पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहा है. भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए ISI अब सीक्रेट मैसेजिंग ऐप्स, फर्जी इंटरनेशनल नंबरों और आपत्तिजनक ऐप्स का सहारा ले रही है. हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने ISI के इस नए ‘डिजिटल जाल’ को समय रहते बेनकाब कर दिया है.
केंद्रीय जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अब ऐसी मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट्स का सहारा लिया जा रहा है जो पहचान छुपाने और गुप्त संचार में मदद करती हैं. इस नेटवर्क में कुछ आपत्तिजनक सामग्री वाली ऐप्स भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल ध्यान भटकाने और संपर्क साधने के लिए किया जा रहा है.
पहचान छुपाने के लिए एनक्रिप्टेड ऐप्स का सहारा
इन ऐप्स को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि भारतीय जांच एजेंसियों से मैसेज भेजने वाले और पाने वाले दोनों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जा सके. आतंकी संगठन अपने डेटा को सुरक्षित और सीक्रेट कोड्स के जरिए ट्रांसफर करने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे हैं.
वर्चुअल सिम और ‘कोनियन’ ऐप पर शिकंजा
जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने पाया कि भारत में प्रतिबंधित ‘कोनियन’ ऐप जैसी एनक्रिप्टेड फाइल सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है. इसके अलावा, विदेशी कंपनियों के वर्चुअल सिम कार्ड और बिना सिम कार्ड के काम करने वाली खास ऐप्स (APK आधारित) के जरिए डेटा का आदान-प्रदान किया जा रहा है.
एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि कंप्यूटर और विशेष विदेशी सॉफ्टवेयर्स की मदद से फर्जी अंतरराष्ट्रीय फोन नंबर तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बिना किसी फिजिकल सिम के मोबाइल में एक्टिवेट कर लिया जाता है.
चीन और वियतनाम की ऐप्स पर पैनी नजर
वर्चुअल सिम और संदिग्ध कम्युनिकेशन नेटवर्क का सुराग मिलने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं. इस नए डिजिटल थ्रेट को देखते हुए चीन और वियतनाम से जुड़ी कई विदेशी एप्लीकेशन और सर्वर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि देश की सुरक्षा में सेंध लगाने की किसी भी कोशिश को वक्त रहते नाकाम किया जा सके.