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Javed Akhtar on Talibani Rule: ‘हड्डी न टुटे..’ तालिबानी कानून पर भड़के जावेद अख्तर, मौलानाओं से पूछा सवाल

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने महिलाओं को गुलाम की तरह रखने के नए नियम लागू कर दिए हैं. इसको लेकर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने नाराजगी जताई है.

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Published: February 21, 2026 23:18:00 IST
Last Updated: 2026-02-21 23:20:06

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Javed Akhtar on Talibani Rule against Women: अफगानिस्तान के तालिबान शासन की तरफ से नया रीनल कोड लागू किया गया है, जिसमें महिलाओं को गुलाम की तरह का दर्जा दिया गया है. इसमें महिलाओं के पतियों को खुली छूट दी गई है कि वे अपनी पत्नी को जैसी सजा चाहें, दे सकते हैं. अब इस मामले पर बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने नाराजगी जताई है. उन्होंने इस भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए तालिबानी कानून की आलोचना की. साथ ही भारत के धार्मिक नेताओं से अपील की है कि धर्म के नाम पर महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं.

मायके जाने पर तीन महीने की जेल

दरअसल, जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘तालिबान ने पत्नी को पीटने को लीगल कर दिया है लेकिन शर्त ये है कि कोई हड्डी नहीं टूटनी चाहिए और फ्रैक्चर नहीं होना चाहिए. अगर कोई पत्नी पति की इजाजत के बिना अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल की सजा काटनी होगी. मैं भारत के मुफ़्तियों और मुल्लाओं से गुजारिश करता हूं कि वे इसकी बिना शर्त बुराई करें क्योंकि यह सब उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है.’

‘वे दुनिया के कूड़े हैं’

इसके बाद उन्होंने दूसरा पोस्ट करते हुए लिखा , ‘चाहे जो भी पॉलिटिकल फायदा हो, इन बदतमीज बर्बर तालिबानों को हमें कोई भरोसा या इज्जत नहीं देनी चाहिए. वे दुनिया के कूड़े हैं.’ जावेद अख्तर की इस पोस्ट और उनकी इस सोच की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं. साथ ही इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए उन्हें धन्यवाद कह रहे हैं.

क्या है तालिबान का नया नियम?

बता दें कि अफगानिस्तान में  तालिबान सरकार की तरफ से नई दंड संहिता लागू की हुई है. इसमें लगभग 90 पन्ने हैं. इस पर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर भी हैं. जल्द ही इसे अदालतों में दिया जाएगा. बड़ी बात ये है कि इस कानून के तहत महिलाओं को गुलाम का दर्जा दिया गया है. पति या महिला के मालिक को उसे पीटने और सजा देने के लिए पूरी छूट दी गई है. बशर्ते उसकी हड्डी नहीं टूटनी चाहिए और कोई खुला घाव नहीं होना चाहिए. इस नियम के आने के बाद वहां की महिलाओं में डर और महिला अधिकार संगठन में चिंता है. 

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Last Updated: 2026-02-21 23:20:06

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Javed Akhtar on Talibani Rule against Women: अफगानिस्तान के तालिबान शासन की तरफ से नया रीनल कोड लागू किया गया है, जिसमें महिलाओं को गुलाम की तरह का दर्जा दिया गया है. इसमें महिलाओं के पतियों को खुली छूट दी गई है कि वे अपनी पत्नी को जैसी सजा चाहें, दे सकते हैं. अब इस मामले पर बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने नाराजगी जताई है. उन्होंने इस भयावह स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए तालिबानी कानून की आलोचना की. साथ ही भारत के धार्मिक नेताओं से अपील की है कि धर्म के नाम पर महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं.

मायके जाने पर तीन महीने की जेल

दरअसल, जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘तालिबान ने पत्नी को पीटने को लीगल कर दिया है लेकिन शर्त ये है कि कोई हड्डी नहीं टूटनी चाहिए और फ्रैक्चर नहीं होना चाहिए. अगर कोई पत्नी पति की इजाजत के बिना अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल की सजा काटनी होगी. मैं भारत के मुफ़्तियों और मुल्लाओं से गुजारिश करता हूं कि वे इसकी बिना शर्त बुराई करें क्योंकि यह सब उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है.’

‘वे दुनिया के कूड़े हैं’

इसके बाद उन्होंने दूसरा पोस्ट करते हुए लिखा , ‘चाहे जो भी पॉलिटिकल फायदा हो, इन बदतमीज बर्बर तालिबानों को हमें कोई भरोसा या इज्जत नहीं देनी चाहिए. वे दुनिया के कूड़े हैं.’ जावेद अख्तर की इस पोस्ट और उनकी इस सोच की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं. साथ ही इस मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए उन्हें धन्यवाद कह रहे हैं.

क्या है तालिबान का नया नियम?

बता दें कि अफगानिस्तान में  तालिबान सरकार की तरफ से नई दंड संहिता लागू की हुई है. इसमें लगभग 90 पन्ने हैं. इस पर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर भी हैं. जल्द ही इसे अदालतों में दिया जाएगा. बड़ी बात ये है कि इस कानून के तहत महिलाओं को गुलाम का दर्जा दिया गया है. पति या महिला के मालिक को उसे पीटने और सजा देने के लिए पूरी छूट दी गई है. बशर्ते उसकी हड्डी नहीं टूटनी चाहिए और कोई खुला घाव नहीं होना चाहिए. इस नियम के आने के बाद वहां की महिलाओं में डर और महिला अधिकार संगठन में चिंता है. 

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