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कॉमेंट्री के समय जब ब्लंडर हो जाता है तो क्या करती हैं अंजुम चोपड़ा? किया हैरान करने वाला खुलासा

We Women Want Conclave Anjum Chopra: महिला टीम को विश्व कप जीतने को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि वह एहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है.मुझे मुंबई के एक खचाखच भरे स्टेडियम में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने का मौका मिला. मेरा मतलब है, ये वही पल होते हैं, जिनका एक खिलाड़ी सपना देखता है.

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Last Updated: August 10, 2026 15:48:39 IST

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We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026: नई दिल्ली में आज यानी सोमवार (10 अगस्त, 2026) को ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवार्ड्स 2026’ की शुरुआत हो चुकी है. जहां भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान और जानी मानी कंमटेटर अंजुम चोपड़ा ने महिला क्रिकेट पर बात की. अपने कॉमेंट्री को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि मुझे खुशी है कि लोग मुझे सुनना पसंद करते हैं. मुझे लगा था कि शायद लोग हमें म्यूट करके देख रहे होंगे या ज्यादातर समय मैच को म्यूट करके देख रहे होंगे.

आज हमारे पास एक अच्छा विकल्प है.आप चाहें तो टीवी पर म्यूट करके भी मैच देख सकते हैं और कोई आपको डिस्टर्ब भी नहीं करता. लेकिन मुझे खुशी है कि लोग हमें सुनते हैं या यूं कहें कि हमें सुनने के लिए मजबूर हैं. मुझे नहीं लगता कि यह कोई नेचुरल प्रोग्रेशन था. जब मैं खेल रही थी, तब मुझे सिर्फ कुछ मौकों पर कमेंट्री करने का अवसर मिला.. उन दिनों ग्राउंड पर कमेंट्री करना निश्चित रूप से उन चीजों में से एक था, जो मुझे करने को मिलीं. लेकिन उस समय हमारे पास सिर्फ एक चैनल था दूरदर्शन, जो मैच दिखाता था.

इसमें कोई रीटेक नहीं होता-अंजुम चोपड़ा

इसलिए यह कहना आसान था कि आप प्री-मैच और पोस्ट-मैच एनालिसिस प्रोग्राम का हिस्सा हैं. मेरी यह यात्रा वहीं से शुरू हुई. लेकिन जब मुझे लाइव ब्रॉडकास्टिंग करने का मौका मिला, तब मुझे एहसास हुआ कि इसमें कोई रीटेक नहीं होता. आप जो भी कहते हैं, वह बिल्कुल सही और सटीक होना चाहिए. क्योंकि आप ऐसी ऑडियंस से बात कर रहे होते हैं, जिसे आप देख नहीं सकते. वे आपको देख सकते हैं. साथ ही, आपको अपने शब्दों को इस तरह संतुलित करना होता है कि एक खिलाड़ी के तौर पर आपने जो अनुभव किया है, उसे भी सामने रख सकें, मैदान पर क्या हो रहा है उसे भी समझा सकें और खेल की नब्ज को भी समझ 

लोगों की भावनाओं को भी समझना पड़ता है-अंजुम चोपड़ा

सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि दर्शकों और अलग-अलग देशों में इस खेल को फॉलो करने वाले लोगों की भावनाओं को भी समझना पड़ता है. एक व्यक्ति के लिए जो मुस्कान है, वह दूसरे के लिए दुख या पीड़ा हो सकती है. आपको बस उसे सही तरीके से अपनी आवाज में व्यक्त करना होता है. इसलिए मैं हर दिन इसे बेहतर तरीके से करने की कोशिश कर रही हूं. यह निश्चित रूप से एक अच्छी यात्रा और एक अच्छा बदलाव है,एक खिलाड़ी होने से लेकर आज भी उस मैदान पर कदम रखने और उस पिच पर जाने में सक्षम होना, जहां ज्यादातर लोग शायद जा भी नहीं सकते.कम से कम मुझे वहां तक पहुंचने का मौका मिलता है और इसके लिए मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं.

