One Nation One Election: वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जिसको लेकर ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के चेयरमैन पीपी चौधरी ने कहा कि अब तक वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर जेपीसी की कई बैठकें हो चुकी हैं.
One Nation One Election: एक बार जब संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद द्वारा पारित हो जाता है और भारत के राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित कर दिया जाता है, तो वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने का सबसे पहला संभव चक्र 2034 होगा. यह प्रक्रिया 2029 के आम चुनावों से शुरू होगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है.
यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि विभिन्न क्षेत्रों और इलाकों के संबंधित हितधारक समिति के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत कर सकें, जिससे समावेशी भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा. परिणामस्वरूप, रिपोर्ट को संसद के समक्ष प्रस्तुत किए जाने में कुछ समय लगेगा.
जानकारी के अनुसार, 2024 में देश के सभी राज्यों के विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ हो सकते हैं. राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए सहमति बनती जा रही है कि 2034 के बाद किसी भी राज्य में समय से पहले विधानसभा भंग होती है तो नए चुनाव पूरे 5 साल के लिए ना होकर बचे हुए कार्यकाल के लिए ही होंगे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने के लिए संसद में वन नेशन-वन इलेक्शन बिल पेश हो चुका है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते है कि देश में हर वर्ष किसी ना किसी राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों का सिलसिला खत्म होना चाहिए. हर वर्ष विधानसभा चुनाव होने से लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग होने से देश पर और राज्यों पर चुनावी खर्च का बोझ पड़ता है, विकास भी प्रभावित होता है. आचार संहिता लगने के चलते कई महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्य बंद हो जाते है. परियोजनाओं की लागत भी बढ़ जाती है. संसद में वन नेशन वन इलेक्शन बिल जब पेशु हुआ तो इस बिल का विपक्षी दलों द्वारा जबरदस्त विरोध हुआ था. जिसके चलते इस बिल को सरकार ने ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी (जेपीसी) को भेज दिया था.
जेपीसी के चेयरमैन भाजपा के सांसद और प्रख्यात वकील पीपी चौधरी है. इस पूरे मामले पर पीपी चौधरी ने बताया कि अब तक वन नेशन वन इलेक्शन बिल पर बनी जेपीसी की कई बैठके हो चुकी हैं. कुछ राज्यों का दौरा भी हो चुका है. जेपीसी में लगभग सभी राजनीतिक दलों के सांसद हैं. जो इस बात से सहमत है कि एक साथ चुनाव होने से देश का समय और पैसा बचेगा. लेकिन समस्या उन राज्यों के राजनीतिक दलों की ओर से आ रही है.
जिनको लगता है कि बिल लागू होने से उनकी राज्यों में सरकार का कार्यकाल 5 वर्ष से पहले ही खत्म हो जाएगा. जबकि जनता ने उनको पूरे 5 वर्ष के लिए चुनकर भेजा है. दूसरी आपत्ति इस बात पर है कि किसी राज्य में विधानसभा या केंद्र में लोकसभा में कोई सरकार बहुमत खो देती है तो क्या होगा?
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी में इस बात पर सहमति बनती जा रही है कि एक बार तो राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल को बढ़ाकर या घटाकर लोकसभा के साथ लाना ही पड़ेगा. उसके बाद जो चुनाव होंगे वह पूरे 5 वर्ष बाद होंगे या बचे हुए कार्यकाल को पूरा करने के लिए ही होंगे. बताया जा रहा है कि वन नेशन वन इलेक्शन बिल पर बनी जेपीसी की रिपोर्ट जल्दी ही सरकार को सौंप दी जाएगी. संभावना है कि 2034 के आम चुनावों के साथ ही देश में सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव भी साथ में कराए जाएंगे.
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