Twisha Sharma Father Interview: वी वीमेन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवॉर्ड्स 2026 के प्रोग्राम में एक इंटरव्यू में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि इस लड़ाई के दौरान उन्हें किस तरह लोगों का साथ मिला और क्यों उन्हें लगता है कि आज के समय में सिर्फ सिस्टम के भरोसे बैठना काफी नहीं है. उन्होंने सिस्टम की खामियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि असली लड़ाई उन लोगों के खिलाफ है, जो कुर्सी पर बैठकर सिस्टम को अपने हिसाब से चलाते हैं.
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे सिस्टम और इस मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह बहुत संभलकर करना चाहेंगे. उन्होंने कहा कि हम ऐसे सिस्टम में रह रहे हैं, जहां कई लेयर और अलग-अलग ग्रुप बने हुए हैं. हर सिस्टम में कुछ बॉस होते हैं और कई बार ऐसा लगता है कि सिस्टम काम नहीं कर रहा बल्कि बॉस काम कर रहे हैं.
कुर्सी पर बैठे लोगों के खिलाफ उठाएं आवाज
उन्होंने कहा कि देश में न्याय व्यवस्था, पुलिसिंग और संविधान के तहत चलने वाली तमाम व्यवस्थाएं हैं लेकिन आम आदमी को कई बार ऐसा महसूस होता है कि सिस्टम अपने तरीके से काम नहीं कर रहा. उन्होंने कहा कि इस बात की जरूरत है कि लोग उन लोगों के खिलाफ आवाज उठाएं जो कुर्सी पर बैठे हैं. ट्विशा के पिता ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संस्था से नहीं है बल्कि वह चाहते हैं कि सिस्टम कुर्सी से ऊपर हो. यानी फैसले किसी व्यक्ति की ताकत या पद के आधार पर नहीं, बल्कि नियम और कानून के हिसाब से हों.
जब पूरे देश की आवाज बनी ट्विशा की ताकत
उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में धीरे-धीरे आम लोगों का समर्थन उनके साथ जुड़ता चला गया. शुरुआत में जब उन्होंने आवाज उठाई थी, तब उनके साथ सिर्फ दो-तीन लोग थे लेकिन समय के साथ मीडिया और देशभर के लोगों ने उनका साथ देना शुरू किया. ट्विशा के पिता ने इस समर्थन के लिए मीडिया और देश की जनता का धन्यवाद भी किया. उन्होंने कहा कि लोगों ने सिर्फ उनकी कहानी पर भरोसा नहीं किया बल्कि यह भी माना कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए. उनके मुताबिक, लोगों का यह समर्थन इस पूरी लड़ाई में बेहद अहम रहा. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया की वजह से उनकी आवाज दूर तक पहुंची. जब बड़ी संख्या में लोग किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं तो वह एक तरह का सपोर्ट सिस्टम बन जाता है. यही समर्थन उन्हें इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की ताकत देता रहा.
हर साल हजारों बेटियों की मौत का किया जिक्र
इंटरव्यू में ट्विशा के पिता ने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा और उत्पीड़न का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि हर साल 16 हजार से ज्यादा बेटियां ऐसी परिस्थितियों में जान गंवा देती हैं, जिनमें दहेज या ससुराल में होने वाली प्रताड़ना जैसे मामले शामिल हैं. उन्होंने इसे समाज के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय बताया. उन्होंने कहा कि आज महिलाएं अपनी पहचान बना रही हैं और जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. ऐसे में उन्हें सिर्फ बहू या घर के काम करने वाली महिला के रूप में देखना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी वही मौके और सुविधाएं मिलनी चाहिए जो पुरुषों को मिलती हैं. आज महिलाएं हर क्षेत्र में शानदार काम कर रही हैं और अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बना रही हैं.