Gurudwara with Aeroplane: जालंधर के तलहन स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां विदेश जाने की मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु अरदास करते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने पहुंचते हैं. इसी वजह से इसे ‘हवाई जहाज वाला गुरुद्वारा’ भी कहा जाता है.
विदेश जाने की मन्नत से जुड़ा है पंजाब का यह अनोखा गुरुद्वारा
Gurudwara with Aeroplane: पंजाब को गुरुओं की धरती कहा जाता है. यहां मौजूद ऐतिहासिक गुरुद्वारे सिर्फ धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि उनसे जुड़ी कई ऐसी परंपराएं भी हैं, जो उन्हें देश-दुनिया में अलग पहचान दिलाती हैं. पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में स्थित गुरुद्वारों में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं और अरदास करते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार सेवा और दान करते हैं. लेकिन जालंधर का एक गुरुद्वारा अपनी एक बेहद अनोखी परंपरा के कारण खास तौर पर चर्चा में रहता है. जालंधर के तलहन में स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाते हैं. यही वजह है कि इसे आम बोलचाल में ‘हवाई जहाज वाला गुरुद्वारा’ भी कहा जाता है. खासकर विदेश जाने की इच्छा रखने वाले लोग यहां अरदास करने पहुंचते हैं. किसी का पासपोर्ट या वीजा बनने की इच्छा हो या विदेश में जाकर पढ़ाई, नौकरी या कारोबार करने का सपना, श्रद्धालु गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होकर अपनी मनोकामना के लिए अरदास लगाते हैं.
जालंधर शहर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर तलहन में स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी को शहीद बाबा निहाल सिंह जी गुरुद्वारा साहिब के नाम से भी जाना जाता है. यह स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. पंजाब के अलग-अलग इलाकों के अलावा विदेशों में रहने वाले लोगों के बीच भी इस गुरुद्वारे को लेकर खास मान्यता देखने को मिलती है. गुरुद्वारा साहिब की पहचान केवल इसके धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से निभाई जाने वाली हवाई जहाज चढ़ाने की परंपरा ने इसे एक अलग पहचान दी है. गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धालु खिलौने वाले हवाई जहाज लेकर पहुंचते हैं और अरदास करने के बाद इन्हें चढ़ाते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद भी लोग दोबारा गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता विदेश जाने की इच्छा से संबंधित है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अगर किसी व्यक्ति के विदेश जाने के रास्ते में पासपोर्ट, वीजा या अन्य किसी तरह की रुकावट आ रही हो तो वह यहां आकर अरदास कर सकता है. इसी विश्वास के चलते कई लोग यहां खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाते हैं. मान्यता के अनुसार, मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार सेवा और दान करते हैं. कई लोग खिलौने वाला हवाई जहाज लेकर गुरुद्वारा साहिब पहुंचते हैं. हालांकि, यह श्रद्धालुओं की आस्था और स्थानीय परंपरा से जुड़ी मान्यता है, जिसकी कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है. इसके बावजूद इस परंपरा को लेकर लोगों की श्रद्धा लगातार बनी हुई है. कहा जाता है कि हर महीने बड़ी संख्या में लोग विदेश जाने की इच्छा लेकर यहां पहुंचते हैं. रविवार के दिन गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है. इनमें ऐसे लोग भी शामिल होते हैं जो पहली बार अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और ऐसे परिवार भी होते हैं, जिनकी पहले मांगी गई मन्नत पूरी होने के बाद वे दोबारा यहां माथा टेकने पहुंचते हैं.
गुरुद्वारा साहिब पहुंचे श्रद्धालुओं के अनुभव इस परंपरा को और दिलचस्प बनाते हैं. यहां आए प्रदीप नाम के एक श्रद्धालु ने बताया कि उनके भाई ने विदेश जाने की मन्नत मांगी थी. करीब दो साल पहले उनके परिवार ने इसके लिए अरदास की थी. पिछले महीने उनके भाई के विदेश चले जाने के बाद अब परिवार मन्नत पूरी होने पर गुरुद्वारा साहिब में खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाने पहुंचा. प्रदीप के मुताबिक, वह पिछले छह साल से गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए आ रहे हैं. उनका विश्वास है कि यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए अरदास करते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद दोबारा आकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं. इसी तरह यहां पहुंचे एक अन्य श्रद्धालु सतिंदर सिंह ने बताया कि वह पंजाब पुलिस में कार्यरत हैं, लेकिन उनका सपना विदेश जाने का था. उन्होंने विदेश जाने की मन्नत मांगी थी और अब उनका यह सपना पूरा होने जा रहा है. उन्होंने बताया कि अगले साल वह न्यूजीलैंड जाने की तैयारी कर रहे हैं. इसी खुशी और विश्वास के साथ वह गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने पहुंचे.
अमृतसर से गुरुद्वारा साहिब पहुंचे परमजोत सिंह ने भी अपनी आस्था से जुड़ा अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि करीब चार साल पहले वह अपनी पत्नी के साथ इस गुरुद्वारे में आए थे. अब चार साल बाद वह फिर अपनी पत्नी और बेटे के साथ यहां पहुंचे हैं. इस बार भी उन्होंने परिवार के साथ विदेश जाने की अरदास लगाई है. तलहन का यह गुरुद्वारा इसलिए भी खास है क्योंकि यहां आस्था के साथ लोगों के विदेश जाने के सपने भी जुड़े नजर आते हैं. किसी के लिए यह पासपोर्ट और वीजा बनने की उम्मीद का स्थान है तो किसी के लिए विदेश पहुंचने के बाद मन्नत पूरी होने पर धन्यवाद देने का केंद्र. खिलौने वाले हवाई जहाज चढ़ाने की परंपरा ने गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी को पंजाब के उन धार्मिक स्थलों में अलग पहचान दी है, जहां श्रद्धालु अपनी विशेष मनोकामना लेकर पहुंचते हैं.
गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी में हवाई जहाज चढ़ाने की परंपरा आज श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का विषय है. यहां आने वाले लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार अरदास करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर सेवा, दान या खिलौने वाला हवाई जहाज चढ़ाकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं. पंजाब की धार्मिक परंपराओं में ऐसे कई स्थल हैं, जहां स्थानीय मान्यताएं समय के साथ लोगों की आस्था का हिस्सा बन गई हैं. तलहन का गुरुद्वारा भी ऐसी ही एक परंपरा के कारण अलग पहचान बना चुका है. विदेश जाने की इच्छा रखने वाले लोगों के बीच इसकी चर्चा खास तौर पर होती है और इसी वजह से यह गुरुद्वारा न केवल पंजाब बल्कि देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी जाना जाता है.
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