Natural Cooling Technique: आधुनिकता की चकाचौंध में हम पुराने तौर-तरीकों को भूलते जा रहे है, जिसका असर सीधा हमारी जेब और पर्यावरण पर पड़ रहा है. पुराने समय में जब एसी-कूलर और पंखे जैसी तकनीकें विकसित नहीं हुई थीं, तब भी गर्मियों में लोग बिना तामझाम के घरों के अंदर रहते थे. इसके पीछे की वजह कुछ और नहीं, बल्कि 300 साल पुरानी एक वास्तुकला है. इसे कावी फ्लोरिंग कहते हैं, जो आज भी केरल के घरों में देखने को मिलती है. कावी फ्लोरिंग घरों को एस्थेटिक लुक देती ही है, घर का तापमान भी काफी हद तक ठंडा रखती है. जानें क्या है कावी फ्लोरिंग, इसे कराने में कितना खर्च आता है और इसके क्या-क्या फायदे हैं-
कैसे होती है कावी फ्लोरिंग?
कावी फ्लोरिंग में चूना, आयरन ऑक्साइड और पानी के अलावा नारियल के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. ये चीजें इनवायरमेंट फ्रेंडली तो हैं ही, किफायती दरों पर मार्केट में मिल जाती है. इन सभी चीजों को मिलाकर कावी फ्लोरिंग का मटेरियल तैयार करते हैं. इसे फर्श पर लगाते हैं और सूखने के बाद नारियल के तेल से पॉलिशिंग की जाती है. इससे फर्श मुलायम और चमकदार बना रहता है. इससे फर्श को ठंडा रखने में भी मदद मिलती है.
घर को कैसे ठंडा रखती है?
कावी फ्लोरिंग की नेचुरल कूलिंग प्रॉपर्टीज दिन में गर्मी को सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं, जिससे तापमान बैलेंस रहता है. इसमें मौजूद चूना और मिट्टी थर्मल इंसुलेटर की तरह काम करे हैं तो वहीं गोबर और नारियल के तेल से घर के अंदर प्राकृतिक सुगंध बनी रहती है. इसी की मदद से घर में घुटन या ऊमस जैसा वातावरण पैदा नहीं होता.
आज के समय में कितनी कारगर है?
कावी फ्लोरिंग को आधुनिक सीमेंट और टाइल्स की फ्लोरिंग से कहीं ज्यादा किफायती और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बताया जाता है. यही कारण है कि आज भी केरल के घरों में महंगी फ्लोरिंग्स के बजाए कावी फ्लोरिंग को तवज्जो दी जाती है. हालांकि पुराने वक्त में खुले घर और मोटी दीवारें होती है, तब कावी फ्लोरिंग के जरिए घर में वेंटीलेशन और कूलिंग मेंटेन करना आसान होता था. ऐसे में कार्बन उत्सर्जन भी न के बराबर था, लेकिन आज की आधुनिकता के बीच ये व्यवस्थाएं लुप्त होती जा रही हैं.
बिजली बिल से राहत
कावी फ्लोरिंग के मामले में फायदों का अनुमान लगाना आसान है, क्योंकि ऐसी पारंपरिक तकनीकें वन टाइम इन्वेस्टमेंट होती है, जो निश्चित तौर पर गर्मी दूर करने वाले बिजली के साधनों पर निर्भरता को काफी हद तक नियंत्रित करती हैं, क्योंकि इससे घर में हीट और ऊमस नहीं बनती, इसलिए बार-बार एसी-कूलर का इस्तेमाल नहीं पड़ता और बिजली के बिल से काफी हद तक राहत मिल सकती है.
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