March Weather Report: आज 11 मार्च है और तापमान में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है. बताया जा रहा है कि मार्च करे महीने में तापमान नॉर्मल से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा दर्ज किया गया. इसके पीछे की वजह जनवरी-फरवरी के महीने में कम बारिश को बताया जा रहा है.
मार्च महीने में तापमान में 8 से 11 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई.
Heatwave: भारत के कई इलाकों में खासकर उत्तर और पश्चिम में फरवरी के ठंडे सर्दियों के दिनों की जगह इस महीने यानी की मार्च में अचानक बहुत ज़्यादा गर्म दिन आ गए. तापमान नॉर्मल से 8 से 13 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किए जा रहे हैं, जिसे हीट-वेव कंडीशन कहा जा सकता है. हालांकि तीन साल पहले फरवरी में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई थी, लेकिन इतनी जल्दी गर्मी का आना बहुत कम होता है.
IMD ने अपने मार्च के अनुमान में कहा कि पश्चिमी हिमालयी इलाकों और पेनिनसुला और सेंट्रल इंडिया में दिन का तापमान नॉर्मल से ‘ज़्यादा’ रहेगा. इसने गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी नॉर्मल से ‘ज़्यादा’ हीटवेव वाले दिनों की चेतावनी दी. दोनों ही हालात मार्च के पहले हफ़्ते में ही बन गए थे.
हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में पहले ही तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो चुका है. IMD के एक अधिकारी ने कहा कि शिमला में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना बहुत कम है और मार्च में तो बिल्कुल नहीं. शिमला में गर्मी मई और जून की शुरुआत में सबसे ज़्यादा होती है, लेकिन हीटवेव आम नहीं हैं. इसके अलावा, पिछले सप्ताह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी ऐसी ही स्थिति थी.
IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि तापमान काफी ज्यादा है और अगले 2 से 3 दिनों तक ऐसा ही रहेगा. आने वाला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इस तापमान को नीचे ले आएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) पूरब की ओर चलने वाली बारिश लाने वाली हवाएं हैं जो ईरान के पार से शुरू होती हैं और मेडिटेरेनियन सी और दूसरी पानी की जगहों से नमी लेती हैं. ये सर्दियों के महीनों में आम हैं.
मार्च के महीने में अब तक इतनी गर्मी की सबसे बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि जनवरी-फरवरी के दौरान सर्दियों में बारिश नॉर्मल से लगभग 60% कम थी, जिससे मिट्टी की नमी कम हो गई और गर्मी बढ़ गई. इसके अलावा, दूसरी वजह यह रही है कि सर्दियों में कम वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से उत्तर भारत में बादल छाए रहे, बर्फबारी हुई और बारिश कम हुई. नमी की कमी से इवैपोरेटिव कूलिंग कम हो जाती है, जिससे सतह का तापमान तेज़ी से बढ़ता है.
इसके अलावा, बादल कम होने से धूप ज़्यादा मिल पाती है जिससे ज़मीन की सतह गर्म हो जाती है. पश्चिमी और पूर्वी हवाओं के बीच कमज़ोर इंटरैक्शन की वजह से आस-पास के समुद्रों से नमी का ट्रांसपोर्ट कम हो गया.
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