Omar Abdullah Cabinet: जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार में मंगलवार को चार नए चेहरों की एंट्री हुई. श्रीनगर में आयोजित समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने चार विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. इस विस्तार के साथ ही सरकार के मंत्रिमंडल में सभी नौ पद भर गए हैं. समारोह में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
शपथ ग्रहण कार्यक्रम श्रीनगर के चश्मा शाही स्थित लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया. इस फैसले के बाद सरकार के सामने अब प्रशासन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों पर तेजी से काम करने की जिम्मेदारी होगी.
इन चार नेताओं को मिली जगह
उमर सरकार में शामिल किए गए चारों मंत्री नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हैं. इनमें खानयार विधानसभा सीट से विधायक अली मोहम्मद सागर का नाम प्रमुख है. वह सात बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और पार्टी के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं. इसके अलावा हब्बा कदल से विधायक शमीमा फिरदौस को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है. कुपवाड़ा जिले की त्रेहगाम सीट से विधायक मीर सैफुल्लाह और अनंतनाग जिले के पहलगाम से विधायक अल्ताफ अहमद वानी, जिन्हें अल्ताफ कालू के नाम से भी जाना जाता है, ने भी मंत्री पद की शपथ ली. इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अपने अनुभवी नेताओं के साथ अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में शामिल किया है.
उमर अब्दुल्ला समेत अब कुल नौ मंत्री
चार नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में कुल नौ सदस्य हो गए हैं. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत तक सीमित है. 90 सदस्यीय विधानसभा के लिहाज से यह संख्या नौ होती है. इससे पहले उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के साथ सकीना इटू, जावेद राणा और जावेद अहमद डार मंत्रिमंडल में शामिल थे. नए विस्तार के बाद ये सभी अपने पदों पर बने रहेंगे.
जनता की शिकायतों पर रहेगा जोर
कैबिनेट विस्तार का मकसद प्रशासनिक कामकाज को गति देना और आम लोगों की समस्याओं के समाधान को बेहतर बनाना बताया जा रहा है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों के चयन में अनुभव और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा गया. अब मंत्रिमंडल के सभी पद भरने के बाद सरकार के सामने विभिन्न विभागों के कामकाज में तालमेल बनाने, विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और जनता की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने की चुनौती होगी.
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