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नदी में सिक्का डालते ही पूरी हो जाती है मन्नत? जानिए इस परंपरा के पीछे छिपा धार्मिक राज और चौंकाने वाला वैज्ञानिक सच

आपने अक्सर देखा होगा कि लोग नदी, तालाब या कुंड में सिक्के डालते हैं. लोग कहते हैं कि इससे मनोकामना पूरी होती है, लेकिन क्या सच में यह सिर्फ मन्नत से जुड़ा है? असल में इस परंपरा के पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ वैज्ञानिक और सामाजिक कारण भी छिपे हैं. समय के साथ यह परंपरा कैसे बदली, आइए जानते हैं.

Why People Throw Coins in Rivers: हिंदू धर्म में नदियों को देवी का रूप माना गया है. गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी नदियां मोक्ष देने वाली मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार नदी में सिक्का डालना दान का एक रूप है.पुराने समय में लोग पूजा के बाद जल में तांबे या चांदी का सिक्का अर्पित करते थे ताकि देवी प्रसन्न हों और जीवन में सुख-समृद्धि आए. यही वजह है कि धीरे-धीरे यह परंपरा ‘मन्नत मांगने’ से जुड़ गई. नदी में सिक्के डालने की परंपरा सिर्फ मन्नत मांगने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे धर्म, विज्ञान और मनोविज्ञान- तीनों का गहरा संबंध है.हालांकि, बदलते समय में इस परंपरा को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निभाना जरूरी हो गया है, ताकि आस्था भी बनी रहे और प्रकृति भी सुरक्षित रहे.

नदी में सिक्का डालने का वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो पुराने समय में डाले जाने वाले सिक्के तांबे, पीतल या चांदी के होते थे. इन धातुओं में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. जब ऐसे सिक्के पानी में डाले जाते थे, तो वे हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करते थे. इससे पानी अपेक्षाकृत शुद्ध रहता था और पीने योग्य बना रहता था. यानी यह परंपरा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई थी.

नदी में सिक्का डालने का मनोवैज्ञानिक कारण

सिक्का डालते समय लोग मन में कोई इच्छा जरूर रखते हैं. मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि यह एक तरह से पॉजिटिव सोच और उम्मीद जगाने की प्रक्रिया है.जब इंसान अपनी समस्या या इच्छा को किसी कार्य से जोड़ देता है, तो उसे मानसिक संतोष मिलता है. यही वजह है कि आज भी लोग इसे ‘विश पूरा होने’ से जोड़कर देखते हैं.

समय के साथ बदली परंपरा

पहले सिक्के प्राकृतिक धातुओं के होते थे, लेकिन आज अधिकतर सिक्के स्टील और अन्य मिश्र धातुओं से बने हैं, जो पानी को नुकसान पहुंचा सकते हैं.आज बड़ी संख्या में सिक्के नदियों में डालने से जल प्रदूषण बढ़ रहा है. इसी कारण कई धार्मिक संस्थाएं और सरकारें लोगों से अपील कर रही हैं कि सिक्के नदी में डालने के बजाय दान पात्र में डालें.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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