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छोटे अपराधों पर नहीं होगा केस! मामूली मामलों को अपराध की सूची से हटाने की तैयारी में सरकार, जन विश्वास बिल पेश

सदन में जन विश्वास बिल पेश किया गया है. इस बिल में छोटे नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की कोशिश है. इसके बाद से छोटे-छोटे नियमों के उल्लंघनों के बाद जेल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

Jan Vishwas Bill: कई बार आपने सुना होगा कि किसी के खेतों में जानवर घुस गए और इसके बाद खेत के मालिक ने जानवर के मालिक पर आपराधिक आरोप लगा दिया. इसके बाद उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके 10 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है. बता दें कि ये रकम है जिसे आखिरी बार 1871 में सज़ा के तौर पर पर्याप्त माना गया था. अक्सर सवाल आता है कि छोटे-छोटे नियमों का उल्लंघन करने पर जेल जाना जरूरी है या तकनीकी गलती को अपराध मानना सही है? लंबे समय से इस तरह के सवाल भारत की कानूनी व्यवस्था पर उठते रहे हैं. यहां मामूली चूक भी कई बार आपराधिक मुकदमे बन जाती है. 

इस तरह के मामलों से निपटने के लिए जन विश्वास बिल पेश किया गया है. ये बिल न सिर्फ जेल की सजा को सीमित करने की बाात करता है बल्कि इंस्पेक्टर राज जैसे विवादित सिस्टम पर रोक लगाने की कोशिश भी करता है. इस बिल का उद्देश्य है कि शासन डर पर नहीं बल्कि भरोसे पर चलना चाहिए. हर कानून का उद्देश्य होना चाहिए कि समाज में सुधार हो. हर गलती पर दंड देना कहां तक सही है. इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए सरकार नियमों में बदलाव करने की कोशिश में है.

दिल्ली में इन चीजों पर जुर्माना

दिल्ली में अगर कोई आदमी दीवार के सहारे पेशाब कर रहा है, इस तरह वह तकनीकी रूप से एक आपराधिक अपराध का दोषी है, जिसके लिए नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम के तहत सज़ा का प्रावधान है. वहीं अगर आप दिल्ली मेट्रो के डिब्बे में हैं और आपका कोई सह-यात्री सिगरेट जला लेता है. उस व्यक्ति ने अभी-अभी एक आपराधिक अपराध किया है, जिसके लिए 250 रुपये का जुर्माना है, जिसे 1980 के दशक के बाद से संशोधित नहीं किया गया है. ये असल कानून हैं. ये एक ऐसी समस्या को दर्शाते हैं जिसे ‘जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026’ सीधे तौर पर हल करना चाहता है.

717  उल्लंघनों को अपराध श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव

बीते सप्ताह केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किया गया यह प्रस्तावित कानून, या विधेयक, 80 केंद्रीय कानूनों के तहत कम से कम 717 छोटे-मोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव करता है. ये गिरफ्तारी, मुकदमा और जेल के जोखिम को नागरिक दंड, प्रशासनिक निर्णय और कई मामलों में, पहले चेतावनी देने से बदल देता है। यह इस तरह के सुधारों का तीसरा संस्करण है. ये विधेयक तभी एक अधिनियम या कानून बनेगा, जब लोकसभा और राज्यसभा दोनों इसे पारित कर दें और राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर दें.

दिल्ली में इन अपराधों पर भी जुर्माना

NDMC अधिनियम की मौजूदा धारा 308 के तहत, किसी सार्वजनिक सड़क के पास खुले में पेशाब करना या शौच करना एक आपराधिक अपराध है. यह परिभाषित उपद्रवों की एक लंबी सूची में शामिल है. इन सभी को आपराधिक मामलों के रूप में दंडनीय माना जाता है और इन पर 50 रुपये का जुर्माना है. ये विधेयक इस ढांचे को पुनर्गठित करने का प्रस्ताव करता है. धारा 369 को बदला जाएगा, जिसमें हर जगह “दंडनीय” शब्द की जगह “जुर्माने के लिए उत्तरदायी” शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा. धारा 308 के तहत “परेशानी पैदा करने” पर अब ₹500 का सिविल जुर्माना लगेगा.

