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Indian Army Story: स्कूलिंग के दौरान NCC, फिर मेडिकल की डिग्री, अब सेना में मिला यह सम्मान

Indian Army Major Success Story: भारतीय सेना में कुछ उपलब्धियां इतिहास बदल देती हैं. ऐसे ही कहानी एक लड़की है, जो पैरा स्पेशल फोर्सेज़ का ‘बलिदान’ बैज पाने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं.

Indian Army Success Story: भारतीय सेना के इतिहास में कुछ नाम ऐसे दर्ज होते हैं, जो सिर्फ उपलब्धि नहीं, बल्कि बदलाव का प्रतीक बन जाते हैं. मेजर दीक्षा सी. मुदादेवन्नावर (Major Deeksha C. Mudadevannanavar) ऐसा ही एक नाम हैं. पैरा स्पेशल फोर्सेज़ का प्रतिष्ठित ‘बलिदान’ बैज हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी के रूप में उन्होंने साहस, धैर्य और प्रतिबद्धता की नई मिसाल कायम की है.

कर्नाटक के दावणगेरे में पली-बढ़ीं दीक्षा के भीतर देशसेवा की भावना बचपन से ही थी. स्कूल के दिनों में National Cadet Corps (NCC) से जुड़ना उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ. यहीं से नेतृत्व, अनुशासन और टीमवर्क जैसे गुणों ने आकार लिया. आगे चलकर उन्होंने मेडिसिन की पढ़ाई की और अक्टूबर 2019 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए भारतीय सेना में कदम रखा.

कर्नाटक से स्पेशल फोर्सेज़ तक का सफर

लखनऊ स्थित आर्मी मेडिकल कोर सेंटर में कठोर प्रशिक्षण के बाद उन्होंने मेडिकल ऑफिसर्स बेसिक कोर्स पूरा किया. उनकी पहली पोस्टिंग लेह के तांगत्से स्थित 303 फील्ड हॉस्पिटल में हुई, जहां ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों में सेवा देना किसी चुनौती से कम नहीं था.

पैरा स्पेशल फोर्सेज़ और ‘बलिदान’ बैज की कठिन राह

पैरा स्पेशल फोर्सेज़ भारतीय सेना की सबसे एलीट यूनिट मानी जाती है. यहां ‘बलिदान’ बैज पाना अत्यंत कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही संभव होता है. इस बैज पर अंकित खंजर और ‘बलिदान’ शब्द देश के लिए सर्वोच्च त्याग की भावना का प्रतीक है.

दीक्षा को शुरुआत में शारीरिक चुनौतियों के कारण दो बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. तीसरे प्रयास में सफलता हासिल करते हुए दिसंबर 2022 में वह रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर के रूप में पैरा यूनिट से जुड़ीं. छह महीने से अधिक सेवा और कठिन ऑपरेशनल माहौल में योगदान के बाद उन्हें यह प्रतिष्ठित बैज पहनने का सम्मान मिला.

ऑपरेशन दोस्त में अंतरराष्ट्रीय सेवा

साल 2023 में उन्हें ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की भेजा गया, जहां भूकंप के बाद राहत कार्यों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. मलबे और आपात परिस्थितियों में मेडिकल सहायता देना उनकी पेशेवर क्षमता और मानसिक मजबूती का प्रमाण था.

बदलती सोच और नई प्रेरणा

मेजर दीक्षा की उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सेना में जेंडर इंटीग्रेशन की दिशा में बड़ा कदम है. उनकी मौजूदगी 2024 की गणतंत्र दिवस परेड में भी प्रेरणा का केंद्र रही. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि साहस का कोई लिंग नहीं होता. दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से हर बाधा को पार किया जा सकता है. आने वाली पीढ़ियों के लिए वह सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि उम्मीद और बदलाव की प्रतीक बन चुकी हैं.

Munna Kumar

11+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल में SEO-आधारित कंटेंट, डेटा इनसाइट्स और प्रभावी स्टोरीटेलिंग में विशेषज्ञ. रणनीति, क्रिएटिविटी और टेक्निकल स्किल्स के साथ उच्च-गुणवत्ता, आकर्षक और विश्वसनीय कंटेंट तैयार करना शामिल है. अभी इंडिया न्यूज में कार्यरत हूं. इससे पहले नेटवर्क18, जी मीडिया, दूरदर्शन आदि संस्थानों में कार्य करने का अनुभव रहा है.

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