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असम बना चुनावी रणभूमि, ‘मियां’ से ‘लव जिहाद’ तक चुनाव में गरमाए ये मुद्दे, कौन से मुद्दे मारेंगे बाजी?

असम विधानसभा चुनाव 2026 में आम विकास मुद्दों के साथ ही मियां, लव जिहाद और जमीन अतिक्रमण की राजनीति भी चर्चा में है. बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में इन मुद्दों पर कानून बनाने का जिक्र भी किया है.

Assam Assembly Elections 2026: असम में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हैं. ये चुनाव एक ही चरण में होंगे. 4 मई को वोटों की गिनती की जाएगी. इस बार विधानसभा चुनाव में मियां राजनीति, लव जिहाद और जमीन जैसे राजनीतिक मुद्दों ने जोर पकड़ा हुआ है. मंगलवार को BJP ने अपना असम घोषणापत्र जारी किया, तो उसकी मुख्य बातें बड़ी, जानी-पहचानी और मापने लायक थीं. इनमें 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश, दो लाख नौकरियां, कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार, बाढ़ नियंत्रण और राज्य को भारत का “पूर्वी द्वार” बनाने का एक रोडमैप था. 

इसके साथ ही चुनाव के बेहद चर्चित मुद्दे भी थे. इनमें तीन महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की घोषणा थी. साथ ही लव जिहाद और “लैंड जिहाद” के खिलाफ़ और भी कड़े कानून लाने और अवैध घुसपैठ के खिलाफ़ कार्रवाई तेज़ करने जैसी घोषणाएं शामिल थीं. हालांकि इनमें सबसे बड़ा सवाल ये है कि असम के लोगों को कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा पसंद आएंगे, जिनके बेस पर वो वोट देंगे?

आजमाए फॉर्मूले पर काम कर रही बीजेपी

बीजेपी ने बेरोकटोक आर्थिक विकास का एक बहुत बड़ा वादा किया है, जिसे हिंदुत्व की राजनीति की एक कठोर और अडिग नींव पर खड़ा किया गया है. यह एक ऐसी राजनीतिक सोच को दिखाता है जो डेटा, पिछले चुनावों के नतीजों और असम के चुनावी नक्शे में हुए ढांचागत बदलावों पर आधारित है. BJP सिर्फ़ चुनाव प्रचार ही नहीं कर रही है, बल्कि वह एक आजमाए हुए फ़ॉर्मूले पर काम कर रही है. ये एक एक ऐसा फ़ॉर्मूला है, जिसने बार-बार वोटों की मामूली बढ़त को सीटों की निर्णायक जीत में बदला है.

साल 2011 में खराब थी हालत

बता दें कि साल 2011 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी असम की एक छोटी-सी पार्टी हुआ करती थी. 2011 में बीजेपी को केवल पांच सीटें मिली थीं. पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने चुनावों में अपना दबदबा बनाए रखा था; उसे 78 सीटें मिली थीं. हालांकि साल 2016 के चुनाव में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला BJP ने सत्ता-विरोधी लहर और रणनीतिक क्षेत्रीय गठबंधनों का फ़ायदा उठाते हुए 60 सीटें जीतीं. उसने कांग्रेस को सफलतापूर्वक सत्ता से हटा दिया और सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई.

2021 में असम में मजबूत पकड़

2021 तक BJP ने राज्य में अपनी स्थिति मजबूत की. उसने अपनी 60 सीटें बरकरार रखीं और अपना वोट शेयर बढ़ाया. जब इसमें उसके नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के सहयोगियों के वोट भी जोड़े गए, तो गठबंधन ने आसानी से 75 सीटें हासिल कर लीं. 2021 की जीत के बारे में जो बात सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है, वो है BJP की चुनावी रणनीति की ज़बरदस्त कुशलता. NDA और विपक्षी ‘महाजोत’ के कुल वोट शेयर में महज़ एक प्रतिशत का बहुत ही मामूली अंतर था. NDA को 45 फीसदी वोट मिले जबकि विपक्ष को 44 फीसदी वोट मिले. इसके बावजूद इस छोटे से अंतर के चलते सत्ताधारी गठबंधन को 25 सीटों की भारी बढ़त मिली. इससे यह साबित होता है कि असम में चुनावों का फैसला अक्सर किसी जबरदस्त ‘लोकप्रिय लहर’ से ज़्यादा, गठबंधनों के सटीक गणित और वोटों के सही बंटवारे से होता है. वहीं BJP की मौजूदा रणनीति ठीक इसी तर्क के इर्द-गिर्द बनाई गई है. 

