Thai Mangur Fish: बिहार में हाल ही में हुई रेड में थाई मांगुर मछली के गैर-कानूनी व्यापार का पर्दाफाश होने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में है. भारत में यह मछली सालों से बैन है, फिर भी यह कई राज्यों के लोकल मार्केट में मिलती रहती है. बिहार के अधिकारियों की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर एक ऐसी समस्या को सामने ला दिया है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. कई खरीदारों के लिए, थाई मांगुर बाजार में बस एक सस्ती मछली है. लेकिन अधिकारियों और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के लिए, यह मुद्दा बहुत गहरा है, जिसमें गैर-कानूनी खेती और देसी मछली प्रजातियों पर दबाव शामिल है. हाल की कार्रवाई ने एक आसान सवाल खड़ा किया है: एक बैन मछली अभी भी इतनी आसानी से क्यों मिल रही है?
क्या है थाई मांगुर मछली?
थाई मांगुर, जिसे थाई मैगुर भी कहा जाता है, कैटफिश की एक प्रजाति है. यह तेजी से बढ़ने और कम लागत में पालन किए जाने के लिए जानी जाती है.यह मछली भीड़भाड़ वाले तालाबों और कम ऑक्सीजन वाले पानी में भी जीवित रह सकती है. यही वजह है कि कम समय में बड़ी मात्रा में मछली तैयार करने के लिए इसका व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है.थाई मांगुर का रंग आमतौर पर गहरा होता है और इसके मुंह के आसपास मूंछ जैसी संरचनाएं होती हैं. स्थानीय बाजारों में इसे अक्सर दूसरी मछलियों की तुलना में कम कीमत पर बेचा जाता है.
भारत में थाई मांगुर पर क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
थाई मांगुर पर प्रतिबंध लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़ी चिंताएं हैं. इसे एक आक्रामक प्रजाति माना जाता है, जो जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है.यह मछली अलग-अलग परिस्थितियों में आसानी से जीवित रह सकती है. ऐसे में अगर यह प्राकृतिक जलस्रोतों में पहुंच जाए तो इसके तेजी से फैलने की आशंका रहती है.इसके अलावा, यह देशी मछलियों के साथ भोजन और रहने की जगह के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकती है. इससे स्थानीय मछली प्रजातियों की संख्या प्रभावित होने और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ने की चिंता रहती है.
प्रतिबंध के बावजूद क्यों जारी है अवैध पालन?
प्रतिबंध के बावजूद थाई मांगुर का अवैध पालन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह मुनाफा मानी जाती है.यह कई देशी मछली प्रजातियों की तुलना में तेजी से बढ़ती है और इसके पालन में अपेक्षाकृत कम निवेश की जरूरत पड़ सकती है. इससे अवैध रूप से जुड़े लोगों को कम समय में बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है.इसके अलावा, यह मछली परिवहन और भंडारण के दौरान भी आसानी से संभाली जा सकती है. यही कारण है कि प्रतिबंध के बावजूद कुछ इलाकों में इसकी अवैध सप्लाई चेन बनी हुई है.
बिहार में क्या हुआ?
यह मुद्दा तब फिर से सामने आया जब अधिकारियों ने गैर-कानूनी थाई मांगुर कंसाइनमेंट पर छापेमारी की. पूर्णिया ज़िले में अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल से लाए गए मछली स्टॉक को ज़ब्त कर लिया. ज़ब्त की गई मछलियों को बाद में कार्रवाई के तौर पर नष्ट कर दिया गया. इन छापों से व्यापारियों में घबराहट फैल गई और इससे कड़ी निगरानी का संकेत मिला, और अधिकारी गैर-कानूनी व्यापार से जुड़े सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए हैं.