दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में इन दिनों एक अजीब‑सी भगदड़ देखने को मिल रही है. लोग रोटी या राशन के लिए नहीं, बल्कि कूड़ा फेंकने वाले “पे‑एज‑यू‑थ्रो” प्लास्टिक बैग खरीदने के लिए दुकानों पर टूट पड़ रहे हैं. यह समस्या मध्य-पूर्व के जारी संघर्षों और तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता से जुड़ी है.
दक्षिण कोरिया में कचरे की थैलियों के लिए मची अफरातफरी
दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में इन दिनों एक अजीब‑सी भगदड़ देखने को मिल रही है. लोग रोटी या राशन के लिए नहीं, बल्कि कूड़ा फेंकने वाले “पे‑एज‑यू‑थ्रो” प्लास्टिक बैग खरीदने के लिए दुकानों पर टूट पड़ रहे हैं.
वहां एक ही दिन में लगभग 27 लाख कचरा बैग बिकने की खबरों ने स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. आम दिनों में इन बैग की बिक्री सामान्य की तुलना में लगभग पांच गुना ज्यादा हो गई है.
दरअसल यह समस्या मध्य पूर्व के जारी संघर्षों और तेल सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता से जुड़ी है. दक्षिण कोरिया पेट्रोलियम उत्पादों की बड़ी मात्रा का खाड़ी देशों से आयात करता है, और ये कचरे की थैलियां भी पेट्रोकेमिकल उत्पादों (नेफ्था) से बनती हैं. लोगों को यह डर सता रहा है कि अगर हालात बिगड़ते हैं और तेल की सप्लाई रुकी या महंगी हो गई, तो इन बैगों की सप्लाई भी बाधित हो सकती है, जिससे उनके घरों का कचरा बाहर फेंकना मुश्किल हो जाएगा. इस डर ने लोगों को यह सामान्य सिंथेटिक बैग अचानक “जरूरी सामान” की श्रेणी में खींच लिया है.
बाजार की इस भगदौड़ का असर सिर्फ दुकानों तक ही सीमित नहीं रहा. लोग अपने पास मौजूद पुराने कचरा बैग भी जमा करने लगे हैं और जहां डस्टबिन में फेंके गए बैग दिखाई दे रहे हैं, वहां कुछ लोग उन्हें भी उठा ले जा रहे हैं, जिससे एक ओर तो अजीब‑सी “कचरा‑थैली चोरी” की दृश्य बन रही है, तो दूसरी ओर लोगों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि क्या यह जरूरी तैयारी है या बेवजह की पैनिक‑बाइइंग?
बाहरी लोगों को द. कोरिया के सख्त कूड़ा-निपटान नियम चुनौतीपूर्ण लग सकते हैं. कोरिया एक छोटा, पहाड़ी देश है जिसकी जनसंख्या घनत्व दुनिया में सबसे अधिक है. मानकीकृत प्रणाली के बिना, कूड़े के पहाड़ जल्दी ही सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन जाएंगे. वहां के नियम के अनुसार हर घर को सरकार द्वारा जारी किए गए विशेष, ‘जितना कूड़ा फेंकोगे उतना भुगतान करना होगा’ वाले थैलों का उपयोग करना अनिवार्य है, जिनका रंग और डिज़ाइन जिले के अनुसार अलग-अलग होता है.
यह प्रणाली, जिसे आधिकारिक तौर पर वॉल्यूम-बेस्ड वेस्ट फी (VBWF) प्रणाली के रूप में जाना जाता है, 1995 में शुरू की गई थी. वहां रहने वाले लोग थैले खरीदते समय एक पूर्व-भुगतान निपटान शुल्क का भुगतान करते हैं, जिसका अर्थ है कि जितना अधिक कूड़ा होगा, उतने ही अधिक थैले खरीदने होंगे. निर्धारित बैग के अलावा किसी अन्य बैग का उपयोग करना अपशिष्ट प्रबंधन अधिनियम का उल्लंघन है, जिसके लिए 10 लाख वॉन तक का जुर्माना हो सकता है. यहां तक कि मामूली पहली बार की गलतियों के लिए भी, जैसे कि कुछ पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं को सही डिब्बे में अलग न करना या गलत जिले के बैग का उपयोग करने पर भी भारी जुर्माना लग सकता है.
इस समस्या ने कोरियाई शेयर बाजार और मुद्रा को भी प्रभावित किया है. तेल और पेट्रोकेमिकल असुरक्षा पर बढ़ता भय निवेशकों के मन पर भी हावी हो गया है, जिसके चलते कोस्पी इंडेक्स में एक ही दिन में लगभग 12 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जो हाल के इतिहास में शेयर बाजार की सबसे खराब स्थिति को दर्शाती है. इस कारण कोरियाई करेंसी वॉन भी 17 साल के निम्न स्तर तक पहुंच गई है.
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