Param Bir Singh: मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को बांद्रा स्थित लीलावती अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के कार्यकारी निदेशक पद से हटा दिया गया है. जानिए क्या है इसके पीछे की वजह.
परमबीर सिंह के बारे में
Param Bir Singh Case: बीते दिनों मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का लीलावती अस्पताल में कार्यकारी निदेशक के पद से अचानक तबादला कर दिया गया. इस खबर के आते ही हलचल मच गई थी. सवाल उठने लगे कि परमबीर सिंह को हॉस्पिटल से क्यों निकाला गया? अब लीलावती हॉस्पिटल के ट्रस्टी राजीव मेहता ने इंडिया न्यूज से खास बात चीत में इसकी वजह बताई है.
लीलावती हॉस्पिटल के ट्रस्टी राजीव मेहता ने इंडिया न्यूज से खास बात चीत में परमबीर सिंह को हॉस्पिटल से हटाने के पीछे का कारण बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि परमबीर सिंह हॉस्पिटल को हड़पना चाहते थे उन्होंने कई लोगों को गुमराह कर उनसे दस्खत भी करवाए, लेकिन समय रहते यह सब कुछ हॉस्पिटल के सभी ट्रस्टियों को पता चल गया इस वजह से उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया.
परमबीर सिंह का जन्म 1964 में चंडीगढ़ में हुआ था। उन्होंने 1983 में पंजाब विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1988 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो गए. आईपीएस अधिकारी के रूप में, परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र में कुछ सबसे प्रमुख पदों पर कार्य किया है – जैसे ठाणे के पुलिस आयुक्त, चंद्रपुर और भंडारा के माओवादी गढ़ में पुलिस अधीक्षक, मुंबई में पुलिस उपायुक्त (जांच), मुंबई के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था). परमबीर सिंह जून 2022 में सेवा से सेवानिवृत्त हुए और पिछले साल जुलाई में मुंबई के प्रसिद्ध लीलावती अस्पताल के कार्यकारी निदेशक के रूप में नियुक्त हुए.
साल 2021 में एक मामले की वजह से परमबीर सिंह का राज्य सरकार से सीधा सामना हुआ था. दक्षिण मुंबई के कारमाइकल रोड पर उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास खड़ी एक एसयूवी में 20 जिलेटिन स्टिक पाई गई थी. इस वजह से महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने परमबीर सिंह को एंटिलिया बम कांड की जांच में हुई चूक के कारण गृह सुरक्षा विंग के महानिदेशक के पद पर स्थानांतरित कर दिया. इससे भड़के हुए परमबीर सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर देशमुख पर आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि अनिल देशमुख ने पुलिस अधिकारियोंको मुंबई के 1,750 बार और रेस्तरां से हर महीने 40-50 करोड़ रुपये सहित कुल 100 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया था. इस बात से हंगामा मच गया था.
परमबीर सिंह ने 26/11 मुंबई हमलों के दौरान ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल में आतंकवादियों का सामना किया था. वे तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे के साथ काम कर रहे थे, जिन्होंने 2008 के मालेगांव विस्फोटों की जांच का नेतृत्व किया था और मुंबई हमलों के दौरान कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो गए थे.
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