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झारखंड की ओपन जेल में अनोखी शादी, पूर्व माओवादी कमांडरों के लिए पुलिस-प्रशासन बना बाराती

Jharkhand News: झारखंड के हजारीबाग में हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां कभी माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे दो लोगों ने शादी करने का फैसला किया. इस बारात में पुलिसवाले बाराती बने.

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Published: October 28, 2026 13:59:12 IST
Last Updated: October 28, 2026 13:59:12 IST

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Jharkhand News: झारखंड के हजारीबाग से एक ऐसी खबर सामने आई है, जहां कभी माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे दो लोगों ने अब साथ मिलकर नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया है. हजारीबाग की ओपन जेल में सोमवार को पूर्व माओवादी कमांडर सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रोम विवाह बंधन में बंध गए. इस शादी को खास बनाने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकारी केवल मेहमान बनकर नहीं आए बल्कि उन्होंने बारातियों की तरह समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े की खुशियां साझा कीं.

पुलिस बनी बाराती

इस विवाह का आयोजन स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की पहल पर किया गया. शादी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई. समारोह में अधिकारियों ने जोड़े को शुभकामनाएं दीं और उनके बेहतर भविष्य की कामना की. बताया गया कि आयोजन इस तरह किया गया, ताकि शादी के मौके पर परिवार के लोगों की कमी जोड़े को ज्यादा महसूस न हो. 

कहां हुई शादी?

हजारीबाग के जिला विवाह अधिकारी राजेश एक्का ने विवाह की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई. इसके साथ ही शादी का पंजीकरण भी किया गया. पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे. समारोह के दौरान अधिकारियों ने नाच-गाकर खुशियां मनाईं और दोनों को नई शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया.

कहां के रहने वाले हैं दूल्हा-दुल्हन?

सुरेश सिंह मुंडा रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बरुहातू गांव के रहने वाले हैं. वहीं सोमवारी हेम्ब्रोम का संबंध तामार क्षेत्र के अरहंगा गांव से है. दोनों पहले माओवादी कमांडर के तौर पर सक्रिय थे. बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल दिए और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. अब दोनों ने अपने जीवन को नए तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

हिंसा छोड़कर शांति का संदेश

शादी के बाद जेल आईजी सुदर्शन कुमार मंडल ने नवदंपती को बधाई दी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन लोगों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो हिंसा छोड़कर शांति का रास्ता अपनाते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.

ये भी पढ़ें: Greater Noida PNB Fraud: किसी की जिंदगीभर की कमाई, किसी की FD पर हाथ साफ! PNB में 35 करोड़ का घोटाला

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Last Updated: October 28, 2026 13:59:12 IST

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Jharkhand News: झारखंड के हजारीबाग से एक ऐसी खबर सामने आई है, जहां कभी माओवादी गतिविधियों से जुड़े रहे दो लोगों ने अब साथ मिलकर नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया है. हजारीबाग की ओपन जेल में सोमवार को पूर्व माओवादी कमांडर सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रोम विवाह बंधन में बंध गए. इस शादी को खास बनाने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकारी केवल मेहमान बनकर नहीं आए बल्कि उन्होंने बारातियों की तरह समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े की खुशियां साझा कीं.

पुलिस बनी बाराती

इस विवाह का आयोजन स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की पहल पर किया गया. शादी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई. समारोह में अधिकारियों ने जोड़े को शुभकामनाएं दीं और उनके बेहतर भविष्य की कामना की. बताया गया कि आयोजन इस तरह किया गया, ताकि शादी के मौके पर परिवार के लोगों की कमी जोड़े को ज्यादा महसूस न हो. 

कहां हुई शादी?

हजारीबाग के जिला विवाह अधिकारी राजेश एक्का ने विवाह की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराई. इसके साथ ही शादी का पंजीकरण भी किया गया. पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे. समारोह के दौरान अधिकारियों ने नाच-गाकर खुशियां मनाईं और दोनों को नई शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया.

कहां के रहने वाले हैं दूल्हा-दुल्हन?

सुरेश सिंह मुंडा रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बरुहातू गांव के रहने वाले हैं. वहीं सोमवारी हेम्ब्रोम का संबंध तामार क्षेत्र के अरहंगा गांव से है. दोनों पहले माओवादी कमांडर के तौर पर सक्रिय थे. बाद में उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल दिए और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. अब दोनों ने अपने जीवन को नए तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

हिंसा छोड़कर शांति का संदेश

शादी के बाद जेल आईजी सुदर्शन कुमार मंडल ने नवदंपती को बधाई दी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उन लोगों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो हिंसा छोड़कर शांति का रास्ता अपनाते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं.

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