Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं हो सकता.
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वो अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं हो सकता. जस्टिस पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता वाली दो-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण के परिणामस्वरूप अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है. आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के 30 अप्रैल, 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए, पीठ ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 द्वारा यह स्थिति स्पष्ट कर दी गई है.
पीठ ने कहा, “संविधान या संसद या राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम के तहत कोई भी वैधानिक लाभ, सुरक्षा, आरक्षण या अधिकार उस व्यक्ति द्वारा दावा नहीं किया जा सकता, और न ही उसे दिया जा सकता है, जिसे खंड 3 (1950 के आदेश का) के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता है. यह रोक पूर्ण है और इसमें कोई अपवाद स्वीकार्य नहीं है. कोई भी व्यक्ति एक ही समय में खंड 3 में निर्दिष्ट धर्म के अलावा किसी दूसरे धर्म को मान और उसका पालन नहीं कर सकता, और साथ ही अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा भी नहीं कर सकता.”
“याचिकाकर्ता का यह मामला नहीं है कि उसने ईसाई धर्म से वापस अपने मूल धर्म में धर्मांतरण कर लिया है, या उसे ‘मादिगा’ समुदाय में वापस स्वीकार कर लिया गया है. इसके विपरीत, साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि अपीलकर्ता ने ईसाई धर्म को मानना जारी रखा है और एक दशक से अधिक समय से पादरी के रूप में कार्य कर रहा है, इसके अलावा गांव के घरों में नियमित रूप से रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करता है.” आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के सामने यह मामला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 2015 के तहत अक्काला रामी रेड्डी और अन्य के खिलाफ एक शिकायत से उत्पन्न हुआ था. यह शिकायत एक ईसाई पादरी, पादरी चिंतदा आनंद पॉल द्वारा की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें जातिसूचक गालियों और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा.
विनीत जिंदल (अधिवक्ता, SC) का कहना है कि हिंदू धर्म से अन्य धर्मों में परिवर्तित होने के बाद भी अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को मिलने वाली विशेष सुविधाओं का लाभ उठाने वालों पर अब रोक लगेगी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म से अन्य धर्मों में जाने वाले व्यक्तियों को SC/ST की विशेष सुविधाएं नहीं मिलेंगी. हिंदू धर्म से अन्य धर्मों में परिवर्तित लोगों द्वारा संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत मिलने वाली सुविधाओं का दुरुपयोग किया जा रहा था. अब केंद्र और राज्य सरकारों से अनुरोध है कि जो लोग SC/ST को मिलने वाले अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए.
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