कमेंट्री के दौरान होने वाली गलतीयों को लेकर कही ये बात

कमेंट्री के दौरान ब्लंडर और गलती को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि लाइव कमेंट्री में आप अपनी कही हुई बात वापस नहीं ले सकते. कभी-कभी मुंह से कुछ निकल जाता है और फिर आप सोचते हैं, ‘ओह!’ लेकिन यह रोज की बात है.और मुझे इसका एहसास इसलिए भी होता है क्योंकि जिस पल मैं कोई गलती करती हूं, मुझे उसके लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता. मेरे बगल में बैठा व्यक्ति ही मुझे याद दिला देता है. फिर लोग भी आपको याद दिलाते हैं. लेकिन एक तरह से यह अच्छी बात भी है कि लोग सुन रहे हैं. अगर आप कोई गलती करते हैं और किसी को पता ही नहीं चलता, तो आप कह सकते हैं कि ‘ओह, किसी ने नोटिस नहीं किया.’ लेकिन इसका मतलब यह भी है कि लोग सुन नहीं रहे हैं.अगर आप गलती करते हैं और वह गलती आपके पास वापस आती है, लोग आपको बताते हैं कि आपने क्या कहा था, तो इसका मतलब है कि लोग वास्तव में सुन रहे हैं. और यह अच्छी बात है.

महिला क्रिकेट में बदलाव को लेकर कही ये बात

भारत में महिला क्रिकेट के खेलने के तरीके और उसे देखने के नजरिए में सबसे बड़ा बदलाव को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि मैं इसे कोई बहुत बड़ा या नाटकीय बदलाव नहीं कहूंगी, बल्कि एक बहुत अच्छा बदलाव कहूंगी. मैं ‘ड्रामैटिक’ की जगह ‘हेल्दी’ शब्द इस्तेमाल करना चाहूंगी. कम से कम अब ज्यादा लोग महिला क्रिकेट के बारे में जागरूक हैं. मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत तब हुई, जब विश्व कप की ट्रॉफी हमारे देश में आई. इसके साथ ही मीडिया की मौजूदगी बढ़ी, खबरों और ब्रॉडकास्ट के लिए ज्यादा माध्यम उपलब्ध हुए और लोगों तक जानकारी पहुंचने लगी.

इस पहुंच ने हमें एक देश के तौर पर खेल में मिलने वाली सफलता को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक तेजी से पहुंचाने में मदद की है.और जैसा कि मैंने कहा, विश्व कप जीतना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. महिला टीम ने यह उपलब्धि हासिल की है. पुरुष क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत के बाद महिलाओं का विश्व कप जीतना निश्चित रूप से एक बहुत ही स्वस्थ और सकारात्मक संकेत है.अब ज्यादा लोग महिला क्रिकेट को फॉलो कर रहे हैं और  उसे देखने के लिए समय निकाल रहे हैं. हमारे पास सिर्फ एक महिला टीम नहीं है, बल्कि दो टीमों ने विश्व कप जीता है. बहुत सारे लोग शायद इस बात से परिचित नहीं हैं कि सिर्फ महिला क्रिकेट टीम ही नहीं, बल्कि ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम ने भी विश्व कप जीता है.

महिला टीम के विश्व कप जीतने  को लेकर कही ये बात

महिला टीम को विश्व कप जीतने को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि  वह एहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है.मुझे मुंबई के एक खचाखच भरे स्टेडियम में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने का मौका मिला. मेरा मतलब है, ये वही पल होते हैं, जिनका एक खिलाड़ी सपना देखता है.अपने घर में खेलना, खचाखच भरे स्टेडियम में खेलना, ऐसे दर्शकों के सामने खेलना जो वास्तव में अंदर आना चाहते हैं. मुझे लोगों के फोन आते थे कि उन्हें स्टेडियम के अंदर आने का मौका कैसे मिलेगा और मैं उन्हें अंदर आने की सुविधा दिलाने या उनकी मदद करने की कोशिश करती थी. विश्व कप की ट्रॉफी उठाना खुशी और गर्व का पल होगा. लेकिन जब आपके हाथ में वह ट्रॉफी होती है, तब उस पल का एहसास अलग ही होता है. उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है.

मैं एक खिलाड़ी रही हूं और मैंने बहुत सारी असफलताएं देखी हैं. मेरी जिंदगी में सफलताओं से ज्यादा असफलताएं रही हैं. लेकिन दिन के अंत में जब आपको एक सफलता या एक खुशी का पल मिलता है, तो पहले की सारी असफलताएं कुछ समय के लिए पीछे छूट जाती हैं.आपको सिर्फ वह एक सफलता याद रहती है. और यही वह चीज है, जिसके लिए आप ट्रेनिंग करते हैं.इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी असफलताओं को भूल जाते हैं. वे आपके लिए एक सीख और आत्ममंथन का हिस्सा बनी रहती हैं. आप पीछे मुड़कर देखते हैं कि आप कहां से आए हैं और आपको कहां जाना है.लेकिन उस एक पल के गर्व के लिए ही एक खिलाड़ी सालों तक मेहनत करता है और ट्रेनिंग करता है. मुझे लगता है कि यही वह पल है, जिसके लिए हर खिलाड़ी तरसता है और जिसके लिए वह वर्षों तक तैयारी करता है.

