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बच्चों से बुजुर्गों तक जानें किस उम्र में कितनी नींद है जरूरी? जरूरत से ज्यादा नींद क्यों बन सकती है खतरा

Oversleeping Affects: हम अक्सर सुनते हैं कि कम नींद लेना नुकसानदायक है, लेकिन बहुत ज्यादा सोना भी शरीर के लिए सही नहीं माना जाता. रिसर्च बताती है कि जहां 7-9 घंटे की नींद ज्यादातर वयस्कों के लिए बेहतर है, वहीं रोज 9 घंटे या उससे ज्यादा सोना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक  हो सकता है. आइए जानते हैं.

Health Risks of Oversleeping: हम अक्सर सुनते हैं कि कम नींद लेना सेहत के लिए खतरनाक है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादा सोना भी नुकसान पहुंचा सकता है? हाल की कई स्टडीज बताती हैं कि रोजाना 9 घंटे या उससे ज्यादा सोना भी कुछ स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा हो सकता है.

नींद हमारे शरीर की बुनियादी जरूरत है. इसी दौरान शरीर की मरम्मत होती है, हार्मोन संतुलित होते हैं और भावनाएं स्थिर होती हैं. ज्यादातर वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है. अगर नींद की गुणवत्ता अच्छी है और दिन में ऊर्जा बनी रहती है, तो यही संतुलन सबसे बेहतर माना जाता है.

कम और ज्यादा नींद दोनों से खतरा

एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग रोज 7 घंटे से कम सोते हैं, उनमें मृत्यु का खतरा बढ़ा हुआ था. लेकिन हैरानी की बात यह है कि 9 घंटे या उससे ज्यादा सोने वालों में यह खतरा और भी ज्यादा पाया गया. यानी बहुत कम और बहुत ज्यादा, दोनों तरह की नींद शरीर के लिए ठीक नहीं मानी जाती.कुछ रिसर्च में यह भी देखा गया कि जरूरत से ज्यादा सोने वाले लोगों में डिप्रेशन, वजन बढ़ना, मेटाबॉलिक समस्याएं और दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा पाया गया. लंबे समय तक ज्यादा सोने की आदत स्ट्रोक के जोखिम से भी जुड़ी हुई है, खासकर महिलाओं में.

ज्यादा सोना वजह है या खतरा?

यह समझना जरूरी है कि ज्यादा सोना हमेशा बीमारी की वजह नहीं होता, बल्कि कई बार यह किसी छिपी हुई समस्या का संकेत हो सकता है.जिन लोगों को दिल की बीमारी, डायबिटीज, डिप्रेशन या लगातार दर्द जैसी समस्याएं होती हैं, वे अक्सर ज्यादा सोते हैं. कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट भी नींद बढ़ा सकते हैं.
इसके अलावा, अगर नींद की गुणवत्ता खराब हो जैसे बार-बार नींद टूटना या स्लीप एपनिया  तो व्यक्ति ज्यादा समय बिस्तर पर बिताता है, लेकिन फिर भी तरोताजा महसूस नहीं करता. ऐसे में घंटों ज्यादा हो सकते हैं, पर असली आराम नहीं मिलता.

उम्र के साथ बदलती है जरूरत

युवाओं  को आमतौर पर 8 से 10 घंटे की नींद चाहिए होती है. वयस्कों और बुजुर्गों के लिए 7 से 9 घंटे का दायरा बेहतर माना जाता है. अगर किसी वयस्क को रोज 9 घंटे से ज्यादा नींद की जरूरत पड़ रही है और फिर भी थकान बनी रहती है, तो यह संकेत हो सकता है कि कुछ ठीक नहीं है.

आइए उम्र के हिसाब से समझते हैं कि किसे कितनी नींद की जरूरत होती है

  • 4 से 12 महीने के शिशु
    इस उम्र में बच्चों को 24 घंटे में लगभग 12 से 16 घंटे की नींद चाहिए. इसमें दिन की झपकियां भी शामिल होती हैं.
  • 1 से 2 साल के बच्चे
    इन बच्चों को 11 से 14 घंटे की नींद की जरूरत होती है, जिसमें दिन की नींद भी शामिल है.
  • 3 से 5 साल
    इस उम्र में 10 से 13 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है.
  • 6 से 12 साल
    स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज 9 से 12 घंटे की नींद लेनी चाहिए.
  • 13 से 18 साल के किशोर
    किशोरों के लिए 8 से 10 घंटे की नींद जरूरी है, क्योंकि इस समय शरीर और दिमाग तेजी से विकसित हो रहे होते हैं.
  • वयस्क
    बड़ों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए. कई लोगों को 7 से 9 घंटे की नींद सबसे ज्यादा संतुलित और फायदेमंद लगती है.

अच्छी सेहत के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी है?

अच्छी नींद सिर्फ थकान दूर करने के लिए नहीं होती, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों की मरम्मत का समय होती है. लेकिन हर व्यक्ति को एक समान नींद की जरूरत नहीं होती. आपकी उम्र, दिनचर्या, सेहत और जीवनशैली इस बात को तय करती है कि आपको कितने घंटे सोना चाहिए.

कब डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए?

अगर आपको रोज 9 घंटे से ज्यादा नींद चाहिए और फिर भी ऊर्जा कम महसूस होती है, वजन बढ़ रहा है, मूड खराब रहता है या शरीर में दर्द बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें. डॉक्टर से सलाह लेने पर असली कारण सामने आ सकता है, जैसे थायरॉयड की समस्या, डिप्रेशन या स्लीप डिसऑर्डर.नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि अच्छी सेहत की नींव है. इसलिए अगर ज्यादा सोने का पैटर्न दिखे, तो इसे समाधान नहीं बल्कि एक संकेत की तरह लें. सही मात्रा और अच्छी गुणवत्ता की नींद ही आपको सच में स्वस्थ रख सकती है.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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