Abhijit Dipke and Manoj Jarange Meeting: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा रहा है. जालना के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे पाटील की भूख हड़ताल जारी है और आंदोलन के अगले चरण को लेकर समर्थकों की नजर अब मुंबई की ओर है. इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की जरांगे से मुलाकात ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है.
अभिजीत दिपके शुक्रवार को अंतरवाली सराटी पहुंचे और उन्होंने मनोज जरांगे से मुलाकात की. दिपके पहले ही मराठा आरक्षण आंदोलन के समर्थन में अपना रुख साफ कर चुके हैं. उनका कहना है कि जरांगे की मांग गलत नहीं है और सरकार को बातचीत के जरिए इस मुद्दे का रास्ता निकालना चाहिए.
क्यों खास है जरांगे-दिपके की मुलाकात?
इस मुलाकात को सिर्फ एक सामान्य मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसकी एक वजह दोनों नेताओं के आंदोलनों के बीच पहले से बना जुड़ाव भी है. बताया गया है कि जब अभिजीत दिपके आंदोलन कर रहे थे, तब मनोज जरांगे उनके समर्थन में दिल्ली पहुंचे थे. अब दिपके का अंतरवाली सराटी पहुंचकर जरांगे से मिलना इस रिश्ते को एक नया राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ देता है. जरांगे की प्रमुख मांग मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी प्रमाण-पत्र और उससे जुड़े अधिकार दिलाने की है. सरकार की ओर से कुनबी रिकॉर्ड और प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को लेकर कदम उठाने की बात कही गई है लेकिन आंदोलनकारी पक्ष अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। यही वजह है कि जरांगे का अनशन लगातार जारी है.
मुंबई कूच पर भी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आंदोलन का अगला पड़ाव क्या होगा? जरांगे पहले ही मुंबई में आंदोलन की बात कह चुके हैं. अंतरवाली सराटी में समर्थकों के जुटने के बाद 12 सितंबर को आगे की रणनीति पर फैसला होने की उम्मीद है. इसी दौरान मुंबई कूच की तारीख को लेकर भी तस्वीर साफ हो सकती है. जरांगे का कहना है कि वह सरकार के प्रतिनिधिमंडल का इंतजार नहीं कर रहे हैं और आंदोलन अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ेगा. ऐसे में दिपके की मुलाकात के बाद उनका रुख क्या रहता है और 12 सितंबर को क्या रणनीति बनती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं. अगर मुंबई में आंदोलन पहुंचता है, तो महाराष्ट्र की सियासत पर इसका असर और तेज हो सकता है.
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