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We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026: नई दिल्ली में आज यानी सोमवार (10 अगस्त, 2026) को ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवार्ड्स 2026’ की शुरुआत हो चुकी है. जहां भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान और जानी मानी कंमटेटर अंजुम चोपड़ा ने महिला क्रिकेट पर बात की. अपने कॉमेंट्री को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि मुझे खुशी है कि लोग मुझे सुनना पसंद करते हैं. मुझे लगा था कि शायद लोग हमें म्यूट करके देख रहे होंगे या ज्यादातर समय मैच को म्यूट करके देख रहे होंगे.

आज हमारे पास एक अच्छा विकल्प है.आप चाहें तो टीवी पर म्यूट करके भी मैच देख सकते हैं और कोई आपको डिस्टर्ब भी नहीं करता. लेकिन मुझे खुशी है कि लोग हमें सुनते हैं या यूं कहें कि हमें सुनने के लिए मजबूर हैं. मुझे नहीं लगता कि यह कोई नेचुरल प्रोग्रेशन था. जब मैं खेल रही थी, तब मुझे सिर्फ कुछ मौकों पर कमेंट्री करने का अवसर मिला.. उन दिनों ग्राउंड पर कमेंट्री करना निश्चित रूप से उन चीजों में से एक था, जो मुझे करने को मिलीं. लेकिन उस समय हमारे पास सिर्फ एक चैनल था दूरदर्शन, जो मैच दिखाता था.

इसमें कोई रीटेक नहीं होता-अंजुम चोपड़ा

इसलिए यह कहना आसान था कि आप प्री-मैच और पोस्ट-मैच एनालिसिस प्रोग्राम का हिस्सा हैं. मेरी यह यात्रा वहीं से शुरू हुई. लेकिन जब मुझे लाइव ब्रॉडकास्टिंग करने का मौका मिला, तब मुझे एहसास हुआ कि इसमें कोई रीटेक नहीं होता. आप जो भी कहते हैं, वह बिल्कुल सही और सटीक होना चाहिए. क्योंकि आप ऐसी ऑडियंस से बात कर रहे होते हैं, जिसे आप देख नहीं सकते. वे आपको देख सकते हैं. साथ ही, आपको अपने शब्दों को इस तरह संतुलित करना होता है कि एक खिलाड़ी के तौर पर आपने जो अनुभव किया है, उसे भी सामने रख सकें, मैदान पर क्या हो रहा है उसे भी समझा सकें और खेल की नब्ज को भी समझ 

लोगों की भावनाओं को भी समझना पड़ता है-अंजुम चोपड़ा

सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि दर्शकों और अलग-अलग देशों में इस खेल को फॉलो करने वाले लोगों की भावनाओं को भी समझना पड़ता है. एक व्यक्ति के लिए जो मुस्कान है, वह दूसरे के लिए दुख या पीड़ा हो सकती है. आपको बस उसे सही तरीके से अपनी आवाज में व्यक्त करना होता है. इसलिए मैं हर दिन इसे बेहतर तरीके से करने की कोशिश कर रही हूं. यह निश्चित रूप से एक अच्छी यात्रा और एक अच्छा बदलाव है,एक खिलाड़ी होने से लेकर आज भी उस मैदान पर कदम रखने और उस पिच पर जाने में सक्षम होना, जहां ज्यादातर लोग शायद जा भी नहीं सकते.कम से कम मुझे वहां तक पहुंचने का मौका मिलता है और इसके लिए मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं.

कमेंट्री के दौरान होने वाली गलतीयों को लेकर कही ये बात

कमेंट्री के दौरान ब्लंडर और गलती को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि लाइव कमेंट्री में आप अपनी कही हुई बात वापस नहीं ले सकते. कभी-कभी मुंह से कुछ निकल जाता है और फिर आप सोचते हैं, ‘ओह!’ लेकिन यह रोज की बात है.और मुझे इसका एहसास इसलिए भी होता है क्योंकि जिस पल मैं कोई गलती करती हूं, मुझे उसके लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता. मेरे बगल में बैठा व्यक्ति ही मुझे याद दिला देता है. फिर लोग भी आपको याद दिलाते हैं. लेकिन एक तरह से यह अच्छी बात भी है कि लोग सुन रहे हैं. अगर आप कोई गलती करते हैं और किसी को पता ही नहीं चलता, तो आप कह सकते हैं कि ‘ओह, किसी ने नोटिस नहीं किया.’ लेकिन इसका मतलब यह भी है कि लोग सुन नहीं रहे हैं.अगर आप गलती करते हैं और वह गलती आपके पास वापस आती है, लोग आपको बताते हैं कि आपने क्या कहा था, तो इसका मतलब है कि लोग वास्तव में सुन रहे हैं. और यह अच्छी बात है.

