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Vijaypat Singhania: कौन थे विजयपत सिंघानिया? जानिए उनके परिवार, कंपनी और नेटवर्थ के अलावा बहुत कुछ

Vijaypat Singhania: रेमंड ग्रुप के पूर्व प्रमुख और पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत कैलाशपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. वह लंबे समय से भारतीय औद्योगिक जगत की एक प्रमुख हस्ती रहे थे और उन्होंने रेमंड ग्रुप को एक पारंपरिक कपड़ा कंपनी से बदलकर वैश्विक पहचान वाली संस्था बनाने में अहम भूमिका निभाई. रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने पिता के निधन की खबर साझा की. उन्होंने लिखा कि गहरे दुख के साथ हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की घोषणा करते हैं. वह एक दूरदर्शी नेता, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी.

Vijaypat Singhania: रेमंड ग्रुप के पूर्व प्रमुख और पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत कैलाशपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. वह लंबे समय से भारतीय औद्योगिक जगत की एक प्रमुख हस्ती रहे थे और उन्होंने रेमंड ग्रुप को एक पारंपरिक कपड़ा कंपनी से बदलकर वैश्विक पहचान वाली संस्था बनाने में अहम भूमिका निभाई. साथ ही एविएशन क्षेत्र में भी उन्होंने काफी काम किया. रेमंड ग्रुप के मौजूदा चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने पिता के निधन की खबर साझा की.

उन्होंने लिखा कि गहरे दुख के साथ हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की घोषणा करते हैं. वह एक दूरदर्शी नेता, परोपकारी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी.

विजयपत सिंघानिया का जीवन

विजयपत सिंघानिया का जन्म 4 अक्टूबर, 1938 को कानपुर में हुआ था. वे JK Group परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो भारतीय व्यापार जगत में पहले से ही एक जाना-माना नाम है. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने करियर की शुरुआत कर दी थी, क्योंकि उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें व्यापारिक कार्यों तक सीधी पहुँच प्राप्त थी. उनके व्यापारिक ज्ञान का विकास मुंबई के सिडेनहम कॉलेज में उनकी पढ़ाई के दौरान हुआ, जहां उन्होंने कॉमर्स की शिक्षा प्राप्त की. अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय में काम किया, जहां वे धीरे-धीरे उच्च पदों तक पहुंचे.

रेमंड की संभाली कमान

जब उन्होंने रेमंड की कमान संभाली, तब कंपनी पहले से ही स्थापित थी. लेकिन, उन्होंने इसे एक बहुत ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया. उन्होंने ब्रांड पर लोगों का भरोसा बनाने और भारत के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी पहुंच बढ़ाने पर खास ध्यान दिया. उनके नेतृत्व में रेमंड एक ऐसा नाम बन गया जिसे लोग बेहतरीन क्वालिटी के सूटिंग फैब्रिक से जोड़ने लगे. लेकिन विजयपत ऐसे इंसान नहीं थे जो सिर्फ़ बोर्डरूम तक ही सीमित रहें. उनका मन हमेशा कुछ नया जानने को उत्सुक रहता था और उन्हें बिज़नेस से परे ज़िंदगी को एक्सप्लोर करने में गहरी दिलचस्पी थी. उनकी शख़्सियत का यह पहलू उनके काम के अलावा उनके द्वारा चुने गए दूसरे कामों में साफ तौर पर झलकता था.

रेमंड ग्रुप के प्रमुख के तौर पर एक लंबा सफर

विजयपत सिंघानिया ने 1980 से 2000 तक रेमंड ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्य किया. उनके नेतृत्व में, रेमंड ने केवल सूट के कपड़ों से आगे बढ़कर सिंथेटिक कपड़े, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति की. उन्होंने रेमंड को भारत के सबसे प्रतिष्ठित लाइफस्टाइल और फैब्रिक ब्रांडों में से एक के रूप में स्थापित किया. बाद में, उन्होंने रेमंड की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी और कंपनी में अपनी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी भी उन्हें हस्तांतरित कर दी.

विमानन के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान

उद्योग जगत से परे विजयपत सिंघानिया को विमानन (एविएशन) का गहरा शौक था और उन्हें भारत के सबसे साहसी विमान चालकों में गिना जाता था. 1994 में भारतीय वायु सेना ने उन्हें ‘एयर कमोडोर’ की मानद रैंक से सम्मानित किया. विमानन के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था. नवंबर 2005 में, 67 वर्ष की आयु में, उन्होंने एक हॉट एयर बैलून को लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. उन्होंने यह उड़ान मुंबई रेसकोर्स से शुरू की और लगभग पांच घंटे बाद नासिक के पास उतरे.

सम्मान और परिवार

विजयपत सिंघानिया को उद्योग और एडवेंचर के क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दर्शाता है. विजयपत सिंघानिया के परिवार में उनकी पत्नी, आशादेवी सिंघानिया और उनके बच्चे मधुपति सिंघानिया, शेफाली रुइया और गौतम सिंघानिया शामिल हैं. उनके निधन की खबर मिलने के बाद उद्योग जगत के सदस्यों और आम जनता ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया. अपने करियर के शिखर पर विजयपत सिंघानिया भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक थे. साल 2012 के आस-पास, उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.4 बिलियन USD आंकी गई थी. यह संपत्ति मुख्य रूप से रेमंड में उनकी मज़बूत पकड़ से आई थी. साथ ही रियल एस्टेट और अन्य निवेशों ने भी उनकी आर्थिक स्थिति को और मज़बूत बनाया था. लेकिन 2015 में हालात बदलने लगे और उस साल ने उनकी ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी.

किराए के मकान में गुजरा अंतिम वक्त

सबसे पहले, उनकी पत्नी माधुरी से उनका तलाक़ हुआ, जिसके निपटारे के तौर पर उन्हें लगभग 400 मिलियन USD देने पड़े. इसके तुरंत बाद उन्होंने रेमंड में अपने 37 प्रतिशत शेयर जिनकी कीमत 1,000 करोड़ INR से भी ज़्यादा थी, अपने बेटे गौतम के नाम कर दिए. इस कदम के साथ ही कंपनी का पूरा नियंत्रण उनके बेटे के हाथों में चला गया. उस समय यह सब कुछ एक सहज पारिवारिक बदलाव जैसा लग रहा था. लेकिन समय बीतने के साथ इस फ़ैसले का नतीजा कुछ ऐसा निकला जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी.

अपने जीवन के बाद के वर्षों में विजयपत सिंघानिया की जीवनशैली में एक बड़ा बदलाव आया. रिपोर्टों के अनुसार, जहां एक ओर उनके पास लगभग 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति अभी भी मौजूद थी, वहीं दूसरी ओर वे अब परिवार के स्वामित्व वाले आलीशान आवास में नहीं रह रहे थे. इसके बजाय, उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष एक किराए के मकान में बिताए. उनकी पिछली दौलत और बाद के जीवन के बीच का यह विरोधाभास अक्सर लोगों का ध्यान खींचता था. यह उन फैसलों के बाद सामने आया था जो कभी भरोसे और सूझ-बूझ भरी योजना के कार्य प्रतीत होते थे.

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