डॉक्टर टी के लाहिड़ी को लोग असली भगवान कहते हैं. उन्होंने निस्वार्थ भाव से मानव सेवा की. उन्होंने मानव सेवा के लिए न ही शादी की और न ही विदेश गए. उन्हें विदेश से काफी ऑफर्स मिले, जिन्हें उन्होंने ठुकरा दिया.
Doctor Tapan Kumar Lahiri
Padma Shri Dr TK Lahiri: डॉ. टी.के. लाहिड़ी यानी तपन कुमार लाहिड़ी को लोग भगवान का दूसरा रूप मानते हैं. वे एस साधारण डॉक्टर हैं, जिन्होंने निस्वार्थ सेवा भाव से गरीबों की सेवा के लिए पूरा जिंदगी समर्पित कर दी. वे वर्तमान समय में 85 साल के हैं और गरीबों की सेवा के खातिर उन्होंने कभी शादी नहीं की. विदेश की आकर्षक नौकरियों का ऑफर भी ठुकरा दिया. उन्होंने अपनी जिंदगी में मिलने वाली पूरी सैलेरी और पेंशन भी दान कर दी. बीएचयू से रिटायर होने के बाद भी मुफ्त इलाज जारी रखा क्योंकि डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना उनका पेशा ही नहीं बल्कि मानवता की सेवा है. उन्होंने खुद से वादा किया था कि वे अपनी आखिरी सांस तक लोगों का इलाज करेंगे. वे अपने इसी वायदे पर कायम हैं.
डॉक्टर तपन कुमार लाहिड़ी ने अपनी पूरी जिंदगी गरीबों की सेवा में लगा दी, लोग उन्हें ‘असली भगवान’ कहते हैं. उन्हें विदेशों से बहुत नौकरियों के काफी अच्छे प्रस्ताव मिले लेकिन उन्होंने उन सभी प्रस्तावों को ठुकरा दिया. उनका कहना था कि वे अपने मरीजों की देखभाल में कोई बाधा नहीं आने देना चाहते. उन्होंने गरीब मरीजों की सेवा के खातिर शादी नहीं की और अपने मरीजों के प्रति समर्पित रहे.
बता दें कि डॉक्टर लाहिड़ी ने 1994 से अपनी पूरी सैलेरी और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन तक जरूरतमंदों के लिए दान कर दिया. वे 2003 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से रिटायर हो गए. इसके बाद आज भी वे वहां पर मुफ्त इलाज कर रहे हैं. उन्होंने ये साबित किया है कि उनके लिए डॉक्टरी एक पेशा नहीं बल्कि जीवन भर की सेवा है. उनके इस सेवा भाव के लिए उन्हें 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
बता दें कि डॉक्टर तपन कुमार लाहिड़ी का जन्म कोलकाता में हुआ. उन्होंने सन 1969 में हृदय की शल्यचिकित्सा में इंग्लैण्ड के रॉयल क्कोलेज ऑफ सर्जन्स से फेलोशिप की. 1972 में उसी संस्थान से कार्डियोलॉजी सर्जरी में M.ch किया. इसके बाद उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में पढ़ाना शुरू किया. यहां उन्होंने हृद्वक्ष विभाग में रीडर, सहायक प्राध्यापक, प्राध्यापक, और विभागाध्यक्ष के तौर पर काम किया.
इसके बाद साल 2003 में वो सेवानिवृत्त हुए और उसके बाद वे अतिथि प्राध्यापक नियुक्त हुए. हालांकि इसके लिए वो कोई सैलेरी नहीं लेते थे. वे मानव सेवा के लिए अपनी सेवाएं मुफ्त में देने लगे. 2016 में मानव सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
Today panchang 2 February 2026: आज 1 फरवरी 2026, सोमवार का दिन हिंदू पंचांग के…
बजट 2026 में विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए फंड भेजने पर लगने वाले…
अगर इस रोज डे आप किसी को गुलाब देना चाहते हैं, तो सबसे पहले ये…
करीना कपूर ने अपनी लेटेस्ट अपीयरेंस में सफेद ऑउटफिट पहनकर क्लास और ग्रेस का शानदार…
ICC T20 WC 2026: भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में 7 फरवरी से शुरू…
अखिलेश यादव ने बजट 2026-27 को 'अपमानजनक' बताते हुए कहा कि भाजपा केवल अपने करीबी…