मेट्रो में धूम्रपान

कलकत्ता मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अस्थायी प्रावधान अधिनियम, 1985 में भले ही कोलकाता का पुराना नाम हो, लेकिन यह पूरे देश की मेट्रो रेल सेवाओं पर लागू होता है. इसके अनुसार, किसी भी डिब्बे, कोच या भूमिगत स्टेशन में धूम्रपान करना एक आपराधिक अपराध है, जिसके लिए अधिकतम ₹250 का जुर्माना हो सकता है. यह बिल इस प्रावधान को एक नई धारा से बदलता है, जिसके तहत तुरंत ₹2,000 का जुर्माना लगाया जाएगा और साथ ही यात्री का पास या टिकट भी अनिवार्य रूप से ज़ब्त कर लिया जाएगा, लेकिन यह कोई आपराधिक अपराध नहीं है, बल्कि सिर्फ एक सिविल उल्लंघन है. साथ ही धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को डिब्बे से बाहर भी निकाला जा सकता है. अगर कोई जुर्माना देने से इनकार करता है, तो ही मामला किसी सक्षम अदालत में जाएगा. इसके बाद अदालत 5000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकती है, जिसमें न्यूनतम जुर्माना 2000 रुपये होगा.

हॉर्न बजाना और ध्वनि प्रदूषण

इसके अलावा हॉर्न बजाना और ध्वनि प्रदूषण के लिए 1000 रुपये का जुर्माना तय था, जो बार-बार अपराध करने वालों के लिए बढ़कर 2000 रुपये हो जाता था. अब इस तरह के मामले में पहले अपराध के लिए सिर्फ़ एक लिखित चेतावनी दी जाएगी, जिसका प्रारूप केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाएगा. इसके लिए न तो कोई जुर्माना लगेगा और न ही कोई आपराधिक रिकॉर्ड बनेगा. दूसरी बार उल्लंघन करने पर सिविल जुर्माना लगेगा. वहीं नॉइज पॉल्यूशन करने वालों को पहली बार चेतावनी दी जाएगी और दोबारा ऐसी गलती करने पर 10 हजार तक का जुर्माना लग सकता है.

जानवरों को बांधना और दूध निकालना

दिल्ली में सार्वजनिक सड़कों पर मवेशियों का दूध निकालना या जानवरों को बांधना एक ऐसा अपराध है, जिसके लिए मौजूदा कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज होता है और 100 रुपये का जुर्माना लगता है. अगर ये अपराध जारी रहता है, तो हर दिन 5 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगता है. नया बिल इसे एक सिविल अपराध में बदल देगा. इसके लिए सबसे पहले एक बार चेतावनी दी जाएगी और दूसरी बार 1000 रुपये का जुर्माना लगेगा. 

ट्रेनों में सामान बेचना और भीख मांगना

रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 144 के तहत, अभी किसी भी रेलवे कोच या स्टेशन पर भीख मांगना और बिना लाइसेंस के सामान बेचना, दोनों ही एक आपराधिक अपराध हैं. इसके लिए एक साल तक की जेल और 2000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. नया बिल इस धारा को पूरी तरह से बदल देता है. अब बिना लाइसेंस के सामान बेचने पर सीधे 2000 रुपये का सिविल जुर्माना लगेगा. भीख मांगने पर 1000 रुपये का सिविल जुर्माना और ट्रेन से बाहर निकालना होगा. अदालतों का दखल तभी होगा, जब कोई व्यक्ति यह जुर्माना देने से मना कर दे.

बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाना

बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने वालों के लिए प्रस्तावित सबसे अहम बदलावों में से एक है. अभी MV एक्ट के तहत, बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाना पहली बार में ही दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन महीने तक की जेल या 2000 रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. अगर यही अपराध दोबारा किया जाता है, तो उतनी ही जेल के साथ 4000 रुपये का जुर्माना भी लगता है.

Deepika Pandey

दीपिका पाण्डेय साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने 2020 में BJMC की डिग्री हासिल की. करियर की शुरुआत खबर टुडे न्यूज, DNP News और दैनिक खबर जैसे प्लेटफॉर्म्स से बतौर एंकर और कंटेंट राइटर की. उन्होंने क्राइम, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, ऑटो-टेक और करेंट अफेयर्स पर काम किया है. इसके बाद हरिभूमि वेबसाइट में दिल्ली-NCR और नेशनल बीट कवर की. वर्तमान में वह इंडिया न्यूज में सीनियर कॉपी राइटर हैं. उनकी विशेषज्ञता क्राइम और एंटरटेनमेंट, बॉलीवुड, हॉलीवुड और भोजपुरी के साथ पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, वायरल न्यूज, ह्यूमन इंटरेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज में है.

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