<
Categories: देश

दिल्ली में निजी स्कूल नहीं वसूल सकेंगे मनमानी फीस, नया कानून हुआ लागू

दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस नियमन के लिए नया कानून लागू हुआ है. हालांकि, निजी स्कूलों की फीस पर सीमा लगाने या उसे विनियमित करने का प्रयास करने वाली दिल्ली पहली सरकार नहीं है, इससे पहले भी तमिलनाडु, राजस्थान सहित कई राज्य सरकारें इस पर कानून बना चुकी हैं.

Education: दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस नियमन के लिए नया कानून लागू हुआ है. उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस निर्धारण और नियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को पिछले सप्ताह अधिसूचित किया गया, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में फीस विनियमन का नया दौर शुरू हो गया है. 
यह कानून फीस वृद्धि की ऑडिट के लिए तीन स्तरीय समिति संरचना अनिवार्य करता है, जो वर्षों से अभिभावक संगठनों और निजी स्कूलों के बीच मनमानी शुल्कों को लेकर चले विवाद के बाद आया है.​

स्वायत्तता बनाम मुनाफाखोरी

भारत में निजी स्कूलों की फीस के नियमन में सर्वोच्च न्यायालय के दो निर्णयों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है. ऐतिहासिक टीएमए पाई फाउंडेशन (2002) मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को अपनी फीस संरचना निर्धारित करने की स्वायत्तता है. हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह स्वायत्तता पूर्ण नहीं है: स्कूलों को विकास के लिए “उचित अधिशेष” प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन “मुनाफाखोरी” और “प्रति छात्र शुल्क” सख्त वर्जित हैं. यह अधिशेष संस्थान के विस्तार और सुविधाओं के सुधार के लिए है, जिससे शिक्षा को विशुद्ध रूप से व्यावसायिक गतिविधि से अलग किया जा सके.
बाद में मॉडर्न स्कूल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2004) मामले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए शुल्क को विनियमित करने का अधिकार है। इसी कानूनी दायरे में राज्यों ने अपने कानून बनाए हैं.

तमिलनाडु का राज्य-केंद्रित मॉडल

तमिलनाडु ने 2009 में तमिलनाडु स्कूल्स (फीस संग्रह नियमन) अधिनियम लागू कर शुरुआती कदम उठाया, जो सबसे कठोर मॉडल है. शिकायतों की प्रतीक्षा करने के बजाय, सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में राज्य द्वारा नियुक्त एक समिति राज्य के प्रत्येक निजी स्कूल के लिए तीन साल के लिए वैध शुल्क निर्धारित करती है. हालांकि यह पूर्ण राज्य नियंत्रण देता है, लेकिन मुकदमेबाजी में फंसा रहा है, क्योंकि निजी स्कूल दावा करते हैं कि समिति शिक्षक वेतन वृद्धि जैसी जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज करती है और बड़ी संख्या में स्कूलों की जांच से नौकरशाही बाधा उत्पन्न होती है. राज्य में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों ने 2012 में सर्वोच्च न्यायालय से एक अंतरिम आदेश प्राप्त किया, जिससे समिति की फीस तय करने की शक्ति पर प्रभावी रूप से रोक लग गई. परिणामस्वरूप, जहां राज्य बोर्ड के स्कूल विनियमित हैं, वहीं कई केंद्रीय बोर्ड के स्कूल अपेक्षाकृत स्वतंत्रता के साथ संचालित होते हैं, जिससे असमानताएं पैदा होती हैं.

गुजरात का ‘हार्ड कैप’ मॉडल

2017 में गुजरात ने गुजरात स्व-वित्तपोषित स्कूल (फीस नियमन) अधिनियम लाया, जो फीस पर मुद्रा सीमा लगाता है—प्राथमिक के लिए 15,000 रुपये, माध्यमिक के लिए 25,000 रुपये और उच्च माध्यमिक के लिए 27,000 रुपये. इससे अधिक शुल्क वसूलने वाले स्कूलों को ऑडिटेड खाते जमा कर फीस नियामक समिति से अनुमति लेनी पड़ती है. दिसंबर 2017 में निजी स्कूलों द्वारा चुनौती दिए जाने पर गुजरात उच्च न्यायालय ने अधिनियम की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन इसका कार्यान्वयन अड़चनों से भरा रहा है. इस वर्ष की शुरुआत में, गुजरात सरकार को प्रस्तावित “स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” योजना को लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिसमें शीर्ष प्रदर्शन करने वाले निजी स्कूलों को इन शुल्क नियमों से छूट देने का प्रस्ताव था. जनता के प्रतिरोध के बाद सरकार को इस योजना को स्थगित करना पड़ा. 

