SC Judge on UAPA: सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने विकसित भारत 2047 को लेकर बड़ा बयान दिया है. दरअसल, वे बेंगलुरु में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने UAPA के तहत होने वाली गिरफ्तारियों पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इसके तहत बिना सोचे समझे की गई गिरफ्तारियां, जिसमें सजा की दर बहुत कम है. विकसित भारत का मॉडल नहीं हो सकतीं.
सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि यूएपीए का गलत इस्तेमाल हो रहा है. ये विकसित भारत का मॉडल नहीं हो सकता है.
SC Judge on UAPA: सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां ने रविवार (22 मार्च, 2026) ने विकसित भारत 2047 को लेकर बड़ा बयान दिया है. जिसको लेकर नई बहस छिड़ गई है. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के राजनीतिक कार्यपालिका के लक्ष्य के लिए बहस और असहमति के लिए ज्यादा गुंजाइश होनी चाहिए, बिना इन्हें अपराध माने और जाति-आधारित भेदभाव और दलितों पर होने वाले अत्याचारों में झलकने वाली ‘गहरी सामाजिक दरारों’ को मिटाना होगा.
बेंगलुरु में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि आतंकवाद-विरोधी कानून ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के तहत बिना सोचे-समझे की गई गिरफ्तारियां, जिनमें सज़ा की दर बहुत कम है, विकसित भारत का मॉडल नहीं हो सकतीं.
इसके अलावा, उन्होंने इस कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि विकसित भारत का मेरा मॉडल धन का समान वितरण और भारी असमानता का खत्म होना है. जो संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में भी एक लक्ष्य के तौर पर तय किया गया है. विकसित भारत में न्यायपालिका को न्यायपालिका ही रहना चाहिए. वह हमेशा आलोचना करने वाली या सिर्फ तारीफ करने वाली नहीं हो सकती.
UAPA के तहत सजा की कम दर इस बात का संकेत है कि कानून का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है. UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए लोगों के 2019 से 2023 तक के आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन सज़ा की औसत दर लगभग 5% ही रही है. यह लगातार कम सजा की दर को दिखाता है.
इसके अलावा, उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह इस बात का संकेत है कि कई गिरफ्तारियां समय से पहले की गई थीं और उनके समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं थे. जब सज़ा की सामान्य दर 5% या उससे भी कम है और UAPA के 95% से ज़्यादा मामलों में लोग बरी हो जाते हैं, तो किसी आरोपी को उसके खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल किए बिना ही जेल में क्यों रखा जाना चाहिए? यह विकसित भारत का मॉडल नहीं हो सकता.
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