Train drivers salary: भारतीय रेलवे में लोको पायलट, मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर और भविष्य में बुलेट ट्रेन से जुड़ी नौकरियों को लेकर युवाओं की दिलचस्पी बढ़ रही है. ALP का शुरुआती बेसिक पे ₹19,900 है और रनिंग अलाउंस व अन्य भत्तों के साथ अनुभवी लोको पायलट की कुल मासिक कमाई करीब ₹80 हजार से ₹1 लाख या उससे अधिक हो सकती है.
ट्रेन चलाने की 3 नौकरियां, लेकिन सैलरी में बड़ा अंतर
Train drivers salary: भारत में रेलवे और मेट्रो का नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है. इसी के साथ ट्रेन चलाने वाली नौकरियों को लेकर युवाओं की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. भारतीय रेलवे में लोको पायलट से लेकर अलग-अलग शहरों में मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर तक कई पद हैं, वहीं मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ देश में बुलेट ट्रेन का सपना भी धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि लोको पायलट, मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर और बुलेट ट्रेन ड्राइवर में किसकी सैलरी सबसे ज्यादा होती है? तीनों नौकरियों में ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी जरूर होती है, लेकिन इनके वेतन, काम की प्रकृति, पद और करियर ग्रोथ में काफी अंतर है.
भारतीय रेलवे में ट्रेन चलाने वाले कर्मचारी को आम तौर पर लोको पायलट कहा जाता है. हालांकि कोई उम्मीदवार सीधे लोको पायलट के पद पर भर्ती नहीं होता. करियर की शुरुआत आमतौर पर असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद से होती है. ALP का शुरुआती बेसिक पे ₹19,900 है, जो 7वें वेतन आयोग के Pay Level-2 में आता है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, रनिंग अलाउंस और दूसरे भत्ते भी मिलते हैं. अनुभव और प्रमोशन के साथ कर्मचारी वरिष्ठ लोको पायलट समेत ऊंचे पदों तक पहुंच सकता है. खास बात यह है कि लोको पायलट की कुल कमाई सिर्फ बेसिक पे पर निर्भर नहीं करती. रनिंग ड्यूटी और अलग-अलग भत्तों की वजह से अनुभवी लोको पायलट की मासिक कमाई करीब ₹80 हजार से ₹1 लाख या उससे अधिक तक पहुंच सकती है.
मेट्रो ट्रेन चलाने वाले कर्मचारियों को आमतौर पर मेट्रो ट्रेन ऑपरेटर कहा जाता है. हालांकि इनकी सैलरी पूरे देश में एक जैसी नहीं होती. संबंधित मेट्रो निगम, पद, ग्रेड और कर्मचारी के अनुभव के आधार पर वेतन में अंतर हो सकता है. शुरुआती स्तर पर मेट्रो ऑपरेटर की सैलरी करीब ₹30 हजार से ₹40 हजार प्रति माह के आसपास हो सकती है. अनुभव और प्रमोशन के बाद कमाई ₹70 हजार से ₹90 हजार या उससे अधिक तक पहुंच सकती है. इसलिए मेट्रो ऑपरेटर की कमाई को किसी एक तय आंकड़े से समझना सही नहीं होगा. अलग-अलग मेट्रो कंपनियों की भर्ती और वेतन संरचना अलग हो सकती है.
बुलेट ट्रेन को लेकर युवाओं में सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात की है कि इसे चलाने वाले ड्राइवर को कितनी सैलरी मिलेगी. भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है. लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. भारत में अभी बुलेट ट्रेन का नियमित यात्री संचालन शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में बुलेट ट्रेन ड्राइवर के लिए भारतीय रेलवे के लोको पायलट की तरह कोई स्थापित नियमित भारतीय वेतनमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है. यही वजह है कि इंटरनेट पर बुलेट ट्रेन ड्राइवर की सैलरी को लेकर बताए जाने वाले अलग-अलग आंकड़ों को पक्की सरकारी सैलरी मानना सही नहीं होगा. परियोजना के संचालन और संबंधित पदों की नियुक्ति व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही वेतन को लेकर ज्यादा ठोस जानकारी सामने आएगी.
अगर मौजूदा उपलब्ध जानकारी की बात करें तो अनुभवी भारतीय रेलवे लोको पायलट की कुल मासिक कमाई ₹80 हजार से ₹1 लाख या उससे अधिक तक पहुंच सकती है. मेट्रो ऑपरेटर की कमाई अनुभव और संबंधित मेट्रो निगम के आधार पर करीब ₹70 हजार से ₹90 हजार या उससे अधिक तक पहुंच सकती है. वहीं, बुलेट ट्रेन ड्राइवर की भारतीय वेतन व्यवस्था अभी नियमित रूप से स्थापित नहीं हुई है. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि तीनों में बुलेट ट्रेन ड्राइवर की सैलरी सबसे ज्यादा होगी. यानी अगर कोई युवा इन नौकरियों को करियर के तौर पर देख रहा है तो सिर्फ सैलरी के आंकड़े के आधार पर फैसला लेने के बजाय भर्ती योग्यता, परीक्षा, ट्रेनिंग, ड्यूटी का स्वरूप, प्रमोशन और संबंधित संस्था के वेतन ढांचे को भी समझना जरूरी है.
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