WhatsApp privacy Lawsuit: यूज़र्स के एक इंटरनेशनल ग्रुप ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर मुकदमा किया. उन्होंने कंपनी पर WhatsApp यूज़र्स को उनके मैसेज की प्राइवेसी के बारे में गुमराह करने और गलत तरीके से यह दावा करने का आरोप लगाया.
WhatsApp privacy Lawsuit
WhatsApp privacy Lawsuit: यूजर्स के एक इंटरनेशनल ग्रुप ने मेटा प्लेटफॉर्म्स पर मुकदमा किया. उन्होंने कंपनी पर अरबों WhatsApp यूज़र्स को उनके मैसेज की प्राइवेसी के बारे में गुमराह करने और गलत तरीके से यह दावा करने का आरोप लगाया. आरोप है कि चैट्स “एंड-टू-एंड” एन्क्रिप्टेड हैं. हालांकि, मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया है और मुकदमे को बेबुनियाद बताया है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को सैन फ्रांसिस्को की एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर यह मुकदमा, मेटा के उन पुराने दावों को चुनौती देता है कि WhatsApp मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित हैं और कंपनी खुद भी उन्हें एक्सेस नहीं कर सकती.
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन WhatsApp की प्राइवेसी पिच का एक मुख्य हिस्सा रहा है. मेटा ने बार-बार कहा है कि एन्क्रिप्शन का यह तरीका यह सुनिश्चित करता है कि मैसेज केवल भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकते हैं. इसे WhatsApp या उसकी पेरेंट कंपनी भी नहीं देख सकती. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐप के अंदर WhatsApp यूज़र्स को बताता है कि “इस चैट में केवल लोग ही उनके मैसेज पढ़, सुन या शेयर कर सकते हैं. यह भी बताया गया है कि यह फीचर डिफ़ॉल्ट रूप से चालू रहता है. ऐसा नोट एप्लिकेशन पर किसी भी चैट की शुरुआत में भी दिखाई देता है. मुकदमा करने वालों का तर्क है कि ये आश्वासन यह नहीं दिखाते कि सर्विस असल में कैसे काम करती है.
शिकायत के अनुसार, मेटा और WhatsApp “WhatsApp यूज़र्स के लगभग सभी कथित तौर पर ‘प्राइवेट’ कम्युनिकेशन को स्टोर, एनालाइज़ और एक्सेस कर सकते हैं.” मुकदमे में कंपनियों और उनके लीडरशिप पर WhatsApp को एक प्राइवेट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में मार्केटिंग करके दुनिया भर के यूज़र्स को धोखा देने का आरोप लगाया गया है. मुकदमा करने वालों के ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूज़र्स शामिल हैं. उनका दावा है कि मेटा यूज़र कम्युनिकेशन के कंटेंट को स्टोर करता है और कंपनी के कर्मचारी उन मैसेज को एक्सेस कर सकते हैं. फाइलिंग में “व्हिसलब्लोअर” का भी ज़िक्र है, जिन्होंने कथित तौर पर इन तरीकों का खुलासा करने में मदद की. हालांकि, शिकायत में उनकी पहचान नहीं बताई गई है और न ही उनकी भूमिकाओं के बारे में बताया गया है.
मेटा ने आरोपों से सख्ती से इनकार किया है और मुकदमे को बेबुनियाद बताया. ब्लूमबर्ग द्वारा बताए गए एक ईमेल में मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा, “यह दावा कि लोगों के WhatsApp मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं हैं, पूरी तरह से गलत और बेतुका है.” कंपनी मुकदमा करने वालों के वकील के खिलाफ कार्रवाई. WhatsApp पिछले दस सालों से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है. यह मुकदमा एक बेकार मनगढ़ंत कहानी है.फिलहाल, इस मामले में कोई भी वकील कुछ भी कहने से बच रहे हैं.
IPL 2027 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स में बड़े बदलाव की चर्चा तेज है. स्टीफन…
ESIC Pehchan Card Aadhaar Linking: क्या आपका ESIC कार्ड आधार से लिंक है? श्रम मंत्रालय…
East Zone vs South Zone Final: दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन ने…
Sahara India Refund CRCS Portal: सहारा इंडिया के निवेशकों के लिए बड़ी खबर! सहकारिता मंत्रालय…
Anurag Kashyap: बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर अनुराग कश्यप 54 साल के हो…
IND vs AFG Live Streaming: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी भारत-अफगानिस्तान T20 सीरीज में गदर…