महाराष्ट्र और राजस्थान का सर्वसम्मति मॉडल

महाराष्ट्र और राजस्थान में शुल्क विनियमन का ऐसा मॉडल अपनाया जाता है जो राज्य के हस्तक्षेप से पहले आंतरिक सहमति पर काफी हद तक निर्भर करता है. महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्थान (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2011 के तहत, विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रस्तावित शुल्क संरचना को अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की कार्यकारी समिति द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है. यदि विद्यालय के प्रस्ताव और पीटीए की स्वीकृति में अंतर 15 प्रतिशत से कम है, तो विद्यालय का निर्णय मान्य होगा। सरकारी संभागीय शुल्क नियामक समिति के हस्तक्षेप के लिए, कुल अभिभावकों में से कम से कम 25 प्रतिशत की शिकायत दर्ज होनी चाहिए. राजस्थान का 2016 का अधिनियम भी इसी तरह लागू होता है, जिसमें अभिभावकों और शिक्षकों से मिलकर बनी विद्यालय स्तरीय शुल्क समिति का गठन किया गया है, हालांकि, इसका कार्यान्वयन सुस्त रहा है.

न्यायिक मिसालें

इन राज्य कानूनों की संवैधानिक वैधता को निजी स्कूल संघों द्वारा बार-बार चुनौती दी गई है, मुख्य रूप से इस आधार पर कि वे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) द्वारा गारंटीकृत किसी भी व्यवसाय का अभ्यास करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं. 2021 में, सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान अधिनियम की वैधता को बरकरार रखते हुए फैसला सुनाया कि राज्य को शुल्क को विनियमित करने का अधिकार है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे “उचित” हों लेकिन साथ-ही साथ निजी स्कूलों की स्वायत्ता का सम्मान भी बना रहे. 
दिल्ली के लिए तात्कालिक चुनौती न केवल अदालत में कानून का बचाव करना होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होगा कि नई जिला और पुनरीक्षण समितियों में पर्याप्त कर्मचारी हों और वे कार्य कर रही हों.

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

Recent Posts

Video: स्लोवाकिया तक पहुंचा बिहार का ठेकुआ, पीएम मोदी के खास तोहफे को देख खुश हो उठे स्लोवाक नेता

Richard Rasi: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्लोवाकिया यात्रा के दौरान स्लोवाक नेशनल काउंसिल के चेयरमैन…

Last Updated: July 14, 2026 23:59:30 IST

कोच छोड़ेंगे टीम इंडिया का साथ, IPL में ही करना चाहते हैं कोचिंग, क्यों चल रहे बीसीसीआई से नाराज

टीम इंडिया के सहायक कोच रयान टेन डोशेटे के भारतीय टीम का साथ छोड़ने की…

Last Updated: July 14, 2026 19:41:16 IST

सालों बाद साथ आए अक्षय कुमार-रवीना टंडन, अहमद खान ने खोला ‘वेलकम टू द जंगल’ का राज

Ahmed Khan: फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' में अक्षय कुमार और रवीना टंडन को एक…

Last Updated: July 14, 2026 18:48:13 IST

OTT Horror Thriller: दिन के उजाले में भी छूट जाएंगे पसीने! JioHotstar की यह सालभर पुरानी हॉरर थ्रिलर फिल्म देखने की हिम्मत है आपमें?

Isha Horror Movie: क्या चार दोस्त भूतिया हवेली का सच जान पाएंगे? जियोहॉटस्टार पर ट्रेंड…

Last Updated: July 14, 2026 17:10:05 IST

Silver Rate Today 14th July 2026: देश के शहरों में कितनी रही चांदी की कीमत, जानें यहां

Silver Rate Today 14th July 2026: चांदी खरीदने जा रहे हैं तो मंगलवार (14 जुलाई,…

Last Updated: July 14, 2026 15:37:58 IST

Gold Price Today 14 July 2026: दिल्ली से लेकर केरल तक क्या हैं सोने के ताजा रेट, नोट करें यहां

Gold Price Today 14 July 2026: सोने की कीमतों में मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को…

Last Updated: July 14, 2026 15:26:59 IST