: इंटरनेशनल विमेंस डे हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है. हम इवेंट्स, कैंपेन, रोडशो और भी बहुत कुछ के ज़रिए औरत होने की भावना का शानदार जश्न देखते हैं. कुछ लोग महिलाओं को इंस्पायर करते हैं, कुछ उकसाते हैं और फिर कुछ ऐसे होते हैं जो हमें मुश्किल सवालों का सामना कराते हैं. जो हमें अपने आस-पास की दुनिया को क्रिटिकली देखने पर मजबूर करते हैं.

इंडिया के फैशन ब्रांड्स में से एक Wrogn, क्रिकेटिंग आइकॉन और ब्रांड एंबेसडर विराट कोहली के साथ मिलकर ऐसा ही एक सवाल पूछ रहा है. ‘अगर आप कोई क्राइम देखते हैं और चुप रहते हैं, तो क्या आप भी उतने ही गुनहगार नहीं हैं?’

महिलाओं के के लिए विराट कैंपेन

कैंपेन में विराट कोहली एक आसान लेकिन दमदार याद दिलाते हुए दिखते हैं. औरतों के खिलाफ हिंसा और नाइंसाफी हमारे आस-पास मौजूद है. इसमें डोमेस्टिक वायलेंस भी शामिल है. अक्सर, यह इसलिए बनी रहती है क्योंकि लोग उनके खिलाफ होने वाली हिंसा पर आवाज नहीं उठाते. यह फिल्म क्राइम देखने और नज़रअंदाज़ करने की खामोश सच्चाई की ओर ध्यान खींचती है, क्योंकि विक्टिम्स अक्सर बोल नहीं पाते. लेकिन हममें से बाकी लोग बोल सकते हैं. इसमें संदेश दिया गया है कि चुपचाप देखने वाला बनना आपको भी उतना ही गुनहगार बनाता है, जितना करने वाला. इस विमेंस डे पर Wrogn इसे नज़रअंदाज करना को नामुमकिन बनाना चाहता है.

Wrogn फाउंडर ने क्या कहा?

Wrogn की फाउंडर अंजना रेड्डी कहती हैं कि हर साल विमेंस डे पर Wrogn ने अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल फैशन से आगे बढ़कर कुछ करने के लिए किया है. घरेलू हिंसा सबसे कम रिपोर्ट होने वाले अपराधों में से एक है क्योंकि पीड़ित अक्सर बोल नहीं पाते और जो लोग इसे देखते हैं, वे भी ऐसा नहीं करना चाहते. हम उस चुप्पी को आईना दिखाना चाहते थे. अगर एक भी व्यक्ति चुप रहने के बजाय बोलना चुनता है, तो मैसेज ने अपना काम कर दिया है.

महिला दिवस पर देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कई तरह के कैंपेन चलाए जाते हैं. इसमें महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की बात की जाती है. आज महिला भी पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है. स्त्री हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. लेकिन, कुछ पहलू आज भी ऐसे हैं जिन पर समाज को गौर करने की जरूरत है. 

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