Sukesh Chandrashekhar: सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर धोखाधड़ी करने के आरोप में 8 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई है. दिल्ली की एक अदालत ने ठग सुकेश चंद्रशेखर को सुप्रीम कोर्ट का जज होने का नाटक करने और एक दूसरे आपराधिक मामले से जुड़ी ज़मानत की कार्यवाही में दखल देने की कोशिश करने के लिए आठ साल की कठोर सज़ा सुनाई है. जानकारी के अनुसार, तीस हज़ारी कोर्ट की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा ने 29 अगस्त को सज़ा का आदेश दिया, जो रविवार को सामने आया. अदालत ने आदेश दिया कि एक के बाद एक तीन अपराधों के लिए सज़ा भुगतनी होगी.
तीन अलग-अलग धाराओं में सुनाई गई सजा
धारा 170 के तहत सुकेश चंद्रशेखरन को 2 साल की कठोर जेल और 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा. इसके अलाना धारा 189 के तहत 2 साल की कठोर जेल और 5,000 रुपये जुर्माना देना होगा. इसके अलाना धारा 507 के तहत 4 साल की कठोर जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी. वहीं अगर सुकेश जुर्माने की रकम नहीं भरता है तो उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि हिरासत में पहले से बिताया गया समय उसकी सजा में से कम किया जाएगा.
क्या है मामला?
यह मामला साल 2017 का है. आरोप है कि 28 अप्रैल 2017 को सुकेश ने ज्यूडिशियल ऑफिसर पूनम चौधरी को फोन किया था. उसने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताया और अपनी पहचान असली दिखाने के लिए दक्षिण भारत के एक जज की तरह क्षेत्रीय लहजे में बात की. कोर्ट के मुताबिक, इन फोन कॉल्स का मकसद एक दूसरे आपराधिक मामले में सुकेश की जमानत से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना था. अदालत ने माना कि उसने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के जज जैसे संवैधानिक पद की प्रतिष्ठा और अधिकार का इस्तेमाल कर न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश की.
नहीं मिली जमानत
सुकेश की ओर से कोर्ट में दलील दी गई थी कि उसकी कोशिश सफल नहीं हुई. वह ज्यूडिशियल ऑफिसर को धोखा नहीं दे पाया और उसे जमानत भी नहीं मिली, इसलिए उसके साथ नरमी बरती जानी चाहिए. हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि किसी अपराध की कोशिश असफल हो जाने से उसकी गंभीरता कम नहीं हो जाती.
व्यवहार पर भी जताई नाराजगी
सजा सुनाते समय अदालत ने ट्रायल के दौरान सुकेश के व्यवहार का भी जिक्र किया. कोर्ट के मुताबिक, उसने अपने किए पर सच्चा पछतावा नहीं दिखाया. इसके बजाय उसने शिकायत करने वाली ज्यूडिशियल ऑफिसर की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सजा का उद्देश्य एक कड़ा संदेश देना भी है, ताकि लोगों को पता रहे कि सरकारी और न्यायिक संस्थानों को प्रभावित करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा.
20 अगस्त को ठहराया गया था दोषी
सुकेश चंद्रशेखर को 20 अगस्त को IPC की धाराओं 170, 189 और 507 के तहत दोषी ठहराया गया था. ये धाराएं किसी दूसरे व्यक्ति का रूप धारण करने और धमकी देने जैसे अपराधों से जुड़ी हैं. सजा तय करते समय कोर्ट के सामने सुकेश के खिलाफ चल रहे दूसरे आपराधिक मामलों का भी जिक्र हुआ. हालांकि अदालत ने साफ किया कि वे सभी मामले अभी विचाराधीन हैं और उनमें कोई अंतिम सजा नहीं हुई है. इसलिए इस मामले में सजा तय करते समय उन मामलों को आधार नहीं बनाया जा सकता.