7.41 लाख करोड़ रुपये पहुंचा GSDP

इस रणनीति का पहला स्तंभ विकास है और यहां पार्टी ने आंकड़ों के आधार पर एक नैरेटिव तैयार किया है. घोषणापत्र और चुनावी प्रचार के संदेशों के अनुसार, असम का GSDP 2015-16 में 2.24 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 7.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है. पिछले चार सालों में प्रति व्यक्ति आय में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. कल्याणकारी योजनाओं का दायरा काफ़ी बढ़ा है, अब 81 फीसदी से ज्यादा परिवार पीने के पानी की योजनाओं से जुड़े हुए हैं. असम में मियां, लव जिहाद और जमीन की राजनीति का मुद्दा भी जोरों पर है. आइए जानते हैं इसका अर्थ…

असम में मियां शब्द की राजनीति

असम में मियां शब्द ऐतिहासिक रूप से बंगाली मूल के मुस्लिम समुदाय, खासकर ब्रह्मपुत्र घाटी में बसे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. कुछ लोग इसे सांस्कृतिक पहचान मानते हैं. हालांकि राजनीति में ये शब्द अक्सर बाहरी बनाम मूलनिवासियों से जोड़ा जाता है. चुनाव के समय ये मुद्दा इसलिए उठाया जाता है क्योंकि जनसंख्या संतुलन, नागरिकता और घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक मुद्दे रहे हैं. 

असम में लव जिहाद की राजनीति

असम में लव जिहाद की चर्चा जोरों पर रहती है. कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों का दावा है कि लोग धार्मिक पहचान बदलने के उद्देश्य से शादी कर रहे हैं. इस बार के मुद्दों में  अंतरधार्मिक विवाह और धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर कानून बनाने और कार्रवाई की बात कही गई है. वहीं इस कानून का समर्थन करने वाले लोग इसे महिलाओं की सुरक्षा के बारे में बताते हैं. वहीं इस कानून का विरोध करने वाले लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता बताते हैं.

असम में जमीन की राजनीति

असम में चुनाव के दौरान जमीन का मुद्दा बार-बार चर्चा में आता है. कहा जा रहा है कि घुसपैठिये सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर वहां बसावट करते हैं. इसके साथ ही वे जंगल और नदी किनारे की जमीन पर भी कब्जा कर रहे हैं. सरकार ने कई जगहों पर इसे हटाने की कार्रवाई भी की है. सरकार का कहना है कि ये भूमि संरक्षण और मूल निवासियों के अधिकार के लिए जरूरी है.

Deepika Pandey

दीपिका पाण्डेय साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने 2020 में BJMC की डिग्री हासिल की. करियर की शुरुआत खबर टुडे न्यूज, DNP News और दैनिक खबर जैसे प्लेटफॉर्म्स से बतौर एंकर और कंटेंट राइटर की. उन्होंने क्राइम, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, ऑटो-टेक और करेंट अफेयर्स पर काम किया है. इसके बाद हरिभूमि वेबसाइट में दिल्ली-NCR और नेशनल बीट कवर की. वर्तमान में वह इंडिया न्यूज में सीनियर कॉपी राइटर हैं. उनकी विशेषज्ञता क्राइम और एंटरटेनमेंट, बॉलीवुड, हॉलीवुड और भोजपुरी के साथ पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, वायरल न्यूज, ह्यूमन इंटरेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज में है.

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