महिला क्रिकेट में बदलाव को लेकर कही ये बात

भारत में महिला क्रिकेट के खेलने के तरीके और उसे देखने के नजरिए में सबसे बड़ा बदलाव को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि मैं इसे कोई बहुत बड़ा या नाटकीय बदलाव नहीं कहूंगी, बल्कि एक बहुत अच्छा बदलाव कहूंगी. मैं ‘ड्रामैटिक’ की जगह ‘हेल्दी’ शब्द इस्तेमाल करना चाहूंगी. कम से कम अब ज्यादा लोग महिला क्रिकेट के बारे में जागरूक हैं. मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत तब हुई, जब विश्व कप की ट्रॉफी हमारे देश में आई. इसके साथ ही मीडिया की मौजूदगी बढ़ी, खबरों और ब्रॉडकास्ट के लिए ज्यादा माध्यम उपलब्ध हुए और लोगों तक जानकारी पहुंचने लगी.

इस पहुंच ने हमें एक देश के तौर पर खेल में मिलने वाली सफलता को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक तेजी से पहुंचाने में मदद की है.और जैसा कि मैंने कहा, विश्व कप जीतना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. महिला टीम ने यह उपलब्धि हासिल की है. पुरुष क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत के बाद महिलाओं का विश्व कप जीतना निश्चित रूप से एक बहुत ही स्वस्थ और सकारात्मक संकेत है.अब ज्यादा लोग महिला क्रिकेट को फॉलो कर रहे हैं और  उसे देखने के लिए समय निकाल रहे हैं. हमारे पास सिर्फ एक महिला टीम नहीं है, बल्कि दो टीमों ने विश्व कप जीता है. बहुत सारे लोग शायद इस बात से परिचित नहीं हैं कि सिर्फ महिला क्रिकेट टीम ही नहीं, बल्कि ब्लाइंड महिला क्रिकेट टीम ने भी विश्व कप जीता है.

महिला टीम के विश्व कप जीतने  को लेकर कही ये बात

महिला टीम को विश्व कप जीतने को लेकर अंजुम चोपड़ा ने कहा कि  वह एहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है.मुझे मुंबई के एक खचाखच भरे स्टेडियम में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने का मौका मिला. मेरा मतलब है, ये वही पल होते हैं, जिनका एक खिलाड़ी सपना देखता है.अपने घर में खेलना, खचाखच भरे स्टेडियम में खेलना, ऐसे दर्शकों के सामने खेलना जो वास्तव में अंदर आना चाहते हैं. मुझे लोगों के फोन आते थे कि उन्हें स्टेडियम के अंदर आने का मौका कैसे मिलेगा और मैं उन्हें अंदर आने की सुविधा दिलाने या उनकी मदद करने की कोशिश करती थी. विश्व कप की ट्रॉफी उठाना खुशी और गर्व का पल होगा. लेकिन जब आपके हाथ में वह ट्रॉफी होती है, तब उस पल का एहसास अलग ही होता है. उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है.

मैं एक खिलाड़ी रही हूं और मैंने बहुत सारी असफलताएं देखी हैं. मेरी जिंदगी में सफलताओं से ज्यादा असफलताएं रही हैं. लेकिन दिन के अंत में जब आपको एक सफलता या एक खुशी का पल मिलता है, तो पहले की सारी असफलताएं कुछ समय के लिए पीछे छूट जाती हैं.आपको सिर्फ वह एक सफलता याद रहती है. और यही वह चीज है, जिसके लिए आप ट्रेनिंग करते हैं.इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी असफलताओं को भूल जाते हैं. वे आपके लिए एक सीख और आत्ममंथन का हिस्सा बनी रहती हैं. आप पीछे मुड़कर देखते हैं कि आप कहां से आए हैं और आपको कहां जाना है.लेकिन उस एक पल के गर्व के लिए ही एक खिलाड़ी सालों तक मेहनत करता है और ट्रेनिंग करता है. मुझे लगता है कि यही वह पल है, जिसके लिए हर खिलाड़ी तरसता है और जिसके लिए वह वर्षों तक तैयारी करता है.

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