यूपी में ई-बसों के लिए नया रूट मैप तैयार किया गया है. अब 32 ई-बसों के रूट में 3 नए शहरों को जोड़ा गया है, जबकि कुछ पुराने रूट में बदलाव किया गया है, जिससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी.
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने आखिरकार साहिबाबाद में चलने वाली ई-बसों के रूट मैप को लेकर एक नया कदम उठाया है. ये रूट मैप तीसरी बार फिर से बनाया गया है और इसके साथ ही परिवहन निगम ने 32 ई-बसों के लिए नए रूट निर्धारित किए हैं. हालांकि, इन रूटों की योजना अब तक विवादों और बदलावों से गुजर चुकी है और अधिकारियों का दावा है कि अब ये रूट स्थायी रूप से लागू किया जाएगा.
नई योजना के तहत, कुल 20 ई-बसों के लिए रूट निर्धारित किए गए हैं, जिनमें से तीन रूट नए हैं- कौशांबी से मुरादाबाद, मेरठ, और कासगंज. इन रूटों का चयन इन शहरों के बढ़ते यातायात और सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए किया गया है. इसके अलावा, कश्मीरी गेट से बिजनौर और हरिद्वार के रूट भी नए रूप में प्रस्तावित किए गए हैं. पुरानी योजना में शामिल रूटों में कुछ बदलाव किए गए हैं और केवल दो पुराने रूट अब भी शामिल किए गए हैं, जिनमें कौशांबी से मुरादाबाद और कश्मीरी गेट से मुजफ्फरनगर शामिल हैं.
यद्यपि यूपीएसआरटीसी को जुलाई में 32 ई-बसें प्राप्त हुईं हैं, लेकिन इनका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है. मुख्य समस्या चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है, जिसके कारण ये बसें साहिबाबाद डिपो की वर्कशॉप में खड़ी हैं. इन बसों की कुल कीमत लगभग 51.2 करोड़ रुपये है, लेकिन बिना चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के इनका संचालन नहीं हो पा रहा है. निगम को बिजली कनेक्शन लेने में देरी हो रही है और इसके लिए मुख्यालय से अतिरिक्त राशि की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है.
ये पूरी स्थिति परिवहन निगम के अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. पिछले डेढ़ साल से ई-बसों के संचालन की योजना तैयार की जा रही थी, लेकिन प्रशासनिक लेटलतीफी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इन बसों का संचालन अब तक संभव नहीं हो पाया है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही 18 ई-बसों का फाइनल रूट भी मुख्यालय भेज दिया जाएगा, लेकिन कब तक ये योजना चलेगी, ये समय ही बताएगा.
उत्तर प्रदेश में ई-बसों के संचालन के लिए ये रूट मैप, यदि पूरी तरह से लागू हो जाता है, तो ये राज्य के सार्वजनिक परिवहन को एक नई दिशा दे सकता है. पर्यावरणीय दृष्टि से भी ये एक सही कदम है, क्योंकि ई-बसें प्रदूषण में कमी लाने में मदद कर सकती हैं. लेकिन, इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की तुरंत स्थापना की जरूरत है ताकि ये योजना सफल हो सके.
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