PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर योजना के तहत घर की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने वाले पात्र परिवारों को केंद्रीय सब्सिडी मिल सकती है. 1 किलोवाट पर ₹30,000, 2 किलोवाट पर ₹60,000 और 3 किलोवाट या उससे अधिक सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है. सोलर सिस्टम से घर की बिजली जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है और बिजली बिल में बचत हो सकती है.
AC-कूलर चलाने पर बिजली बिल की टेंशन होगी कम!
PM Surya Ghar Yojana: हर महीने आने वाला बिजली का बिल अगर आपके बजट को बिगाड़ देता है, तो घर की छत पर सोलर पैनल लगवाना आपके लिए फायदेमंद विकल्प हो सकता है. सोलर पैनल की मदद से घर की जरूरत की बिजली का एक हिस्सा खुद तैयार किया जा सकता है. इससे ग्रिड से ली जाने वाली बिजली कम हो सकती है और बिजली बिल में भी बड़ी बचत संभव है. केंद्र सरकार देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम सूर्य घर योजना चला रही है. इसके तहत पात्र परिवारों को घर की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी दी जाती है. इसका मकसद घरों को अपनी बिजली का कुछ हिस्सा खुद पैदा करने में सक्षम बनाना और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.
योजना के तहत सोलर सिस्टम की क्षमता के हिसाब से सब्सिडी का प्रावधान है. 1 किलोवाट सिस्टम पर ₹30,000, जबकि 2 किलोवाट पर ₹60,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी मिल सकती है. वहीं 3 किलोवाट या उससे ज्यादा क्षमता वाले सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक की सब्सिडी का प्रावधान है. इससे सोलर पैनल लगवाने की शुरुआती लागत का बोझ कम हो सकता है. हालांकि, सिस्टम की कुल कीमत, अतिरिक्त खर्च और उपलब्ध अन्य राज्य स्तरीय लाभ अलग-अलग हो सकते हैं.
पीएम सूर्य घर योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले इसके आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन करना होता है. आवेदन के दौरान अपने राज्य और बिजली वितरण कंपनी यानी DISCOM की जानकारी देनी होती है. इसके बाद बिजली कनेक्शन से जुड़ी जानकारी भरकर योजना में उपलब्ध अधिकृत वेंडर का चयन किया जाता है. चयनित वेंडर आपके घर की छत पर सोलर सिस्टम स्थापित करता है.
सोलर सिस्टम लगने के बाद DISCOM की ओर से निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसके बाद नेट मीटर से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होती है. निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी को सब्सिडी उसके बैंक खाते में भेजी जाती है. नेट मीटरिंग की सुविधा के जरिए जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है. इससे सोलर सिस्टम की क्षमता और घर की बिजली खपत के आधार पर बिजली बिल में और बचत हो सकती है.
इस योजना का लाभ लेने के लिए घर में ग्रिड-कनेक्टेड बिजली कनेक्शन होना जरूरी है. साथ ही छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त और उपयुक्त जगह भी होनी चाहिए. सिस्टम की स्थापना योजना के तहत निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत वेंडर के माध्यम से करानी होती है. सोलर सिस्टम लगने के बाद DISCOM के सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने पर ही सब्सिडी जारी की जाती है. सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल में काफी कमी आ सकती है, लेकिन हर उपभोक्ता का बिल पूरी तरह जीरो हो, यह जरूरी नहीं है. यह आपके घर की बिजली खपत, सोलर सिस्टम की क्षमता, मौसम, नेट मीटरिंग और स्थानीय बिजली नियमों पर निर्भर करता है. इसलिए सोलर लगवाने से पहले अपनी औसत बिजली खपत के हिसाब से सिस्टम की क्षमता तय करना जरूरी है.
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